स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अपने खिलाफ कथित यौन उत्पीड़न मामले में बड़ा कदम उठाया है। गिरफ्तारी से बचने के लिए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की। बता दें कि, ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर यौन शोषण के आरोप लगे हैं। POCSO कोर्ट के आदेश उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने उठाए ये बड़े सवाल
वहीं अपने ऊपर लगे आरोपों पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने मंगलवार को कहा कि, "हमें अभी तक कोई नोटिस नहीं मिला है। जब वे (पुलिस) आएंगे, तो हम उनसे बात करेंगे। पुलिस ने अभी तक हमसे संपर्क नहीं किया है, न ही उन्हें सूचित किया गया है, न ही उन्हें कोई नोटिस दिया गया है। सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा यह है कि उन बच्चों से हमारा क्या संबंध है? जो बच्चे कभी हमारे ध्यान में नहीं आए, जिन्होंने कभी हमारे संस्थान में दाखिला नहीं लिया, आप उनके हजारों मेडिकल टेस्ट कर सकते हैं। यह आप पर निर्भर है कि आप उनका हमसे संबंध साबित करें।
उन्होंने आगे कहा कि, हमारे वकील FIR के खिलाफ कोर्ट जाने पर काम कर रहे हैं... POCSO जैसे मामले में पुलिस को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। उन्हें बच्चे की बात पर विश्वास करना चाहिए, और उस पर विश्वास करने के बाद, उन्हें तुरंत मेडिकल जांच करवानी चाहिए। तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। तो सवाल यह है कि पुलिस ने इसे दर्ज क्यों नहीं किया।"
कोर्ट ने आदेश पर दर्ज किया गया है मामला
बता दें कि, स्वामी रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी ने तहत जिला कोर्ट में अर्जी दाखिल की थी. जिस पर पॉक्सो स्पेशल कोर्ट ने झूंसी पुलिस को मुकदमा दर्ज कर विवेचना का आदेश दिया था। झूंसी थाना पुलिस ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, उनके शिष्य मुकुंदानंद गिरी और दो-तीन अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। पुलिस के मुताबिक, अदालत के आदेश के बाद केस दर्ज किया गया। कोर्ट के निर्देश मिलने के बाद 21 फरवरी को औपचारिक रूप से केस दर्ज किया गया। बताया जा रहा है कि आरोप 13 जनवरी 2025 से 15 फरवरी 2026 के बीच की घटनाओं से जुड़े हैं। शिकायत में नाबालिगों से संबंधित यौन अपराधों के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शंकराचार्य ने कहा है कि वह जांच में पुलिस का पूरा सहयोग करेंगे और किसी भी तरह का विरोध नहीं करेंगे।