Monsoon Date Update: केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम सहित राज्य के कई हिस्सों में इस समय मूसलाधार बारिश हो रही है। सड़कों पर पानी भर गया है और गाड़ियां पानी को चीरती हुई निकल रही हैं। इस झमाझम बारिश को देखकर लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि जब मानसून अभी केरल से नहीं टकराया है, तो फिर यह बारिश क्या है? इस बीच भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने मानसून की तारीख को लेकर एक नया और बड़ा अपडेट जारी कर दिया है। आइए समझते हैं कि केरल में हो रही इस बारिश की असली वजह क्या है और मानसून अब कब तक दस्तक देगा।
देखिए केरल को कैसे भिगो रही बारिश
IMD ने पहले अनुमान लगाया था कि इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून अपने सामान्य समय यानी 1 जून से पहले 26 मई को ही केरल में दस्तक दे देगा। इसमें विभाग ने प्लस-माइनस 4 दिन का मॉडल एरर भी बताया था। पर मानसून अपनी इस शुरुआती संभावित तारीख पर केरल नहीं पहुंच सका।
अगर मानसून नहीं आया तो फिर यह बारिश क्या है?
IMD के अधिकारियों के मुताबिक केरल में इस समय जो भारी बारिश हो रही है वह असल में प्री-मानसून एक्टिविटी है। मौसम विभाग ने इसके पीछे की असली वजह बताते हुए कहा कि इस समय साउथ अरेबियन सी और उसके आस-पास के इलाकों पर एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन बना हुआ है। इसी सिस्टम के कारण केरल और लक्षद्वीप में इतनी तेज बारिश रिकॉर्ड की जा रही है।
मानसून की घोषणा में क्यों हो रही है देरी?
आपके मन में यह सवाल आ सकता है कि बारिश होने के बावजूद आईएमडी मानसून के आने का ऑफिशियल ऐलान क्यों नहीं कर रहा है? इसके पीछे मौसम विभाग के कुछ कड़े मापदंड होते हैं। आईएमडी ने नोट किया है कि फिलहाल मानसूनी हवाएं थोड़ी कमजोर पड़ गई हैं। इस वजह से मानसून की एंट्री का तुरंत ऐलान नहीं किया जा सकता। मानसून के ऑनसेट की घोषणा तभी होती है, जब तय किए गए वेदर स्टेशनों पर लगातार बारिश, विंड फील्ड में बदलाव और आउटगोइंग लॉन्गवेव रेडिएशन जैसे प्रमुख पैरामीटर्स पूरी तरह खरे उतरते हैं। फिलहाल ये परिस्थितियां धीरे-धीरे अनुकूल तो बन रही हैं लेकिन अभी तक सारे क्राइटेरिया पूरी तरह मैच नहीं हुए हैं।
अब कब आएगा मानसून? IMD का नया अनुमान
IM) ने अब अपनी उम्मीदों में थोड़ा बदलाव किया है. नए अपडेट के मुताबिक केरल में मानसून की ऑफिशियल एंट्री अब 28 मई से 3 जून के बीच कभी भी हो सकती है। यह पूरी तरह से मानसूनी पैरामीटर्स के मजबूत होने पर निर्भर करेगा। राहत की बात यह है कि मानसून केरल में भले ही थोड़ा सुस्त दिख रहा हो लेकिन यह आगे जरूर बढ़ रहा है। आईएमडी ने बताया कि मानसून साउथवेस्ट और साउथईस्ट अरब सागर, लक्षद्वीप के कुछ और इलाकों तथा बंगाल की खाड़ी के कई हिस्सों में आगे की तरफ बढ़ चुका है।
क्यों जरूरी है मानसून का समय पर आना?
भारत के लिए मानसून का सीजन (जून से सितंबर) बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। देश में होने वाली कुल सालाना बारिश का 70 फीसदी से ज्यादा हिस्सा इसी मानसून सीजन से मिलता है। हमारी खेती, पीने के पानी की सप्लाई, हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर जनरेशन (बिजली उत्पादन) और ग्राउंडवाटर को रीचार्ज करने के लिए मानसून का सही समय पर आना और अच्छी बारिश होना बेहद क्रिटिकल है। फिलहाल, केरल और लक्षद्वीप के लोगों को प्री-मानसून की बारिश से भीषण गर्मी से तो राहत मिल रही है लेकिन लगातार हो रही तेज बारिश की वजह से लोकल लेवल पर बाढ़ और जलभराव का खतरा भी बढ़ गया है। मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे लगातार आईएमडी के आधिकारिक अपडेट्स और अलर्ट्स पर नजर बनाए रखें।