आवा गुरु चाय पीला... वाराणसी रोपवे प्रोजेक्ट में हवा में भी मिलेगा खास बनारसी अहसास, नगर निगम की ये है तैयारी

नगर निगम की इस अनोखी पहल के तहत रोपवे के पूरे 4 किलोमीटर लंबे रूट के नीचे आने वाले मकानों की छतों पर खास थीम बेस्ड पेंटिंग्स बनाई जा रही हैं। जब यात्री ऊपर ट्रॉली से नीचे देखेंगे तो उन्हें छतों पर ठेठ बनारसी बोली वाले स्लोगन लिखे दिखाई देंगे।

अपडेटेड Oct 11, 2026 पर 4:06 PM
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वाराणसी में 807 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस अर्बन रोपवे का निर्माण कार्य अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। इसे बनाने वाली कार्यदायी संस्था नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट लिमिटेड ने 15 नवंबर तक निर्माण कार्य पूरी तरह खत्म करने का लक्ष्य रखा है।

धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी में देश का पहला अर्बन रोपवे ट्रांसपोर्ट बनकर लगभग तैयार हो चुका है। जल्द ही देश और दुनिया भर से आने वाले पर्यटक और श्रद्धालु इस रोपवे के जरिए आसमान से बनारस के विहंगम दृश्यों का आनंद लेते हुए रोमांचक सफर कर सकेंगे। लेकिन इस सफर की सबसे दिलचस्प बात यह होगी कि जब यात्री हवा में रोपवे की ट्रॉली में सफर कर रहे होंगे, तब नीचे छतों से उनका स्वागत एकदम खास और ठेठ बनारसी अंदाज में होगा। वाराणसी नगर निगम ने इस रोमांचक सफर को और यादगार बनाने के लिए एक बेहद धांसू और खूबसूरत प्लान तैयार किया है, जिससे हवा में तैरते यात्रियों को हर पल काशी में होने का अहसास मिलता रहेगा।

'का हो गुरु...' और 'आवा गुरु चाय पीला': छतों पर उकेरे जा रहे बनारसी स्लोगन

नगर निगम की इस अनोखी पहल के तहत रोपवे के पूरे 4 किलोमीटर लंबे रूट के नीचे आने वाले मकानों की छतों पर खास थीम बेस्ड पेंटिंग्स बनाई जा रही हैं। जब यात्री ऊपर ट्रॉली से नीचे देखेंगे तो उन्हें छतों पर ठेठ बनारसी बोली वाले स्लोगन लिखे दिखाई देंगे। इन पेंटिंग्स में 'का हो गुरु का हाल चाल बा...' और 'आवा गुरु चाय पीला...' जैसे बेहद लोकप्रिय बनारसी संवादों को खूबसूरत रंगों में उकेरा गया है। इसके अलावा कई मकानों की छतों पर बनारस के प्रसिद्ध घाटों के मनमोहक चित्र और पारंपरिक रंगोलियां भी बनाई जा रही हैं।


वाराणसी नगर निगम के जनसंपर्क अधिकारी संदीप श्रीवास्तव ने बताया कि इस थीम बेस्ड पेंटिंग के जरिए रोपवे के सफर को और ज्यादा आकर्षक और जीवंत बनाने की कोशिश की जा रही है। अभी अलग-अलग छतों पर करीब दो दर्जन पेंटिंग्स बनाने का काम तेजी से चल रहा है।

15 नवंबर तक निर्माण पूरा करने का लक्ष्य, 3 स्टेशनों का 96% काम पूरा

वाराणसी में 807 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस अर्बन रोपवे का निर्माण कार्य अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। इसे बनाने वाली कार्यदायी संस्था नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट लिमिटेड ने 15 नवंबर तक निर्माण कार्य पूरी तरह खत्म करने का लक्ष्य रखा है। प्रोजेक्ट के तहत कुल 5 स्टेशन बनाए जा रहे हैं, जिनमें से कैंट, विद्यापीठ और रथयात्रा स्टेशन का लगभग 96 फीसदी काम पूरा हो चुका है। वहीं, गोदौलिया और गिरजाघर स्टेशन का निर्माण कार्य भी अंतिम दौर में है। कैंट रेलवे स्टेशन से रथयात्रा के बीच अलग-अलग चरणों में रोपवे का टेस्टिंग) का काम सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है, जबकि रथयात्रा से गोदौलिया के बीच फिलहाल ट्रायल रन चल रहा है।

पीएम मोदी कर सकते हैं उद्घाटन, रोजाना 90 हजार यात्री करेंगे सफर

तैयारियों को देखते हुए उम्मीद जताई जा रही है कि बहुत जल्द प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी काशी की इस महत्वाकांक्षी और देश की पहली अर्बन रोपवे परियोजना का उद्घाटन कर इसे जनता को समर्पित कर सकते हैं। इस रोपवे ट्रांसपोर्ट के शुरू होने से वाराणसी आने वाले पर्यटकों और स्थानीय लोगों को सीधे कैंट स्टेशन से काशी विश्वनाथ धाम पहुंचना बेहद आसान हो जाएगा। अनुमान के मुताबिक, इस रोपवे से रोजाना करीब 90 हजार यात्री सफर करेंगे। इसके शुरू होते ही रथयात्रा, लक्सा और गिरजाघर जैसे बेहद व्यस्त मार्गों पर गाड़ियों का दबाव काफी कम हो जाएगा, जिससे इस इलाके में दशकों से लग रहे 'जाम के झाम' से लोगों को हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाएगी।

वाराणसी से अभिषेक जायसवाल की रिपोर्ट

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