ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने सोमवार को अपने ऊपर लगे यौन शोषण के आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया। उन्होंने इन आरोपों को झूठा और मनगढ़ंत बताया। उन्होंने कहा कि जिन लड़कों ने आरोप लगाए हैं, वे कभी उनके कैंप या गुरुकुल में आए ही नहीं। उनका कहना है कि वे लड़के न तो यहां पढ़े हैं और न ही उनका उनसे कोई संबंध है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोपों पर कही ये बात
शंकराचार्य ने बताया कि केस में जमा की गई मार्कशीट से साफ है कि, वे लड़के हरदोई के एक स्कूल के छात्र हैं। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जब वे कभी यहां आए ही नहीं और उनका इस स्थान से कोई जुड़ाव नहीं है, तो उनके साथ गलत काम कैसे हो सकता है। उन्होंने दोहराया कि उनके खिलाफ लगाए गए सभी आरोप बेबुनियाद हैं। यह बयान उस समय आया जब झूंसी थाने में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती, उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी और कुछ अन्य लोगों के खिलाफ POCSO एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की गई।
पुलिस कर रही मामले की जांच
पुलिस के मुताबिक, यह मामला एक विशेष अदालत के आदेश के बाद दर्ज किया गया। कोर्ट के निर्देश मिलने के बाद शनिवार रात करीब 11:30 बजे औपचारिक रूप से केस दर्ज किया गया। अधिकारियों ने पुष्टि की कि यह कार्रवाई पूरी तरह कोर्ट के आदेश के अनुसार की गई है। बताया जा रहा है कि आरोप 13 जनवरी 2025 से 15 फरवरी 2026 के बीच की घटनाओं से जुड़े हैं। शिकायत में नाबालिगों से संबंधित यौन अपराधों के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शंकराचार्य ने कहा है कि वह जांच में पुलिस का पूरा सहयोग करेंगे और किसी भी तरह का विरोध नहीं करेंगे।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि, वे किसी भी तरह से पुलिस का विरोध नहीं करेंगे और जांच में पूरा सहयोग देंगे। उन्होंने कहा कि पुलिस जो भी कार्रवाई करेगी, उसे जनता देख रही है। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि, उनके लिए तीन तरह की “कोर्ट” हैं। पहली, निचली अदालत यानी जनता — जो सब कुछ देख रही है और अपना फैसला देगी। दूसरी, बीच की अदालत यानी उनकी अपनी अंतरात्मा — जो बताती है कि वे सही हैं या गलत। और तीसरी, सबसे बड़ी अदालत यानी भगवान — जो सब पर नजर रखे हुए हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें भरोसा है कि इन तीनों “अदालतों” से उन्हें पहले ही क्लीन चिट मिल चुकी है।