तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर जारी राजनीतिक गतिरोध के बीच अब विजय की पार्टी TVK पर सहयोगी दलों की नाराजगी खुलकर सामने आने लगी है। विदुथलाई चिरुथैगल काची (VCK) ने शुक्रवार को TVK पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि पार्टी समर्थन जुटाने के लिए आमने-सामने आधिकारिक बातचीत की जगह WhatsApp मैसेज का सहारा ले रही है। 234 सीटों वाली तमिलनाडु विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी TVK अभी तक सरकार बनाने का दावा पेश नहीं कर पाई है। राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने कथित तौर पर स्पष्ट बहुमत के आंकड़े नहीं होने के कारण विजय को दो बार लौटा दिया। इसके बाद राज्य की राजनीति में जोड़तोड़ और समर्थन जुटाने की कवायद तेज हो गई है।
इसी बीच VCK महासचिव सिंथनाई सेल्वन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर टीवीके की रणनीति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अगर विजय वास्तव में भाजपा को राज्यपाल के जरिए तमिलनाडु की राजनीति में हस्तक्षेप करने से रोकना चाहते थे, तो उन्हें खुद अलग-अलग दलों के नेताओं से आमने-सामने मुलाकात करनी चाहिए थी।
सेल्वन ने तंज कसते हुए कहा, “WhatsApp पर पत्र भेजकर ‘reply and let us know’ कहना किसी संवैधानिक संकट के दौरान राजनीतिक रूप से बेहद गैर-गंभीर तरीका है।” VCK का आरोप है कि TVK गठबंधन राजनीति की गंभीरता को समझने में विफल रही है।
VCK ने विजय के करीबी नेताओं पर भी निशाना साधा। पार्टी का कहना है कि टीवीके के कुछ दूसरे दर्जे के नेता विजय की लोकप्रियता और ‘हीरो इमेज’ का इस्तेमाल कर DMK के खिलाफ निजी राजनीतिक लड़ाई लड़ रहे हैं। साथ ही उन बयानों की भी आलोचना की गई जिनमें कथित तौर पर कहा गया था कि विजय सत्ता में आते ही DMK और AIADMK नेताओं को गिरफ्तार करवा देंगे। VCK ने ऐसे बयानों को “अहंकारी और गैर-जिम्मेदाराना” बताया।
पार्टी ने विजय के चुनाव बाद के बयानों को भी घेरते हुए कहा कि जीत के बाद उन्हें राजनीतिक परिपक्वता और उदारता दिखानी चाहिए थी, लेकिन इसके बजाय उन्होंने “राजशाही खत्म होने का दिन” जैसे बयान देकर टकराव को और बढ़ा दिया।
VCK ने TVK की “वंशवादी राजनीति” विरोधी लाइन पर भी सवाल उठाए। पार्टी ने पूछा कि एक तरफ विजय डीएमके को “परिवारवादी राजनीति” का प्रतीक बताते हैं, दूसरी तरफ कांग्रेस और DMK गठबंधन से जुड़े दलों का समर्थन भी मांग रहे हैं। बयान में कांग्रेस के नेहरू-गांधी परिवार का उदाहरण देते हुए इसे राजनीतिक विरोधाभास बताया गया।
इसके अलावा VCK ने तमिलनाडु में फिर से “रिसॉर्ट पॉलिटिक्स” लौटने का आरोप लगाया। पार्टी का दावा है कि टीवीके अपने विधायकों को राजनीतिक संवाद के बजाय रिसॉर्ट्स में रखकर नियंत्रण में रखने की कोशिश कर रही है।
हालांकि VCK ने भाजपा पर भी हमला बोला और आरोप लगाया कि राज्य में राज्यपाल शासन जैसी स्थिति बनाने की कोशिश हो रही है। पार्टी ने लोगों से सतर्क रहने की अपील करते हुए कहा कि तमिलनाडु के जनादेश को अस्थिर करने की कोशिशों का लोकतांत्रिक तरीके से मुकाबला करना होगा।
फिलहाल तमिलनाडु में राजनीतिक अनिश्चितता बनी हुई है। विजय की टीवीके सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद बहुमत जुटाने के संघर्ष में फंसी हुई है, जबकि DMK, AIADMK, वाम दल और दूसरी क्षेत्रीय पार्टियां अपने-अपने राजनीतिक समीकरण साधने में जुटी हैं।
खबर ये भी आ रही है कि विजय ने तीसरी बार राज्यपाल से मिलने और सरकार बनाने का दावा पेश करने के लिए समय मांगा है और उन्हें शाम 4.30 बजे का समय भी मिल गया है।