महाराष्ट्र की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। मंगलवार देर शाम उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट में एक बार फिर बहुत बड़ी फूट पड़ गई है। खबरों के मुताबिक, ठाकरे गुट के छह लोकसभा सांसद पाला बदलकर उप-मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के खेमे में शामिल होने जा रहे हैं। इन सभी सांसदों को बेहद फिल्मी अंदाज में अलग-अलग शहरों से प्राइवेट जेट (चार्टर्ड प्लेन) के जरिए दिल्ली पहुंचाया गया है।
आधी रात को चला 'ऑपरेशन दिल्ली'
ठाकरे गुट के इन सांसदों को दिल्ली ले जाने के लिए शिंदे गुट ने पूरी ताकत झोंक दी थी। मुंबई, हैदराबाद, नांदेड़ और शिरडी जैसे अलग-अलग शहरों में बकायदा प्राइवेट विमान भेजे गए थे ताकि किसी को भनक न लगे।
...और पुणे एयरपोर्ट पर फंसा पेंच!
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा ड्रामा धाराशिव के सांसद ओमराजे निंबालकर को लेकर हुआ। उन्हें पुणे एयरपोर्ट से दिल्ली ले जाने के लिए शिंदे गुट को एड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ा।
राजनीतिक गलियारों से आ रही खबरों के मुताबिक, उप-मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बेटे और सांसद श्रीकांत शिंदे ने ओमराजे को दिल्ली लाने के लिए पुणे एयरपोर्ट पर एक नहीं, बल्कि दो-दो प्राइवेट प्लेन तैयार रखे थे। इस पूरे 'मिशन' की कमान धाराशिव के पालक मंत्री प्रतापराव सरनाइक संभाल रहे थे, जबकि पर्दे के पीछे से पूर्व मंत्री तानाजी सावंत सारी गोटियां फिट कर रहे थे।
तीन बार फेल हुआ प्लान, चौथी बार में मिली कामयाबी
तीन बड़े नेताओं की इस 'फील्डिंग' के बावजूद ओमराजे निंबालकर को पुणे से निकालना आसान नहीं था। उनका प्लान एक के बाद एक तीन बार फेल हुआ:
पहला प्लान: मंगलवार दोपहर 3 बजे विमान को दिल्ली के लिए उड़ना था, लेकिन आखिरी वक्त पर समय बदलना पड़ा।
दूसरा प्लान: शाम 5 बजे का समय तय किया गया, लेकिन यह कोशिश भी नाकाम रही।
तीसरा प्लान: रात 9 बजे फिर कोशिश की गई, लेकिन तब भी ओमराजे को पुणे से बाहर नहीं निकाला जा सका।
देर रात 1 बजे मिली सफलता, फाइव स्टार होटल में ठहरे
आखिरकार, आधी रात को 1 बजे चौथी कोशिश की गई, जो कामयाब रही। ओमराजे निंबालकर तैयार रखे गए चार्टर्ड प्लेन में बैठकर दिल्ली के लिए रवाना हो गए। उनके साथ परांडा के विधायक तानाजी सावंत और जयराजे निंबालकर भी उसी फ्लाइट से दिल्ली गए।
सूत्रों के हवाले से खबर है कि देर रात दिल्ली पहुंचने के बाद इन सभी नेताओं को एक बेहद आलीशान फाइव स्टार होटल में ठहराया गया है। महाराष्ट्र की राजनीति में हुए इस नए उलटफेर ने एक बार फिर खलबली मचा दी है।