TMC Crisis Big Update: पश्चिम बंगाल में हारते ही ममता बनर्जी का साथ छोड़ निकलने वाले टॉप नेताओं की लिस्ट, कौन-कौन गया?

TMC Crisis Big Update: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) बगावत का सामना कर रही है। TMC के कई सांसदों ने एक अलग ग्रुप बनाने और सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के साथ जाने का फैसला किया है। तृणमूल के 80 विधायकों में से अधिकतर सदस्यों ने पहले ही रिताब्रता बनर्जी के नेतृत्व में एक अलग ग्रुप बना लिया है

अपडेटेड Jun 10, 2026 पर 3:36 PM
TMC crisis: बंगाल चुनाव हारने के बाद तृणमूल कांग्रेस इस वक्त गंभीर संकट से गुजर रही है

TMC Crisis Big Update: 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद से तृणमूल कांग्रेस (TMC) गंभीर राजनीतिक संकट से गुजर रही है। सत्ता गंवाने के बाद से एक के बाद एक झटके ममता बनर्जी को लगते जा रहे हैं। कई दिग्‍गज नेता दीदी का साथ छोड़ रहे हैं। औपचारिक रूप से TMC छोड़ने वाले बड़े नेताओं में अभी सबसे प्रमुख नाम सुष्मिता देव और सुखेंदु शेखर रॉय हैं। लेकिन यदि बागी सांसदों और विधायकों को जोड़ें तो पार्टी के भीतर असंतुष्ट नेताओं की संख्या कई दर्जन तक पहुंच चुकी है।

लगभग 58–59 TMC विधायक विद्रोही खेमे के साथ बताए गए हैं। जबकि 16 से 20 सांसदों के अलग गुट बनाने या NDA को समर्थन देने की खबरें सामने आई हैं। ममता बनर्जी ने स्थिति संभालने के लिए पार्टी की कई संगठनात्मक इकाइयाँ भंग कर पुनर्गठन शुरू किया है। यदि स्थानीय स्तर (पार्षद, ब्लॉक नेता, जिला नेता, विधायक आदि) को शामिल करें तो 2021 के बाद TMC छोड़ने वालों की संख्या सैकड़ों में रही है।

लेकिन यदि केवल राज्य या राष्ट्रीय स्तर के प्रभावशाली नेताओं की बात करें तो ऐसे प्रमुख नामों की संख्या लगभग 10–20 के बीच मानी जाती है, जिनका राजनीतिक प्रभाव उल्लेखनीय रहा है। बताया जा रहा है कि TMC के 20 बागी सांसदों में सयानी घोष भी शामिल हैं। उन्होंने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को लेटर लिखकर अलग बैठने और NDA को समर्थन करने का ऐलान किया है। ममता बनर्जी के लिए यह बड़ा झटका माना जा रहा है।


एक सप्ताह के अंदर दो सांसदों का इस्तीफा

तृणमूल कांग्रेस सांसद सुष्मिता देव ने बुधवार को राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। पूर्व कांग्रेस नेता देव कुछ साल पहले तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुई थीं। उन्होंने राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन से मुलाकात की और सदन की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। वह इस सप्ताह इस्तीफा देने वाली तृणमूल की दूसरी सांसद हैं। इससे पहले, सुखेंदु शेखर राय ने पार्टी और राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया था। सूत्रों ने बताया कि देव के तृणमूल कांग्रेस छोड़कर BJP में शामिल होने की संभावना है।

उन्होंने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा से भी मुलाकात की। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस बगावत का सामना कर रही है। पार्टी के कई सांसदों ने एक अलग समूह बनाने और सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के साथ जाने का फैसला किया है। तृणमूल कांग्रेस के 80 विधायकों में से अधिकतर सदस्यों ने पहले ही रिताब्रता बनर्जी के नेतृत्व में एक अलग समूह बना लिया जिन्हें राज्य विधानसभा में विपक्ष का नेता चुना गया।

टीएमसी छोड़ने वाले नेताओं की लिस्ट

काकोली घोष दस्तीदार: काकोली घोष दस्तीदार टीएमसी में बगावत का प्रमुख चेहरा बनकर उभरी हैं। उन्होंने दावा किया कि उन्हें TMC के करीब 20 सांसदों का समर्थन हासिल है। उन्होंने NDA का समर्थन करने वाले एक अलग संसदीय गुट के तौर पर मान्यता की मांग की।

ऋतब्रत बनर्जी: तृणमूल से निकाले गए MLA ऋतब्रत बनर्जी को बुधवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष का नेता माना गया। विधानसभा स्पीकर रथिंद्र बोस ने पार्टी के 80 में से 58 MLA के समर्थन वाले बागी गुट के दावे को स्वीकार कर लिया, जिससे तृणमूल कांग्रेस के अंदर संकट और गहरा गया।

संदीपन साहा: TMC से निकाले गए विधायक संदीपन साहा बगावत की एक प्रमुख आवाज बने। उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर अपनी मूल विचारधारा छोड़ने और असहमति को दबाने का आरोप लगाया।

अजमल सिद्दीकी: माइनॉरिटी सेल के सेक्रेटरी अजमल सिद्दीकी ने TMC से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने पार्टी के पतन के लिए मौजूदा नेतृत्व और आंतरिक कामकाज को जिम्मेदार ठहराया।

शांतनु सेन: उन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने RG कर रेप और मर्डर केस से जुड़े विवाद को लेकर पार्टी की आलोचना की और चुनावी हार को "अनैतिक तौर-तरीकों" को जनता द्वारा नकारे जाने के तौर पर बताया।

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अरूप चक्रवर्ती और सुशांत घोष: पिछले महीने कोलकाता म्युनिसिपल कॉरपोरेशन के नेताओं अरूप चक्रवर्ती और सुशांत घोष ने क्रमशः अकाउंट्स कमिटी के सदस्य और बोरो चेयरमैन के पद से इस्तीफ़ा दे दिया। दोनों नेताओं ने पार्टी के कामकाज से बढ़ती नाराजगी का हवाला दिया। कई सीनियर नेताओं के प्रति निराशा जताई, जो पिछली सरकार में अहम पदों पर थे।

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