'मेरे बच्चे भी सुरक्षित नहीं हैं...', कुलदीप सेंगर के जमानत के बीच उन्नाव रेप पीड़िता का बड़ा बयान

Kuldeep singh Sengar : पीड़िता ने कहा कि, उन्हें सुप्रीम कोर्ट पर पूरा भरोसा है और उम्मीद है कि उन्हें न्याय मिलेगा। उन्होंने कहा कि वह सिर्फ अपनी नहीं, बल्कि हर महिला की आवाज उठा रही हैं। पीड़िता के मुताबिक, अगर CBI ने पहले ही सख्त कदम उठाए होते तो उन्हें समय पर न्याय मिल जाता। उन्होंने यह भी कहा कि आरोपी ने उनके साथ रेप किया था और उसकी ज़मानत पहले ही रद्द हो जानी चाहिए थी

अपडेटेड Dec 28, 2025 पर 4:23 PM
Unnao Rape Case: पीड़िता ने कहा कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट पर पूरा भरोसा है और उम्मीद है कि उन्हें न्याय मिलेगा।

उत्तर प्रदेश के उन्नाव से पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को रेप केस में मिली जमानत को सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। जैसे ही सुप्रीम कोर्ट पूर्व उत्तर प्रदेश बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की उम्रकैद की सजा पर रोक लगाने के खिलाफ सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) की याचिका पर सुनवाई करने वाला है। वहीं 2017 के उन्नाव रेप केस की पीड़िता ने अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है।

पीड़िता ने ANI से कहा कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट पर पूरा भरोसा है और उम्मीद है कि उन्हें न्याय मिलेगा। उन्होंने कहा कि वह सिर्फ अपनी नहीं, बल्कि हर महिला की आवाज उठा रही हैं। पीड़िता के मुताबिक, अगर CBI ने पहले ही सख्त कदम उठाए होते तो उन्हें समय पर न्याय मिल जाता। उन्होंने यह भी कहा कि आरोपी ने उनके साथ रेप किया था और उसकी ज़मानत पहले ही रद्द हो जानी चाहिए थी।

पीड़िता ने कही ये बात


पीड़िता ने आगे कहा, “मेरे पिता की हत्या कर दी गई। मेरे परिवार के अन्य सदस्यों को भी मारा गया। मेरे परिवार और गवाहों की सुरक्षा हटा ली गई। मेरे पति को नौकरी से निकाल दिया गया। मेरे बच्चे घर पर सुरक्षित नहीं हैं।” इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने 29 दिसंबर को सुनवाई करने पर सहमति जताई है। इस बेंच की अध्यक्षता सूर्यकांत कर रहे हैं, जबकि इसमें जेके माहेश्वरी और ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह भी शामिल हैं। सेंगर की उम्रकैद की सज़ा पर रोक लगाए जाने के बाद देशभर में गुस्सा देखने को मिला था, जिसके बाद इस मामले की सुनवाई तय की गई।

सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) ने हाई कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है, जिसमें कुलदीप सिंह सेंगर की सज़ा पर रोक लगाई गई और उनकी अपील लंबित रहते हुए उन्हें ज़मानत दी गई थी।

CBI ने क्या कहा?

इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा था कि POCSO एक्ट की धारा 5(c) और भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2) के तहत गंभीर अपराध के प्रावधान इस मामले में लागू नहीं होते। कोर्ट का तर्क था कि कुलदीप सिंह सेंगर को इन धाराओं के तहत “सरकारी कर्मचारी” नहीं माना जा सकता। इस फैसले को चुनौती देते हुए सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) ने कहा कि हाई कोर्ट की यह व्याख्या POCSO कानून के सुरक्षा ढांचे को कमजोर करती है। CBI ने चेतावनी दी कि अगर सेंगर को रिहा किया गया, तो पीड़िता की जान को गंभीर खतरा हो सकता है, क्योंकि उसका प्रभाव और पिछला व्यवहार इस आशंका को बढ़ाता है।

CBI ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि उम्रकैद की सज़ा पर रोक लगाना एक अपवाद होता है। ऐसा फैसला केवल बहुत खास और मजबूरी की परिस्थितियों में ही दिया जाना चाहिए।

जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन

जंतर-मंतर पर दिल्ली हाई कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हुए, जिसमें कुलदीप सिंह सेंगर को ज़मानत दी गई थी। ज़मानत का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों और खुद को “पुरुष आयोग” कहने वाले कुछ लोगों के बीच झड़प भी हुई, जो पूर्व विधायक का समर्थन कर रहे थे। प्रदर्शन के दौरान एक महिला के हाथ में एक पोस्टर था, जिस पर लिखा था, “मैं कुलदीप सेंगर का समर्थन करती हूं।” उसने कहा कि रेप जैसे मामलों को राजनीति से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। वहीं, विरोध कर रहे एक प्रदर्शनकारी ने ANI से कहा कि वह इस बयान से सहमत नहीं है। उसके अनुसार, यह मामला बिना सबूत के नहीं है और सेंगर को दोषी ठहराया जा चुका है। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि ऐसे मामलों में पीड़िता को न्याय मिलना सबसे ज़रूरी है।

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