Kerala New Name: केंद्र सरकार ने केरल राज्य का नाम आधिकारिक तौर पर बदलकर 'केरलम' (Keralam) करने के प्रस्ताव पर मंजूरी दे दी है। यह मंजूरी केरल विधानसभा द्वारा सर्वसम्मति से पारित उस प्रस्ताव पर दी गई, जिसमें केंद्र से राज्य के नाम में संशोधन करने का आग्रह किया गया था। राज्य सरकार का तर्क है कि 'केरलम' इस क्षेत्र का मूल ऐतिहासिक और सांस्कृतिक नाम है, जिसे ब्रिटिश शासन के दौरान प्रशासनिक आसानी के लिए बदलकर 'केरल' कर दिया गया था।
ऐतिहासिक विरासत की ओर एक कदम
मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने इस बदलाव को राज्य की जड़ों और संस्कृति के सम्मान से जोड़ा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि 'केरलम' नाम राज्य की मलयालम भाषा और परंपराओं के अधिक करीब है। उन्होंने कहा कि ब्रिटिश काल में किए गए बदलावों को अब सुधारा जा रहा है ताकि राज्य के वास्तविक गौरव को बहाल किया जा सके।
सत्ता पक्ष और विपक्ष आए एक साथ
हैरानी की बात यह है कि इस मुद्दे पर राज्य के सत्ताधारी एलडीएफ (LDF) और विपक्षी भाजपा के बीच भी सहमति दिखी है। केरल बीजेपी अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि 'केरलम' नाम राज्य के इतिहास और जड़ों को दर्शाता है और बीजेपी हमेशा से यहां की परंपराओं और आस्था की रक्षा के पक्ष में रही है। चंद्रशेखर ने सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री का आभार जताते हुए कहा कि 'विकसित केरलम और सुरक्षित केरलम' केवल नारे नहीं, बल्कि उनका मिशन हैं।
कैसे बदलता है किसी राज्य का नाम?
किसी भी राज्य का नाम बदलने की प्रक्रिया लंबी और संवैधानिक होती है। सबसे पहले राज्य की विधानसभा नाम बदलने का प्रस्ताव पारित करती है। इसके बाद प्रस्ताव केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजा जाता है। फिर कैबिनेट और संसद इस पर विचार करती है। केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद, राज्य का नाम बदलने के लिए संसद में संविधान संशोधन विधेयक पेश किया जाता है। राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद ही आधिकारिक तौर पर नाम बदल जाता है।