अब वैष्णो देवी जाना हुआ और आसान! सिर्फ 6 घंटे में दिल्ली से कटरा पहुंच जाएंगे भक्त, जानिए पूरी डिटेल्स

Delhi-Amritsar-Katra Expressway: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार 17 जुलाई को दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे के अहम हिस्सों को देश को समर्पित करेंगे। इससे दिल्ली, अमृतसर और कटरा के बीच यात्रा के समय में काफी कमी आने की उम्मीद है। भारतीय रेलवे के मुताबिक, अब दिल्ली से कटरा सिर्फ 6 घंटे में पहुंच जाएंगे

अपडेटेड Jul 17, 2026 पर 12:55 PM
Delhi-Amritsar-Katra Expressway: राजधानी दिल्ली से कटरा जाने में अब सिर्फ 6 घंटे का समय लगेगा

Delhi-Amritsar-Katra Expressway: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार (17 जुलाई) को दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे के कई महत्वपूर्ण हिस्सों को राष्ट्र को समर्पित करेंगे। इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद राजधानी दिल्ली से माता वैष्णो देवी (कटरा) तक सड़क यात्रा का समय करीब 14 घंटे से घटकर सिर्फ 6 घंटे रह जाएगा। जबकि दिल्ली से अमृतसर की यात्रा 8 घंटे से घटकर लगभग 4 घंटे में पूरी हो सकेगी। यह एक्सप्रेसवे 667 किलोमीटर लंबे दिल्ली-अमृतसर-कटरा कॉरिडोर का हिस्सा है। इसे लगभग 38,905 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से विकसित किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के अनुसार, पीएम मोदी हरियाणा के जींद में आयोजित कार्यक्रम के दौरान 157.92 किलोमीटर लंबे चार-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे (पैकेज 1 से 5) का लोकार्पण करेंगे। इस हिस्से का निर्माण लगभग 9,680 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है। इसके बाद प्रधानमंत्री पंजाब के जालंधर में 30.9 किलोमीटर लंबे पैकेज-6 का भी उद्घाटन करेंगे।

तेज यात्रा के साथ हाईवे पर घटेगा दबाव


पूरे कॉरिडोर के चालू होने के बाद दिल्ली से कटरा की यात्रा लगभग 6 घंटे और दिल्ली से अमृतसर की यात्रा करीब 4 घंटे में पूरी हो सकेगी। इससे मौजूदा एनएच-44 (जीटी रोड) पर ट्रैफिक का दबाव भी कम होगा।

पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

इस एक्सप्रेसवे से माता वैष्णो देवी के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को बड़ी सुविधा मिलेगी। साथ ही पंजाब, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर के बीच कनेक्टिविटी मजबूत होगी। परियोजना से पर्यटन, लॉजिस्टिक्स, माल परिवहन और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा, प्रमुख इंटरचेंज के आसपास व्यावसायिक और रियल एस्टेट विकास को भी नई गति मिलेगी। साथ ही इससे उत्तर भारत में भी आर्थिक गतिविधियां और तेज होंगी।

भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन लॉन्च

पीएम मोदी ने शुक्रवार को हरियाणा के जींद और सोनीपत के बीच चलने वाली भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसके साथ ही भारत उन चुनिंदा देशों की कैटेगरी में शामिल हो गया है, जहां हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेनें हैं। यह रेलवे क्षेत्र में स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन व्यवस्था को अपनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। जींद और सोनीपत के बीच 89 किलोमीटर की दूरी यह ट्रेन दो घंटे में तय करेगी। इस दौरान यह 12 स्टेशनों पर रुकेगी।

प्रधानमंत्री ने जींद रेलवे स्टेशन से ट्रेन को रवाना करते समय हाथ हिलाकर अभिवादन किया। इस ट्रेन में बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे भी सवार थे। यह ट्रेन पूरी तरह भारत में डिजाइन, विकसित और एकीकृत की गई है। इसका निर्माण स्वदेशी तकनीक से किया गया है, जो उन्नत रेलवे इंजीनियरिंग के क्षेत्र में देश की बढ़ती क्षमता को दर्शाता है।

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आसमानी नीले और सफेद रंग की आकर्षक डिजाइन वाली यह ट्रेन 'हाइड्रोजन फ्यूल सेल' टेक्नोलॉजी से चलती है। इस तकनीक में हाइड्रोजन को बिजली में परिवर्तित किया जाता है। इससे ट्रेन को चलाने के लिए आवश्यक ऊर्जा प्राप्त होती है। भारत की इस हाइड्रोजन ट्रेन में 10 डिब्बे हैं, जिससे यह अब तक विकसित सबसे लंबी हाइड्रोजन चालित यात्री ट्रेनों में शामिल हो गई है।

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