Bakrid in Delhi: दिल्ली में बकरीद को लेकर ये 3 बिग नो! इस सरकारी गाइडलाइंस को ध्यान से देख लीजिए

Bakrid in Delhi: बकरीद (ईद-उल-अजहा) को लेकर दिल्ली सरकार ने बेहद सख्त कदम उठाया है। मई महीने के अंत में मनाए जाने वाले इस त्योहार को लेकर दिल्ली सरकार ने पशु बलि और वेस्ट मैनेजमेंट को लेकर कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

अपडेटेड May 22, 2026 पर 11:56 AM
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दिल्ली में बकरीद को लेकर ये 3 बिग नो! इस सरकारी गाइडलाइंस को ध्यान से देख लीजिए

Bakrid in Delhi: बकरीद (ईद-उल-अजहा) को लेकर दिल्ली सरकार ने बेहद सख्त कदम उठाया है। मई महीने के अंत में मनाए जाने वाले इस त्योहार को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार ने पशु बलि और वेस्ट मैनेजमेंट को लेकर कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। दिल्ली के मंत्री कपिल मिश्रा ने नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी और आपराधिक कार्रवाई की चेतावनी दी है। अगर आप भी दिल्ली में रहते हैं, तो त्योहार मनाने से पहले दिल्ली सरकार द्वारा जारी किए गए इन 3 'बिग नो' (Big No) यानी उन तीन बड़े प्रतिबंधों के बारे में अच्छी तरह जान लीजिए जिन्हें करना पूरी तरह से वर्जित है।

दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक पोस्ट साझा करते हुए बकरीद के पर्व को लेकर नए नियम जारी किए हैं। सरकार ने साफ किया है कि इन नियमों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। इस पोस्ट को यहां नीचे देखा जा सकता है-


दिल्ली सरकार के वो 3 'बिग नो' जिन्हें जानना बेहद जरूरी है

1. पहला बिग नो (No): प्रतिबंधित जानवरों की कुर्बानी पर पूरी तरह रोक

दिल्ली सरकार की गाइडलाइंस के मुताबिक, बकरीद के मौके पर गौवंश, गाय, बछड़ा, ऊंट और दूसरे प्रतिबंधित जानवरों की कुर्बानी देना पूरी तरह से गैरकानूनी है। सरकार ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि जो भी व्यक्ति इस नियम का उल्लंघन करेगा और प्रतिबंधित जानवरों की कुर्बानी देगा, उस पर तुरंत आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाएगा।

2. दूसरा बिग नो (No): सार्वजनिक स्थलों पर कुर्बानी की अनुमति नहीं

त्योहार के दौरान सार्वजनिक स्थानों की व्यवस्था बनाए रखने के लिए सरकार ने दूसरा बड़ा प्रतिबंध लगाया है। दिल्ली में किसी भी सार्वजनिक स्ल, जैसे कि गली या सड़कों पर कुर्बानी देने की बिल्कुल भी अनुमति नहीं होगी। अगर कोई भी व्यक्ति सड़क या गली जैसे सार्वजनिक स्थानों पर ऐसा करते हुए पाया गया, तो उस पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। कुर्बानी केवल सरकार द्वारा निर्धारित वैध स्थलों पर ही की जा सकती है।

3. तीसरा बिग नो (No): सीवर, नाली या सार्वजनिक जगहों पर वेस्ट (कचरा) फेंकने पर पाबंदी

कुर्बानी के बाद साफ-सफाई और वेस्ट मैनेजमेंट को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। कुर्बानी देने के बाद बचे हुए वेस्ट (कचरे या अवशेषों) को किसी भी सीवर, नाली या फिर किसी भी सार्वजनिक स्थल पर डालना पूरी तरह से प्रतिबंधित किया गया है।

उल्लंघन होने पर शिकायत करने की भी अपील

मंत्री कपिल मिश्रा ने बताया कि अगर दिल्ली में कहीं भी इन सरकारी गाइडलाइंस का उल्लंघन होता हुआ दिखाई देता है, तो नागरिक इसके खिलाफ तुरंत पुलिस और दिल्ली सरकार के विकास मंत्रालय को सूचित कर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

भारत में कब है बकरीद और क्यों बदलती है इसकी तारीख?

मौजूदा चंद्र कैलेंडर (लूनर कैलेंडर) की गणना के अनुसार, इस साल भारत में बकरीद (ईद-उल-अजहा) 27 मई 2026 को मनाए जाने की उम्मीद है। हालांकि, यह तारीख पूरी तरह से संभावित है और भारत में दिखने वाले धुल हिज्जाह (क्रिसेंट मून) के चांद दीदार के आधार पर इसमें एक दिन का बदलाव हो सकता है। कई इस्लामिक विद्वानों और कैलेंडरों के मुताबिक, अगर चांद देर से दिखाई देता है तो बकरीद 28 मई को भी मनाई जा सकती है।

क्यों हर साल बदल जाती है बकरीद की तारीख?

बकरीद को इस्लामिक हिजरी कैलेंडर के अनुसार मनाया जाता है। यह पूरी तरह चंद्रमा के चक्र (लूनर साइकिल) पर आधारित होता है ना कि ग्रेगोरियन कैलेंडर पर। यह त्योहार इस्लामिक कैलेंडर के 12वें और आखिरी महीने 'धुल हिज्जाह' के 10वें दिन पड़ता है। चंद्र वर्ष (लूनर ईयर) सौर वर्ष (सोलर ईयर) से लगभग 10 से 11 दिन छोटा होता है, यही वजह है कि नियमित कैलेंडर में यह त्योहार हर साल पिछले साल की तुलना में कुछ दिन पहले खिसक जाता है।

बकरीद क्यों मनाई जाती है?

ईद-उल-अजहा को पैगंबर इब्राहिम (अब्राहम) की भक्ति और उनके कड़े इम्तिहान की याद में मनाया जाता है। इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार, पैगंबर इब्राहिम अल्लाह के आदेश का पालन करने के लिए अपने बेटे की कुर्बानी देने के लिए भी तैयार हो गए थे। उनकी इस अटूट निष्ठा को देखकर अल्लाह ने उनके बेटे के स्थान पर एक भेड़ में बदल दिया। यही कारण है कि बकरीद में त्याग, विश्वास, कुर्बानी और अल्लाह के प्रति आज्ञाकारिता को सबसे मुख्य माना गया है।

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