US student dies in Delhi: अमेरिका से महज 10 दिन पहले अपने परिवार से मिलने भारत लौटे बिजनेस की पढ़ाई कर रहे 20 वर्षीय छात्र यशवेंद्र सिंह की दिल्ली में दर्दनाक हादसे में मौत हो गई। हादसा उस समय हुआ जब उनकी कार कथित तौर पर जलभराव के बीच एक खुले नाले में जा गिरी। ड्राइवर वाली सीट पर फंसे यशवेंद्र समय पर बाहर नहीं निकल सके और नाले के पानी में दम घुटने से उनकी मौत हो गई। उनके साथ मौजूद युवती को स्थानीय लोगों ने अपनी जान जोखिम में डालकर सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
परिजनों ने आरोप लगाया कि सिस्टम की लापरवाही के कारण उनकी मौत हुई। सिंह के साथ मौजूद महिला दोस्त के लिए कुछ स्थानीय लोग फरिश्ते बनकर आए। वे नाले में उतरे और उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शनिवार 25 जुलाई की सुबह करीब 6 बजे स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे तो यशवेंद्र के दोस्तों ने मदद की गुहार लगाई। स्थानीय RWA प्रेसिडेंट प्रदीप ने बताया कि युवक ड्राइविंग सीट पर फंसा हुआ था और सीट बेल्ट नहीं खुल रही थी। जब तक पुलिस और राहत दल ने उसे बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया, तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।
यशवेंद्र सिंह अमेरिका के ब्लूमिंगटन, इंडियाना स्थित एक यूनिवर्सिटी में बिजनेस की पढ़ाई कर रहे थे। साल 2024 में उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाने से पहले उन्होंने दिल्ली के चाणक्यपुरी स्थित एक स्कूल से पढ़ाई पूरी की थी। छात्र जीवन में वह राष्ट्रीय स्तर के बास्केटबॉल खिलाड़ी और स्वर्ण पदक विजेता भी रहे थे।
उनके पिता भारतीय सेना में ब्रिगेडियर हैं। वह वर्तमान में कोलकाता में तैनात हैं। जबकि बड़ा भाई भी अमेरिका में कार्यरत है। उनकी मां पिछले करीब एक महीने से दिल्ली में अपने पिता की देखभाल के लिए रह रही थीं, जो कैंसर का इलाज करा रहे हैं। परिवार के लिए यह समय पहले से ही कठिन था। लेकिन इस हादसे ने उन्हें गहरे सदमे में डाल दिया।
परिजनों ने आरोप लगाया कि यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि नागरिक सुविधाओं में लापरवाही का परिणाम है। उनका कहना है कि शहर में खुले नालों और जलभराव की समस्या के कारण पहले भी कई लोगों की जान जा चुकी है। लेकिन हालात में कोई बड़ा सुधार नहीं हुआ। परिवार के एक करीबी ने कहा कि प्रशासन को इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए। यह पता लगाना चाहिए कि आखिर ऐसी परिस्थितियां क्यों बनीं, जिनकी वजह से एक युवा छात्र की जान चली गई।
यशवेंद्र के रिश्तेदारों ने बताया कि वह भारत आकर परिवार के साथ समय बिताना चाहते थे। लेकिन खुशियों से भरी यह यात्रा मातम में बदल गई। अब परिवार, दोस्त और रिश्तेदार इस सवाल का जवाब तलाश रहे हैं कि अगर समय रहते बचाव के पर्याप्त इंतजाम होते, तो क्या यशवेंद्र की जान बचाई जा सकती थी। सिंह के दादा देहरादून में रहते हैं। लेकिन परिवार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर का रहने वाला है।
जब परिवार के लोग उनके अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहे थे, तो उनके करीबी लोगों के लिए उस जिंदादिल नौजवान की यादों और इस दुखद घटना के बीच तालमेल बिठाना मुश्किल हो रहा था। घर की यह यात्रा एक दुखी परिवार, टूटे हुए दोस्तों और अनगिनत अनसुलझे सवालों को पीछे छोड़ गई है। पुलिस ने बताया कि वे पिछली रात एक दोस्त के घर रुके थे। वह उसी के घर जा रहे थे।