उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कथित अव्यवस्थाओं को सोशल मीडिया पर दिखाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। अब तक कम से कम 8 जिलों में एफआईआर दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSAs) ने स्कूलों में बिना अनुमति यूट्यूबर या बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही बिना इजाजत स्कूल परिसर में फोटो और वीडियो बनाने की भी अनुमति नहीं होगी। स्कूल में निरीक्षण के लिए आने वाले अधिकारियों को भी विजिटर रजिस्टर में अपनी एंट्री दर्ज करानी होगी। इन नियमों का उद्देश्य स्कूल परिसर में आने-जाने वाले लोगों पर नजर रखना और व्यवस्था बनाए रखना है।
बाहरी लोगों को नहीं होगी अनुमति
उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में बिना अनुमति बाहरी लोगों और यूट्यूबरों के आने पर रोक लगाई गई है। आजमगढ़, बलिया, मऊ, अयोध्या और बलरामपुर समेत कई जिलों में बेसिक शिक्षा विभाग ने इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं। अब बिना अनुमति स्कूल में प्रवेश करने, फोटो लेने या वीडियो बनाने पर कार्रवाई हो सकती है। विभाग का कहना है कि यह कदम बच्चों की सुरक्षा, पढ़ाई का माहौल बनाए रखने और स्कूल व शिक्षकों की गरिमा को सुरक्षित रखने के लिए उठाया गया है।
प्रशासन ने जारी किया आदेश
हाथरस, बुलंदशहर, देवरिया, मेरठ, नोएडा, गाजीपुर, सिद्धार्थनगर और वाराणसी के सरकारी स्कूलों से जुड़े वीडियो सामने आने के बाद ये मामले चर्चा में आए। प्रशासन की ओर से जारी आदेशों में स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक के पीछे बच्चों की सुरक्षा और पढ़ाई का माहौल बनाए रखना प्रमुख वजह बताई गई है। इसके अलावा बिना अनुमति स्कूल के रिकॉर्ड या अन्य जानकारी तक पहुंच को भी रोकने की बात कही गई है।
शामली के BSA संतोष कुमार ने कहा कि, कुछ बाहरी लोग और YouTuber बिना अनुमति सरकारी स्कूलों में पहुंचकर स्कूल और शिक्षकों की फोटो-वीडियो बनाते हैं और उन्हें सोशल मीडिया पर डालते हैं। इससे पढ़ाई का माहौल प्रभावित होता है और शिक्षकों के साथ-साथ शिक्षा विभाग की छवि पर भी असर पड़ता है।