UPI Payment : त्योहारों से पहले बड़ी राहत! क्या टल जाएगी UPI पर लगने वाली फीस? NPCI से आया ये बड़ा अपडेट

UPI Payment MDR Charges: 15 अक्टूबर से ₹2,000 से अधिक के UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4% फीस (MDR) लागू होने वाली है, लेकिन त्योहारी सीजन को देखते हुए फिनटेक कंपनियों और व्यापारियों ने NPCI से इसे जनवरी 2027 तक टालने की मांग की है। जानिए क्या सच में टल जाएगी UPI पर लगने वाली फीस?

अपडेटेड Oct 08, 2026 पर 9:19 AM
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देश में 15 अक्टूबर से UPI पेमेंट पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट चार्ज लगने वाला है

UPI Payment Charges: देश में 15 अक्टूबर से UPI पेमेंट पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) चार्ज लगने वाला है। सरकार ने इसे लेकर सभी कवायदे पूरे कर लिए है। इसी बीच नए नियमों को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। सूत्रों के मुताबिक, मर्चेंट बॉडीज, फिनटेक कंपनियों और पेमेंट एग्रीगेटरों ने नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) से मांग की है कि UPI मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लागू करने की तारीख को 15 अक्टूबर से बढ़ाकर जनवरी 2027 कर दिया जाए।

अब डेडलाइन में महज एक हफ्ते से भी कम समय बचा है। जानकारों की माने तो NPCI अगले दो दिनों में इस पर बड़ा फैसला ले सकता है। इस सिलसिले में वित्त मंत्रालय के साथ भी चर्चा जारी है। इस नए अपडेट के बाद ये कयास लगाए जा रहे है कि त्योहारी सीजन में लोगों को MDR चार्ज से राहत मिल सकती है।

क्यों हो रही है तारीख बढ़ाने की मांग?


दशहरा, दिवाली और छठ जैसे बड़े त्योहारों के दौरान बंपर सेल होती है। ऐसे समय में मर्चेंट शुल्क लागू होने से कारोबारियों पर अतिरिक्त लागत का बोझ पड़ेगा। सरकार को भी अंदेशा है कि इससे त्योहारी खरीदारी के दौरान मर्चेंट्स इस खर्च का बोझ ग्राहकों पर डाल सकते हैं, जिससे महंगाई के इस दौर में ग्राहकों का सेंटीमेंट प्रभावित हो सकता है।

इसके साथ ही शर्तों और कैटेगिरी को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। कार्ड्स नेटवर्क में नियम सीधे और स्पष्ट होते हैं, लेकिन UPI में यूटिलिटी बिल, लोन चुकाने और शेयर बाजार (कैपिटल मार्केट) के ट्रांजैक्शन के लिए अलग-अलग दरें तय की गई हैं। इस वजह से मर्चेंट्स और पेमेंट कंपनियों में तकनीकी तैयारी और कैटेगरी को लेकर काफी असमंजस है।

क्या है UPI MDR और कितना पड़ेगा आपकी जेब पर असर?

मर्चेंट डिस्काउंट रेट(MDR) वह फीस होती है जो दुकानदार या व्यापारी डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने के बदले बैंक को देते हैं। पिछले महीने UPI स्टीयरिंग कमेटी ने तय किया था कि ₹2,000 से अधिक के ट्रांजैक्शन पर 0.4% (40 bps) MDR लागू होगा। इस नियम के हिसाब से अगर कोई ग्राहक ₹2,000 का यूपीआई पेमेंट करता है, तो मर्चेंट को ₹8 की फीस देनी होगी। वहीं ₹10,000 के पेमेंट पर व्यापारी को ₹40 का शुल्क देना होगा।

कैपिटल मार्केट और लोन रीपेमेंट का 'पेच'

कार्ड्स के मुकाबले UPI काफी जटिल है क्योंकि इसमें कई ऐसे ट्रांजैक्शन होते हैं जो कार्ड से संभव ही नहीं हैं:

शेयर बाजार: ब्रोकिंग कंपनियों और कैपिटल मार्केट एसोसिएशन ने सेबी (SEBI) के सामने अपनी चिंता रखी है। उनका कहना है कि जब कोई निवेशक अपने डीमैट/ट्रेडिंग अकाउंट में पैसे डालता है, तो यह P2P (पर्सन टू पर्सन) ट्रांजैक्शन जैसा ही है। इसमें ब्रोकरेज कंपनियां कोई एक्स्ट्रा कमाई नहीं करतीं, फिर उन पर MDR क्यों लादा जाए?

लोन की ईएमआई: एनपीसीआई के निर्देशानुसार ऑटो-पे के जरिए लोन चुकाने पर ₹5 की फ्लैट फीस तय की गई है। लेकिन अक्सर ग्राहकों के खाते में बैलेंस न होने से ऑटो-डेबिट फेल हो जाता है और जब वे बाद में मैन्युअली लोन चुकाते हैं, तो सिस्टम इसे रेगुलर फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन मानकर 0.4% की दर से MDR लगा देता है।

इन्हीं सभी व्यावहारिक दिक्कतों और सिस्टम को अपडेट करने में आ रही अड़चनों को देखते हुए उद्योग जगत ने NPCI से इस फैसले को त्योहारी सीजन खत्म होने तक टालने की अपील की है।

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