भारतीय चुनावी सिस्टम के कायल हुए डोनाल्ड ट्रंप! BJP हुई गदगद, तो कांग्रेस को लगी मिर्ची, किसने क्या कहा?

Donald Trump: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को अमेरिका में वोटरों के लिए जरूरी फोटो पहचान-पत्र की अपनी मांग को दोहराते हुए भारत की चुनावी व्यवस्था और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार का जिक्र किया। हालांकि, ट्रंप की इस टिप्पणी से भारत में सत्तारूढ़ BJP और कांग्रेस के बीच राजनीतिक खींचतान शुरू हो गई है

अपडेटेड Aug 18, 2026 पर 12:09 PM
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Donald Trump: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय चुनावी सिस्टम की जमकर सराहना की है

अमेरिका में कड़े चुनावी कानूनों की पैरवी करते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय चुनावी सिस्टम की जमकर सराहना की है। ट्रंप ने कहा कि भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने अमेरिकी चुनावों में मतदाता की पहचान की कमी को लेकर सवाल उठाया है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट में कहा कि भारत में हाल में हुए आम चुनावों में 64.6 करोड़ से अधिक लोगों ने मतदान किया। जबकि एक प्रतिशत से भी कम लोगों ने डाक मतपत्र के जरिए मतदान किया।

ट्रंप ने कहा कि भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने इस महीने की शुरुआत में उनके प्रशासन के अधिकारियों से बातचीत की थी। इस दौरान पूछा था कि अमेरिका में वैध फोटो पहचान पत्र के बिना चुनाव कैसे कराए जा सकते हैं। ट्रंप की इस टिप्पणी से भारत में केंद्र में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) और मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस के बीच राजनीतिक खींचतान शुरू हो गई है। BJP ने दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की तारीफ की। वहीं, कांग्रेस ने तर्क दिया कि भारत में भी चुनाव बैलेट पेपर से होने चाहिए।

किसने क्या कहा?


भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता राजीव चंद्रशेखर ने ट्रंप की टिप्पणियों का स्वागत करते हुए कहा कि दुनिया के सबसे अमीर लोकतंत्र द्वारा भारत की चुनावी प्रणाली को एक मिसाल के तौर पर देखा जा रहा है। चंद्रशेखर ने X पर एक पोस्ट में कहा, "दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र भारत, दुनिया के सबसे अमीर लोकतंत्र अमेरिका को प्रेरित कर रहा है कि लोकतंत्र में केवल कानूनी नागरिक ही वोट दें।"

उन्होंने अपनी पोस्ट में आगे कहा कि लोकतंत्र तभी काम करता है जब उसे सिर्फ उसके नागरिकों से ही ताकत मिलती है। हालांकि, कांग्रेस नेता उदित राज ने ट्रंप की टिप्पणियों पर अलग राय रखी। उन्होंने कहा कि भारत में भी चुनाव बैलेट पेपर से होने चाहिए।

उदित राज ने X पर लिखा, "भारत में भी चुनाव बैलट पेपर से हो। ट्रंप ने भारत की चुनावी व्यवस्था, जैसे वोटर आईडी कार्ड, की प्रशंसा की तो गोदी मीडिया ने इसे बड़ी खबर बना दिया। जबकि ट्रंप को शायद यह नहीं पता कि भारत में यह व्यवस्था बहुत पहले से लागू है। लेकिन जब डोनाल्ड ट्रंप, एलन मस्क और तुलसी गबार्ड ने बैलेट पेपर से चुनाव कराने की पुरजोर वकालत की, तब यही मीडिया खामोश क्यों रहा? जबकि अमेरिका में भी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग का इस्तेमाल सीमित रूप में ही होता है।"

इसके अलावा कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने X पर लिखा, "प्रिय डोनाल्ड ट्रंप, कृपया ज्ञानेश कुमार गुप्ता को अमेरिका ले जाइए और उन्हें वहीं रखिए। हम अपनी EVM भी अगली उपलब्ध फ्लाइट से भेज देंगे। आपने हमें जितनी भी बेइज़्ज़ती और बदसलूकी दी है, उसके बदले हम आपके लिए कम से कम इतना तो कर ही सकते हैं। प्यार के साथ, भारत की ओर से...।"

ट्रंप ने क्योंकि भारतीय चुनाव सिस्टम की तारीफ?

अमेरिकी राष्ट्रपति ने ये टिप्पणियां 'सेव अमेरिका एक्ट' के लिए समर्थन जुटाने के उद्देश्य से कीं। इस कानून के तहत अमेरिकियों को मतदान के लिए रजिस्ट्रेशन कराते समय नागरिकता का प्रमाण देना अनिवार्य होगा। इसके लिए पूरे देश में मतदाता पहचान पत्र की आवश्यकता लागू की जाएगी। डाक के जरिए मतदान को काफी हद तक सीमित किया जाएगा।

ट्रंप ने X पर लिखा, "इस महीने की शुरुआत में भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने हमारे प्रशासन से पूछा- वैध फोटो पहचान पत्र के बिना अमेरिका में चुनाव कैसे कराए जा सकते हैं?" अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, "भारत के पिछले चुनाव में 64.6 करोड़ मतदाता थे। एक प्रतिशत से भी कम लोगों ने डाक के जरिए मतदान किया और प्रत्येक मतदाता के पास एक वैध फोटो पहचान दस्तावेज होना जरूरी था।’"

उन्होंने जोर देकर कहा, "हमें अब 'सेव अमेरिका एक्ट' पारित करने की जरूरत है।" ट्रंप 'सेफगार्ड अमेरिकन वोटर एलिजिबिलिटी' (सेव) अमेरिका एक्ट को पारित कराने पर लगातार जोर दे रहे हैं। उनका दावा है कि यह कदम चुनावी धोखाधड़ी पर अंकुश लगाने में मदद करेगा।

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हालांकि, इस मुद्दे पर डेमोक्रेट और रिपब्लिकन दोनों दलों में मतभेद हैं। अमेरिकी सीनेट ने इस महीने की शुरुआत में पांच सप्ताह के अवकाश के लिए स्थगित होने से पहले इस कानून को पारित करने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

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