होर्मुज के पार निकला भारत का एक और LPG टैंकर, जंग के बीच 9 भारतीय शिप कर चुके रास्ते को पार

28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट पर अपनी पकड़ और मजबूत कर दी है। इसका असर पूरी दुनिया की ईंधन सप्लाई पर पड़ा है और ऊर्जा बाजार में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। समुद्री आंकड़ों के मुताबिक, इस रास्ते से गुजरने वाले करीब 60 प्रतिशत जहाज या तो ईरान से निकलते हैं या फिर वहीं जा रहे होते हैं

अपडेटेड Apr 05, 2026 पर 2:59 PM
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Strait Of Hormuz : पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है।

ईरान और अमेरिका बीच जारी जंग को अब एक महीने से भी ज्यादा का वक्त बीत चुका है। इस जंग का असर अब पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। भारत समेत पूरी दुनिया में क्रूड ऑयल और एलपीजी को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। वहीं ईरान जंग के बीच भारत को एक और बड़ी खुशखबरी मिली है। जिस होर्मुज में पूरी दुनिया के जहाज फंसे हैं, वहां से भारत आसानी से अपने जहाज बारी-बारी से निकाल रहा है। भारत का एक और जहाज ‘ग्रीन आशा’ सुरक्षित रूप से होर्मुजको पार कर गया है। संघर्ष शुरू होने के बाद से इस रास्ते से गुजरने वाला यह नौवां भारतीय टैंकर है। जानकारी के अनुसार, ‘ग्रीन आशा’ एक एलपीजी (LPG) टैंकर है।

दरअसल, 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट पर अपनी पकड़ और मजबूत कर दी है। इसका असर पूरी दुनिया की ईंधन सप्लाई पर पड़ा है और ऊर्जा बाजार में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। समुद्री आंकड़ों के मुताबिक, इस रास्ते से गुजरने वाले करीब 60 प्रतिशत जहाज या तो ईरान से निकलते हैं या फिर वहीं जा रहे होते हैं। इन हालातों के बावजूद भारत के कई जहाज इस रास्ते का इस्तेमाल करते रहे हैं। ‘ग्रीन आशा’ से पहले भी कम से कम आठ भारतीय जहाज सुरक्षित रूप से इस जलडमरूमध्य को पार कर चुके हैं।

अब तक इतने भारतीय जहाजों ने पार किया होर्मुज


तनाव के माहौल के बावजूद भारतीय जहाज लगातार इस रास्ते से सुरक्षित सफर कर रहे हैं। हाल ही में दो एलपीजी (LPG) जहाज ‘बीडब्ल्यू टायर’ और ‘बीडब्ल्यू एल्म’ करीब 94,000 टन माल लेकर इस संवेदनशील इलाके से सफलतापूर्वक गुजर चुके हैं। इसके अलावा, भारत के झंडे वाले चार एलपीजी टैंकरों — ‘पाइन गैस’ और ‘जैग वसंत’ ने 26 से 28 मार्च के बीच लगभग 92,612 टन एलपीजी की सप्लाई की। इससे पहले ‘एमटी शिवालिक’ और ‘एमटी नंदा देवी’ ने 16 और 17 मार्च को गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह और कांडला बंदरगाह तक करीब 92,712 टन एलपीजी पहुंचाई थी।

वहीं, तेल टैंकर ‘जैग लाड़की’ ने 18 मार्च को यूएई (संयुक्त अरब अमीरात) से मुंद्रा तक 80,886 टन कच्चा तेल पहुंचाया। इसके अलावा ‘जैग प्रकाश’ जहाज़ ओमान से अफ्रीका तक पेट्रोल (गैसोलीन) ले जाते हुए भी इस जलडमरूमध्य को सुरक्षित रूप से पार कर गया। कुल मिलाकर, चुनौतीपूर्ण हालात के बावजूद भारतीय जहाज लगातार अपनी सेवाएं दे रहे हैं और ऊर्जा आपूर्ति को बनाए रखने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

इस रास्ते से सुरक्षित गुजरने वाले अन्य जहाजों में ‘शिवालिक’, ‘नंदा देवी’, ‘जैग लाड़की’, ‘पाइन गैस’, ‘जैग वसंत’, ‘बीडब्ल्यू टायर’, ‘बीडब्ल्यू एल्म’ और ‘ग्रीन सांवी’ शामिल हैं। इनमें से ‘ग्रीन सांवी’ शुक्रवार रात करीब 46,650 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर इस जलडमरूमध्य को सफलतापूर्वक पार कर गया। वहीं, व्यापारिक जहाज़ों की सुरक्षा के लिए भारतीय नौसेना के युद्धपोत लगातार तैयार (स्टैंडबाय) स्थिति में तैनात रहे, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत मदद दी जा सके।

होर्मुज पर ईरान का रुख

मध्य-पूर्व में चल रहे तनाव के बीच, भारत अपने जहाज़ों की सुरक्षित आवाजाही के लिए लगातार ईरान के अधिकारियों से बातचीत कर रहा है। ईरान ने पहले अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन को बताया था कि जो जहाज़ उनके दुश्मन नहीं हैं, उन्हें इस होर्मुज से गुजरने की अनुमति दी जाएगी। इसके लिए जरूरी है कि वे ईरानी अधिकारियों के साथ पूरा सहयोग करें। हालांकि, अमेरिका, इजरायल या इस संघर्ष में शामिल अन्य देशों से जुड़े जहाजों को इस रास्ते से गुजरने की इजाजत नहीं दी जाएगी।

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