Shahzad Bhatti: बिना किसी जिहादी ट्रेनिंग के तैयार हो रहे नए आतंकी! जानिए ISI के मोहरे शहजाद भट्टी ने कैसे बदला आतंकवाद का पुराना मॉडल
Shahzad Bhatti: पाकिस्तान के मोहरे शहजाद भट्टी नेटवर्क के खिलाफ की गई कार्रवाई ने ISI समर्थित आतंकवाद के एक ऐसे रूप को सामने लाया है, जो आतंकी संगठनों की आम छवि से बिल्कुल अलग है। 12 अगस्त को सुरक्षा एजेंसियों ने 14 राज्यों में एक साथ ऑपरेशन चलाकर 253 लोगों को हिरासत में लिया था
Shahzad Bhatti: शहजाद भट्टी बिना किसी जिहादी ट्रेनिंग के आतंकी तैयार कर रहा है
Shahzad Bhatti: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार (17 अगस्त) को कहा कि स्वतंत्रता दिवस से पहले पाकिस्तानी खूफिया एजेंसी ISI (इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस) समर्थित आतंकी संगठन 'शहजाद भट्टी नेटवर्क' के 200 से ज्यादा सदस्यों को गिरफ्तार किया गया। इससे संगठन के विध्वंसक हमले करने की साजिश नाकाम हो गई। उन्होंने कहा कि 14 राज्यों में अलग-अलग जगहों पर समन्वित अभियान चलाए गए, जो आतंकवाद के प्रति देश की 'कतई बर्दाश्त न करने' की नीति को दर्शाते हैं।
उन्होंने कहा कि आईएसआई से फंड पाने वाले इस समूह से भारी मात्रा में सामान बरामद किया गया। इसमें आईईडी, पाकिस्तान आयुध निर्माणी के निशान वाले ग्रेनेड, पिस्तौल, कारतूस और जासूसी के लिए इस्तेमाल होने वाले सीसीटीवी कैमरे शामिल हैं। शाह ने कहा कि यह नेटवर्क कई आतंकी गतिविधियों में शामिल था।
शाहजाद भट्टी नेटवर्क क्या है?
सरकार के एक बयान के मुताबिक, शाहजाद भट्टी नेटवर्क (SBN) पाकिस्तान स्थित, आईएसआई द्वारा समर्थित आतंकी सिंडिकेट है जो भारत में ग्रेनेड, आईईडी और पेट्रोल बम हमलों तथा लक्षित हत्याओं में शामिल है। SBN स्थानीय सहयोगियों को पैसे देकर पुलिस, रक्षा और धार्मिक स्थलों की रेकी करवाता था। इस दौरान जासूसी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगवाता था। NIA भट्टी के खिलाफ कई मामलों की जांच कर रही है। इनमें पंजाब के जालंधर में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर रोजर संधू के घर पर मार्च 2025 में हुए ग्रेनेड हमले से कथित संबंध का मामला भी शामिल है।
अप्रैल 2026 में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने भट्टी को भगोड़ा घोषित करते हुए उसके और मामले के एक अन्य आरोपी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। एंटी टेरर एजेंसी ने यह भी पाया है कि भट्टी ने नवंबर 2025 में हरियाणा के सिरसा स्थित महिला पुलिस थाने में हुए धमाके और जनवरी 2026 में हरियाणा के अंबाला स्थित बलदेव नगर पुलिस थाने में हुए धमाके की साजिश भी रची थी।
कई मामलों में आरोपी है शाहजाद भट्टी
सिरसा मामले में NIA ने मई 2026 में भट्टी और पाकिस्तान में मौजूद एक और हैंडलर सोहेल अहमद (उर्फ सोहेल बलोच) समेत नौ लोगों के खिलाफ चार्जशीट दायर किया था। बलदेव नगर पुलिस थाने का मामला कार बम धमाके से जुड़ा है, जिसमें गिरफ्तार एक आरोपी भट्टी के संपर्क में पाया गया था। 14 राज्यों में 253 लोगों को हिरासत में लिया गया है।
इनमें उत्तर प्रदेश (62), हरियाणा (52), दिल्ली (51), पंजाब (44), राजस्थान (15), महाराष्ट्र (8), उत्तराखंड (5), कर्नाटक, गुजरात और बिहार (3-3) तथा तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और केरल(2-2) से पकड़े गए लोग शामिल है। एक सरकारी बयान में कहा गया कि अब तक शाहजाद भट्टी नेटवर्क के खिलाफ 80 से अधिक FIR और 200 से अधिक गिरफ्तारियां दर्ज की जा चुकी हैं।
14 राज्यों में एक साथ कार्रवाई
12 अगस्त की कार्रवाई में उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, कर्नाटक, गुजरात, बिहार, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और केरल में कार्रवाई की गई। 253 लोगों को हिरासत में लिए जाने के साथ ही इस नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई का दायरा काफी बड़ा हो गया। जांच में अब तक 80 से अधिक FIR दर्ज होने की बात सामने आई है। इनमें UAPA, BNS, Arms Act, NDPS Act और Explosive Substances Act जैसी धाराओं के तहत मामले शामिल बताए गए हैं।
प्रचार के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल
नेटवर्क का एक दूसरा महत्वपूर्ण पहलू कथित प्रचार तंत्र है। जांच एजेंसियों ने इसके संबंध Tehreek-e-Taliban Hindustan के कथित प्रचार से भी जोड़े हैं। कुछ लोगों को दिल्ली और फरीदाबाद में संबंधित पोस्टर लगाने के निर्देश दिए जाने का आरोप है। कुछ ऑपरेटिव्स को पुलिसकर्मियों पर हमलों की रिकॉर्डिंग करने और उसे सोशल मीडिया पर प्रसारित करने के लिए कहा गया। इससे पता चलता है कि नेटवर्क के लिए सोशल मीडिया केवल भर्ती का माध्यम नहीं... बल्कि प्रचार, डर पैदा करने और अपनी गतिविधियों को दिखाने का जरिया भी हो सकता था।
भट्टी नेटवर्क ने बदला आतंकवाद का पारंपरिक मॉडल?
पूरे मामले से यह संकेत मिलता है कि आधुनिक सीमा-पार आतंकी नेटवर्क केवल ट्रेंड आतंकियों और पारंपरिक स्लीपर सेल पर निर्भर नहीं रहना चाहते। सोशल मीडिया, स्थानीय अपराधी, आर्थिक रूप से कमजोर युवा, विदेशी हैंडलर्स, एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन और संगठित अपराध इन सभी को जोड़कर एक नया नेटवर्क तैयार किया जा सकता है।
इस मॉडल में किसी व्यक्ति को शुरुआत में यह भी पता नहीं होता कि वह जिस काम के लिए पैसे ले रहा है, उसका अंतिम उद्देश्य क्या है। यही वजह है कि सुरक्षा एजेंसियों के सामने चुनौती केवल हथियार बरामद करने या आतंकियों को गिरफ्तार करने की नहीं है। बल्कि उस भर्ती और नेटवर्क बनाने वाले पूरे इकोसिस्टम को तोड़ने की है।
अब आगे क्या?
12 अगस्त की कार्रवाई ने नेटवर्क के एक बड़े हिस्से को प्रभावित किया हो सकता है। लेकिन सुरक्षा एजेंसियों के लिए असली चुनौती यह सुनिश्चित करना होगी कि यही मॉडल किसी दूसरे नाम, दूसरे सोशल मीडिया चेहरे या नए युवाओं के समूह के साथ दोबारा खड़ा न हो।
शहजाद भट्टी नेटवर्क का मामला कथित तौर पर यही दिखाता है कि आज का संभावित आतंकी हमेशा बंदूक लेकर घूमता हुआ ट्रेंड जिहादी नहीं दिखेगा। वह कोई छोटा अपराधी, आर्थिक रूप से परेशान युवक या सामान्य सोशल मीडिया यूजर भी हो सकता है। यही इस नेटवर्क को पारंपरिक आतंकी संगठनों से अलग और सुरक्षा के लिए अधिक जटिल बनाता है।