Unnao Rape Case: जेल में बंद कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली HC से बड़ा झटका, रेप पीड़िता के पिता की मौत मामले में सजा निलंबित करने की याचिका खारिज

Unnao Rape Case: उन्नाव रेप केस में पीड़िता के पिता की पुलिस हिरासत में हुई मौत से जुड़े मामले में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पूर्व नेता कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाई कोर्ट ने जमानत देने से इनकार कर दिया है। इस याचिका में उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता के पिता की हिरासत में हुई मौत के मामले में सजा को निलंबित करने का अनुरोध किया गया था

अपडेटेड Jan 19, 2026 पर 3:21 PM
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Unnao Rape Case: उन्नाव रेप पीड़िता के पिता की मौत मामले में कुलदीप सिंह सेंगर की सजा निलंबित करने की याचिका खारिज हो गई है

Unnao Rape Case: दिल्ली हाई कोर्ट ने उन्नाव रेप पीड़िता के पिता की हिरासत में हुई मौत से जुड़े मामले में भारतीय जनता पार्टी (BJP) से निष्कासित नेता कुलदीप सिंह सेंगर को जमानत देने से इनकार कर दिया है। हाई कोर्ट ने उन्नाव रेप पीडिता के पिता की हिरासत मे हुई मौत के मामले मे सजा काट रहे पूर्व विधायक सेंगर की याचिका पर सोमवार (19 जनवरी) को फैसला सुनाया।

इस याचिका में उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता के पिता की हिरासत में हुई मौत के मामले में सजा को निलंबित करने का अनुरोध किया गया था। लेकिन सेंगर की सजा पर रोक लगाने से दिल्ली हाईकोर्ट ने इनकार कर दिया है।

जस्टिस रविंदर डुडेजा ने कहा कि सेंगर ने 10 साल की कुल सजा में से करीब 7.5 साल हिरासत में बिताए हैं। इस मामले में दोषसिद्धि के खिलाफ उनकी अपील पर फैसला होने में देरी हुई है। लेकिन यह देरी कुछ हद तक सेंगर की वजह से भी हुई है, जिन्होंने कई याचिकाएं दायर कीं।


कोर्ट का कहना है कि सेंगर के पिछले रिकॉर्ड को देखते हुए उन्हें इस मामले में जमानत नहीं दी जा सकती। बेंच ने आगे कहा कि अगर दोषसिद्धि के खिलाफ अपील पर जल्द से जल्द गुण-दोष के आधार पर फैसला किया जाता है, तो यह उनके हित में होगा।

पीड़िता के पिता की हिरासत में हुई मौत के मामले में निचली अदालत ने 13 मार्च 2020 को सेंगर को 10 साल के कठोर कारावास की सजा के साथ 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था। निचली अदालत ने कहा था कि परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य की हत्या के मामले में कोई नरमी नहीं बरती जा सकती।

अदालत ने दुष्कर्म पीड़िता के पिता की हिरासत में हुई मौत के मामले में सेंगर के भाई अतुल सिंह सेंगर और पांच अन्य लोगों को भी 10 साल की जेल की सजा सुनाई थी। सेंगर के इशारे पर शस्त्र अधिनियम के तहत पीड़िता के पिता को गिरफ्तार किया गया था। इस दौरान पुलिस हिरासत में बर्बरता के कारण 9 अप्रैल 2018 को उनकी मृत्यु हो गई थी।

सेंगर ने 2017 में नाबालिग का अपहरण कर उससे दुष्कर्म किया था। निचली अदालत ने यह मानते हुए कि हत्या का इरादा नहीं था सेंगर को भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत हत्या का दोषी नहीं ठहराया। लेकिन आईपीसी की धारा 304 के तहत दोषियों को गैर-इरादतन हत्या के लिए अधिकतम सजा सुनाई।

दुष्कर्म के मुख्य मामले में दिसंबर 2019 को सेंगर को दोषी ठहराने और आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने के फैसले के खिलाफ, साथ ही पीड़िता के पिता की मौत के मामले में सेंगर की अपील हाई कोर्ट में लंबित हैं।

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इससे पहले हाई कोर्ट ने 23 दिसंबर 2025 को दुष्कर्म मामले में सेंगर की सजा को, दोषसिद्धि और सजा को चुनौती देने वाली अपील लंबित रहने तक निलंबित कर दिया था। इसके बाद, शीर्ष अदालत ने 29 दिसंबर 2025 को इस निलंबन पर रोक लगा दी थी।

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