बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले माहौल लगातार गरमाता जा रहा है। इसी बीच 1 मार्च को राज्य आने वाली चुनाव आयोग (ECI) की स्पेशल टीम का दौरा अचानक टाल दिया गया है। बताया जा रहा है कि राज्य सरकार की रिक्वेस्ट पर यह फैसला लिया गया, क्योंकि 28 फरवरी को फाइनल वोटर लिस्ट जारी होने के बाद विरोध-प्रदर्शन की आशंका जताई गई थी। सूत्रों के मुताबिक, SIR प्रक्रिया के तहत तैयार की गई फाइनल वोटर लिस्ट सामने आने के बाद कई इलाकों में असंतोष फैल सकता है।
इसी डर के चलते चुनाव आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों, जिनमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार भी शामिल हैं, उनका बंगाल दौरा फिलहाल पोस्टपोन कर दिया गया। आयोग की यह टीम सिर्फ एक दिन के लिए आने वाली थी, लेकिन संभावित स्थिति को देखते हुए यात्रा रद्द कर दी गई।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि राज्य और आयोग के बीच पहले से चल रहे तनाव के बीच यह फैसला काफी अहम माना जा रहा है। अब सबकी नजर 28 फरवरी पर टिकी है, जब फाइनल वोटर लिस्ट प्रकाशित होगी। दूसरी ओर चुनाव को लेकर राज्य में तैयारियां भी चल रही हैं। सभी राजनीतिक पार्टियां टिकट बंटवारे पर मंथन कर रही हैं कि किसे उम्मीदवार बनाया जाए और किसे नहीं। सूत्रों के मुताबिक, कोलकाता विधानसभा सीटों के लिए TMC ने लगभग अपनी सूची तैयार कर ली है। पार्टी इस बार ज़्यादातर पुराने और भरोसेमंद चेहरों पर दांव लगा सकती है, खासकर कोलकाता की सीटों पर।
वहीं BJP भी पूरी ताकत से मैदान में उतर चुकी है। पार्टी राज्य भर में घर-घर संपर्क अभियान चला रही है, जिसमें नेता लोगों से मिलकर उनकी समस्याएं सुन रहे हैं। साथ ही 1 मार्च से 'परिवर्तन यात्रा' की शुरुआत होने जा रही है, जिसकी शुरुआत केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह करने वाले है। यह यात्रा बंगाल के 9 अलग-अलग जगहों से एक साथ शुरू होगी।
इधर ISF और CPM भी अपनी गठबंधन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन सीट बंटवारे पर अभी सहमति नहीं बन पाई है। ISF प्रमुख नौशाद सिद्दीकी 45 सीटों की मांग कर रहे हैं, जबकि CPM 25 से ज़्यादा सीट देने को तैयार नहीं है। इसी वजह से दोनों पार्टियों के बीच बातचीत अटकी हुई है, और माथा-पच्ची जारी है। इस बीच हुमायूं कबीर भी पीछे नहीं हैं। वह अपनी पार्टी 'जनता उन्नयन पार्टी' के साथ ज़ोर-शोर से प्रचार में जुटे हुए हैं। इससे साफ है कि इस बार का चुनाव बहुकोणीय होने वाली है।