PM Modi Speaks With JD Vance: अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने शनिवार (8 अगस्त) रात को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन किया। इस दौरान पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच व्यापार, रक्षा और ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्रों में भारत-अमेरिका के व्यापक वैश्विक रणनीतिक संबंधों को बढ़ाने पर चर्चा की। दोनों नेताओं ने उभरती प्रौद्योगिकियों और अहम खनिजों के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने के अपने संकल्प को भी दोहराया। पीएम मोदी ने वेंस और उनकी पत्नी उषा को उनके बेटे के जन्म पर बधाई दी।
प्रधानमंत्री मोदी को वेंस का यह फोन तुर्किये, सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच रक्षा समझौते पर साइन होने के बाद आया है। इस समझौते को पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच एक नए क्षेत्रीय गठबंधन के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। पीएम मोदी ने X पर एक पोस्ट में कहा, "अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से फोन पर बात हुई। हमने प्रमुख क्षेत्रों में भारत-अमेरिका की व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की।"
PM मोदी ने कहा, "मैंने वेंस और उनकी पत्नी को उनके बेटे के जन्म पर बधाई दी तथा पूरे परिवार को शुभकामनाएं दीं।" भारत की ओर से जारी बयान में कहा गया कि पीएम मोदी और वेंस ने भारत-अमेरिका की व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी में हुई प्रगति की समीक्षा की।
बयान में कहा गया, "उन्होंने व्यापार, रक्षा, उभरती प्रौद्योगिकियों, ऊर्जा सुरक्षा तथा महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।" इसमें कहा गया. "दोनों नेताओं ने आपसी हित के क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रम पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया।" अमेरिकी पक्ष ने अभी तक बातचीत के बारे में कोई डिटेल्स नहीं दिया है।
पाकिस्तान, सऊदी और तुर्किये के बीच रक्षा समझौता
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच, पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये ने शुक्रवार को एक संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसके तहत इनमें से किसी एक भी देश पर किए गए हमले को तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। इसे 'मुस्लिम नाटो' भी कहा जा रहा है। एक संयुक्त बयान के अनुसार, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सऊदी युवराज (क्राउन प्रिंस) मोहम्मद बिन सलमान और तुर्किये के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन ने मक्का के अल-सफा पैलेस में हुई एक बैठक के दौरान 'मक्का संयुक्त रक्षा समझौते' पर हस्ताक्षर किए।
संयुक्त रक्षा के लिए मक्का अल-मुकर्रमा शिखर सम्मेलन के दौरान हुए इस समझौते का मकसद किसी भी तरह के हमले के खिलाफ सामूहिक प्रतिरोध को मजबूत करना है। बयान के अनुसार, "इसमें यह भी तय किया गया कि तीनों देशों में से किसी एक पर भी हुआ कोई भी सशस्त्र हमला, उन सभी पर हमला माना जाएगा।" बयान में कहा गया है कि इसमें तीनों देशों के बीच रक्षा सहयोग के सभी पहलुओं को बेहतर बनाने की बात भी शामिल है।
बयान में कहा गया है कि यह समझौता एक सुरक्षित और समृद्ध भविष्य की दिशा में अपनी सामूहिक सुरक्षा को और मजबूत करने तथा क्षेत्र और उसके बाहर शांति, सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए तीनों देशों की साझा प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है। यह समझौता पाकिस्तान (जो परमाणु हथियारों से लैस एकमात्र मुस्लिम देश है), सऊदी अरब (जो इस्लाम के सबसे पवित्र स्थलों का केंद्र और दुनिया के प्रमुख तेल निर्यातकों में से एक है) और तुर्की (जो नाटो का सदस्य है) को एक साथ जोड़ता है।
ईरान युद्ध के बाद हुआ डील
यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब पश्चिम एशिया में संघर्ष कई मोर्चों पर फैल गया है। इसमें लाल सागर और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य भी शामिल हैं, जिसके कारण खाड़ी देशों को क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग मजबूत करना पड़ा है। शहबाज शरीफ ने अप्रैल में सऊदी अरब का दौरा किया था, जिस दौरान उन्होंने वहां के शीर्ष नेतृत्व के साथ बातचीत की थी।
संयुक्त बयान में कहा गया है कि 'मक्का समझौता' तीनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे ऐतिहासिक संबंधों से प्रेरित है। यह भाईचारे और इस्लामी एकजुटता के मजबूत संबंध पर आधारित है जो उन्हें आपस में जोड़ते हैं। साथ ही यह उनके साझा रणनीतिक हितों और लंबे समय से चले आ रहे रक्षा सहयोग पर भी आधारित है। शुक्रवार को हुई बैठक के दौरान, तीनों पक्षों ने अपने संबंधों की समीक्षा की और पारस्परिक हित के कई मुद्दों पर चर्चा की।