सुवेंदु अधिकारी पर फेंका गया जूता! CEO ऑफिस के बाहर TMC-BJP समर्थकों में हुई भिड़ंत

भाजपा नेता और विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी चुनाव आयोग कार्यालय पहुंचे थे। भाजपा कार्यकर्ता का आरोप है कि जब सुवेंदु अधिकारी कार्यालय में दाखिल हो रहे थे, तब उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया और उन पर जूते तक फेंके गए

अपडेटेड Feb 25, 2026 पर 7:58 AM
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सीईओ दफ्तर के बाहर भारी हंगामा, भाजपा और तृणमूल समर्थक बीएलओ में भिड़ंत

पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल और ज्यादा गरमा गया है। कोलकाता में मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) कार्यालय के सामने मंगलवार (24 फरवरी) को तृणमूल कांग्रेस और भाजपा समर्थकों के बीच तीखी झड़प देखने को मिली। दोनों दलों के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए, जिसके बाद पुलिस को स्थिति संभालनी पड़ी।

जानकारी के मुताबिक, भाजपा नेता और विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी चुनाव आयोग कार्यालय पहुंचे थे। भाजपा कार्यकर्ता का आरोप है कि जब सुवेंदु अधिकारी कार्यालय में दाखिल हो रहे थे, तब उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया और उन पर जूते तक फेंके गए। भाजपा समर्थकों ने कार्यालय के बाहर 'जय श्री राम' और 'सुवेंदु जिंदाबाद' जैसे नारे लगाए। वहीं तृणमूल समर्थक भी मौके पर जुट गए, जिससे तनाव बढ़ गया।

दरअसल, CEO ऑफिस के बाहर TMC से जुड़े BLO कार्यकर्ता विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। खबर थी कि करीब 8000 ऐसे वोटर जिन्होंने डॉक्यूमेंट अपलोड नहीं किए हैं, उनका नाम 28 फरवरी को जारी होने वाली फाइनल वोटर लिस्ट में शामिल नहीं होंगे। इसी मुद्दे को लेकर काफी देर से प्रदर्शन चल रहा था।


इसी दौरान विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी CEO ऑफिस पहुंचे। उन्हें अंदर जाने दिया गया, लेकिन प्रदर्शन कर रहे लोगों को मिलने की इजाज़त नहीं मिली। इससे नाराज़ प्रदर्शनकारियों ने सुवेंदु अधिकारी का विरोध शुरू कर दिया, नारे लगाए, जूते दिखाए और यहां तक कि जूता भी फेंकने लगे। इसके बाद BJP समर्थक भी गुस्से में आ गए। दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई।

सुवेंदु का कहना है कि उन्होंने चुनाव आयोग को एक ऑडियो क्लिप सौंपने के लिए वो कार्यालय गए और उसकी फॉरेंसिक जांच कराने की मांग की। भाजपा का आरोप है कि चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी हो रही है और आयोग को सख्त कदम उठाने चाहिए। दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस ने इन आरोपों को राजनीतिक ड्रामा बताया है।

इन घटनाओं ने चुनाव से पहले राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष का कहना है कि चुनावी माहौल में हिंसा बढ़ रही है और निष्पक्ष माहौल सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। वहीं सत्ताधारी दल का दावा है कि विपक्ष माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहा है।

बंगाल में चुनाव नजदीक आते ही सियासी टकराव तेज होता जा रहा है। चुनाव आयोग और प्रशासन के सामने चुनौती है कि मतदान से पहले राज्य में शांतिपूर्ण और निष्पक्ष वातावरण सुनिश्चित किया जाए, ताकि आम मतदाता बिना डर के अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकें।

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