BRICS Summit 2026: 'टेक्नोलॉजी और खनिजों का इस्तेमाल हथियार के तौर पर न हो'; ब्रिक्स समिट में PM मोदी का सख्त संदेश

BRICS समिट 2026 के दूसरे दिन रविवार (13 सितंबर) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मैं मेरे निजी अनुभव के साथ कह सकता हूं कि ब्रिक्स में ग्लोबल साउथ के देशों का विश्वास बढ़ा है क्योंकि BRICS में उनकी आवाज सुनी जाती है। पीएम मोदी ने कहा कि उनके अनुभव का सम्मान होता है और समाधान न केवल उनके लिए बल्कि उनके साथ मिलकर बनाए जाते हैं

अपडेटेड Sep 13, 2026 पर 1:17 PM
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BRICS Summit 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ब्रिक्स देशों को एकजुट होकर काम करना होगा

BRICS Summit 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (13 सितंबर) को कहा कि दुनिया भर में बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव का आम लोगों की जिंदगी पर बुरा असर पड़ रहा है। इसलिए, ब्रिक्स देशों को इन चुनौतियों से निपटने और सभी के लिए विकास (खासकर 'ग्लोबल साउथ' में) को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम करना चाहिए। 'ग्लोबल साउथ' शब्द का इस्तेमाल आम तौर पर आर्थिक रूप से कम विकसित देशों के लिए किया जाता है।

ब्रिक्स समिट को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने रणनीतिक दबाव बनाने के लिए टेक्नोलॉजी और जरूरी खनिजों के इस्तेमाल पर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ऐसी हरकतें साझा प्रगति और समृद्धि की राह में बाधा बन सकती हैं।

'तनाव का आम लोगों के जीवन पर काफी बुरा असर'


प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दुनिया में बढ़ते तनाव का आम लोगों के जीवन पर काफी बुरा असर पड़ रहा है। इस दौरान, पीएम मोदी ने कहा कि संक्रामक बीमारियों की रोकथाम और उनसे निपटने के लिए ब्रिक्स 'अर्ली वार्निंग सिस्टम' पर सहमति बनी है।

पीएम मोदी ने ये बातें ब्रिक्स समूह के प्रमुख नेताओं की मौजूदगी में कहीं। समिट में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो शामिल थे।

'कोई भी संकट किसी एक इलाके तक सीमित नहीं रहता'

प्रधानमंत्री ने कहा, "भारत की अध्यक्षता में हमने चार स्तंभों पर ध्यान केंद्रित किया है। इनमें लचीलापन, इनोवेशन, सहयोग और सस्टेनेबिलिटी शामिल है। मुझे खुशी है कि आपके सहयोग और समर्थन से हम अपनी साझा सोच को आपसी फायदे वाले नतीजों में बदलने में सफल रहे हैं।"

PM मोदी ने बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव और दुनिया भर में आम लोगों की जिंदगी पर इसके बुरे असर का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, "बढ़ते वैश्विक तनाव का आम लोगों की जिंदगी पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है। महामारी (कोरोना वायरस), जलवायु से जुड़ी आपदाओं और सप्लाई चेन में रुकावटों ने यह दिखा दिया है कि आज की आपस में जुड़ी दुनिया में कोई भी संकट किसी एक इलाके तक सीमित नहीं रहता।"

उन्होंने आगे कहा, "इसीलिए हमने ब्रिक्स समूह के भीतर लचीलापन बढ़ाने पर खास जोर दिया है। चुनौतियों की समय रहते पहचान करना, उनके लिए तैयार रहना और तुरंत कदम उठाना भी उतना ही जरूरी है।" प्रधानमंत्री ने कहा, "इसी सोच के साथ संक्रामक बीमारियों की रोकथाम और उनसे निपटने के लिए ब्रिक्स के इंटीग्रेटेड अर्ली वॉर्निंग सिस्टम (शुरुआती चेतावनी प्रणाली) पर सहमति बनी है।"

डेटा को इंटीग्रेट करने वाले सिस्टम के लिए भी गाइडलाइंस

PM मोदी ने बताया कि शुरुआती चेतावनी से जुड़े डेटा को इंटीग्रेट करने वाले सिस्टम के लिए गाइडलाइंस भी तैयार की गई हैं। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स लॉजिस्टिक्स सप्लाई चेन सहयोग फ्रेमवर्क हमारी सप्लाई चेन को ज्यादा भरोसेमंद और मज़बूत बनाने में मदद करेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि 'ग्लोबल साउथ' के सामने मौजूद चुनौतियों से निपटने के लिए ब्रिक्स देशों को मिलकर काम करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि ब्रिक्स में 'ग्लोबल साउथ' का भरोसा बढ़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि इनोवेशन के सेक्टर्स में 'ब्रिक्स इनक्यूबेटर नेटवर्क' हमारे स्टार्टअप और 'इनक्यूबेटर्स' को आपस में जोड़ेगा। 'इनक्यूबेटर' उन संस्थानों या संगठनों को कहते हैं जो नए स्टार्टअप्स को उनके शुरुआती दौर में गाइडेंस, टेक्निकल सपोर्ट, एक्सपर्ट की सलाह और संसाधन देकर मदद करते हैं। साथ ही उन्हें निवेश के मौकों से जुड़ने में भी सहायता करते हैं।

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