पश्चिम बंगाल में I-PAC पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई को लेकर सियासी माहौल गरमाता जा रहा है। गुरुवार (8 जनवरी) को कोलकाता में पॉपुलर पॉलिटिकल कंसलटेंसी फर्म I-PAC के ऑफिस पर ED की छापेमारी के बाद तृणमूल कांग्रेस ने इसे 'राजनीतिक बदले की कार्रवाई' बताते हुए राज्यभर में विरोध प्रदर्शन किया। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आह्वान पर शाम 4 बजे से ही तृणमूल समर्थक सड़कों पर उतर आए।
कोलकाता, डायमंड हार्बर, बांकुरा, हावड़ा, सिलीगुड़ी, सतलज समेत राज्य के कई हिस्सों में तृणमूल कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने जुलूस निकाले और केंद्र सरकार एवं बीजेपी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। पार्टी का आरोप है कि चुनाव से पहले जानबूझकर केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल कर तृणमूल को डराने और कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।
वहीं, दक्षिण 24 परगना के डायमंड हार्बर इलाके में तृणमूल नेता शौकत मोल्ला के नेतृत्व में बड़ा विरोध मार्च निकाला गया। इस दौरान उन्होंने ED और केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा, "तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता पूरे बंगाल में सड़कों पर उतरेंगे। BJP की यह बदले की राजनीति है। अमित शाह की इस साजिश को बंगाल की जनता नाकाम करेगी।"
इसके साथ ही उन्होंने आगे कहा, "BJP बंगाल में चाहे जितनी भी एजेंसी इस्तेमाल कर ले, चाहे CBI, ED, इनकम टैक्स, NIA या जो भी एजेंसियां हैं। बंगाल की जनता आने वाले दिनों में BJP को तबाह कर देगी।" शौकत मोल्ला ने सवाल उठाया कि 'अगर यह कार्रवाई गैर-राजनीतिक है, तो हर बार विपक्षी दलों को ही क्यों निशाना बनाया जाता है?'
तृणमूल समर्थकों ने साफ कहा कि चाहे BJP कितनी भी एजेंसियां लगा दे। लेकिन बंगाल में तृणमूल कांग्रेस को डराया नहीं जा सकता। नेताओं ने यह भी कहा कि यह लड़ाई सिर्फ पार्टी की नहीं। बल्कि बंगाल के सम्मान और लोकतांत्रिक अधिकारों की है।
बता दें कि ED की कार्रवाई के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद I-PAC प्रमुख प्रतीक जैन के घर पहुंचीं और करीब 15 मिनट तक वहां मौजूद रहीं। जब ममता बनर्जी बाहर निकलीं, तो उनके हाथ में हरे रंग की एक फाइल दिखाई दी। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में सवाल उठने लगे कि आखिर उस फाइल में क्या है।
इसके बाद मुख्यमंत्री ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर तीखा हमला किया। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि बीजेपी केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल कर तृणमूल कांग्रेस की रणनीति और दस्तावेज हासिल करना चाहती है।
ED की कार्रवाई और उसके बाद हुए विरोध प्रदर्शनों ने साफ कर दिया है कि चुनाव से पहले बंगाल की राजनीति और ज्यादा आक्रामक होने वाली है। एक ओर केंद्र की एजेंसियों कार्रवाई कर रही, तो वहीं दूसरी ओर तृणमूल कार्यकर्ता सड़क पर प्रदर्शन कर रहे।