उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में त्रिपुरा के छात्र एंजेल चकमा की हत्या के बाद से भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के साथ ही साथ पूरे देश भर में गुस्सा है। देहरादून में त्रिपुरा के छात्र एंजेल चकमा पर पहले नस्लवादी टिप्पणी की गई और फिर उसपर चाकू से हमला कर दिया गया। इस हमले में गंभीर रुप से घालय हुए एंजेल चकमा की मौत हो गई। वहीं एंजेल चकमा के एक करीबी दोस्त ने देहरादून में हुए उस खौफनाक हमले के बारे में बातचीत की है। दोस्त ने एंजेल की हमले से पहले उसके आखिरी पलों और उसके सपनों के बारे में बताया।
दोस्त ने बताया खौफनाक पल के बारे में
न्यूज18 से बातचीत में अंकुर अग्रवाल ने बताया कि जिस समय हमला हुआ, वह थोड़ी दूरी पर ही मौजूद थे। उन्हें अस्पताल से फोन आया कि एंजेल पर हमला किया गया है। जैसे ही वह अस्पताल पहुंचे, उन्होंने एंजेल को गंभीर हालत में देखा। अंकुर के मुताबिक, एंजेल की पीठ में चाकू मारा गया था और सिर पर किसी नुकीली चीज़ से वार किया गया था। उसके शरीर से बहुत ज्यादा खून बह रहा था। उन्होंने बताया कि एंजेल असहनीय दर्द में था और बार-बार सिर में तेज दर्द होने की बात कह रहा था। बाद में डॉक्टरों ने परिवार और दोस्तों को बताया कि एंजेल को अंदरूनी रूप से भी काफी खून बह चुका था।
'ट्रेकिंग बूट्स भी मंगवाए थे...'
अंकुर ने बताया कि उन्होंने एंजेल से कई बार पूछा था कि क्या वह हमलावरों को पहचानता है। इस पर एंजेल ने कहा कि उसने उन लोगों को पहले कभी नहीं देखा था। अंकुर के मुताबिक, एंजेल ऐसा इंसान था जो कभी किसी से झगड़ा नहीं करता था। एंजेल की शख्सियत को याद करते हुए अंकुर ने बताया कि वह शांत, मिलनसार और बड़े सपने देखने वाला युवक था। उसे ट्रेकिंग का बहुत शौक था और उसका सपना माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने का था। अंकुर ने कहा कि एंजेल ने हाल ही में ट्रेकिंग बूट्स भी मंगवाए थे और उससे कहा था कि लौटने के बाद वे दोनों साथ में ट्रेकिंग पर जाएंगे।
9 दिसंबर को किया गया था हमला
अंकुर ने हमले की वजह के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एंजेल के भाई माइकल ने उनसे कहा था कि हमले से पहले दोनों को नस्लवादी गालियां दी गई थीं। आरोपियों ने उनसे कहा था, “यहां से चले जाओ, चीनी।” जब एंजेल अपने भाई को बचाने आगे बढ़ा, तभी झगड़ा शुरू हो गया। न्यूज18 के मुताबिक, CCTV फुटेज से हमले से पहले के हालात सामने आए हैं। इन तस्वीरों में 9 दिसंबर को देहरादून के सेलाकुई इलाके में एंजेल और उसका भाई माइकल एक शराब की दुकान के पास दिखाई दे रहे हैं। वहीं उनकी आरोपियों के साथ तीखी बहस हुई थी, जिसके बाद यह जानलेवा हमला हुआ।
रिपोर्ट्स के अनुसार, यह विवाद तब शुरू हुआ जब हमलावरों ने माइकल पर नस्लवादी टिप्पणी की। जब एंजेल अपने भाई को बचाने के लिए बीच में आया, तो आरोप है कि उस पर चाकू और कड़े से हमला कर दिया गया। इस हमले में एंजेल के सिर, गर्दन और पीठ पर गंभीर चोटें आईं। पुलिस ने अब तक इस मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि एक आरोपी नेपाल भाग गया है। कई दिनों तक इलाज चलने के बाद आखिरकार एंजेल चकमा ने अपनी चोटों के कारण दम तोड़ दिया। उसकी मौत से परिवार और दोस्तों को गहरा सदमा लगा है, वहीं लोगों में आक्रोश है और न्याय की मांग तेज़ हो गई है।
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