दुनिया के दूसरे देशों की तरह भारत ने पश्चिम एशिया संकट का सामना किया है। अब अमेरिका के साथ व्यापार समझौता भारत की इकोनॉमी की ग्रोथ की रफ्तार बढ़ा सकता है। मशहूर अर्थशास्त्री और आईएमएफ के पूर्व एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर सुरजीत भल्ला ने यह अनुमान जताया है। मनीकंट्रोल की श्वेता पुंज को दिए इंटरव्यू में उन्होंने अमेरिका से ट्रेड डील के फायदों के साथ ही इंडियन इकोनॉमी के बारे में कई अहम बातें बताईं।
पश्चिम एशिया क्राइसिस का भारत की ग्रोथ पर ज्यादा असर नहीं
पश्चिम एशिया में जारी टेंशन के बारे में उन्होंने कहा कि मैंने कई बार कहा है कि दुनिया बदल चुकी है। अमेरिका की ग्रोथ बहुत अच्छी है। उसने सबको हैरान किया है। फिर लड़ाई शुरू हो गई। यहां तक कि यूरोप की भी ग्रोथ अपनी रफ्तार से चल रही है। अब सवाल है कि दुनिया में किस देश की अर्थव्यवस्था को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा है? हमें इस बारे में सोचना होगा। अगर उन्हें (अमेरिका-यूरोप) नुकसान उठाना पड़ा है और हमें नुकसान नहीं हुआ है तो इसका मतलब यह है कि इस लड़ाई का हमारे ग्रोथ रेट पर ज्यादा असर नहीं पड़ा है।
भारत में इकोनॉमी की ग्रोथ में घरेलू कंजम्प्शन की बड़ी हिस्सेदारी
भल्ला ने कहा कि इसकी वजह यह है कि हमारी ग्रोथ में ज्यादा योगदान घरेलू कंजम्प्शन का है, जो दूसरे देशों के मुकाबले काफी ज्यादा है। विकासशील देशों में निवेश ज्यादा देखने को मिलता है। लेकिन, मेरा मानना है कि हर व्यक्ति इस बात से हैरान है कि पश्चमि एशिया संकट का ग्रोथ और इनफ्लेशन पर असल में असर नहीं पड़ा है। पहले ऑयल की कीमतों में उछाल का इनफ्लेशन पर ज्यादा असर पड़ा था। यही बात ग्रोथ के मामले में भी लागू होती है। सरकारें ऑयल की सप्लाई का रास्ता निकाल रही हैं।
अमेरिका के साथ व्यापार समझौते से बढ़ेगी ग्रोथ
अमेरिका, यूनाइटेड किंग्डम से ट्रेड डील के बारे में उन्होंने कहा अमेरिका से व्यापार समझौते के कई फायदे हैं। यह सिर्फ एक व्यापार समझौता नहीं है। यह व्यापार और निवेश का समझौता है। हालांकि, हमने ईयू और यूके के साथ जो व्यापार समझौते किए हैं, उनमें निवेश का कोई प्रावधान नहीं है। ईयू दुनिया के सबसे ज्यादा रेगुलेटेड इकोनॉमीज में से एक है। यूके छोटा है। उसके बाद हमने न्यूजीलैंड से डील की। लेकिन, मेरा मानना है कि अमेरिका के साथ हमारा व्यापार और निवेश का समझौता सबसे अहम है। यह इंडियन इकोनॉमी की की कई समस्याएं दूर करेगा।