Viral News: एक ओर अयोध्या के राम मंदिर में दान राशि में कथित अनियमितताओं का मामला सुर्खियों में है। वहीं राजस्थान के मेवाड़ इलाके में स्थित मशहूर श्री सांवलिया सेठ मंदिर अपनी पारदर्शी दान व्यवस्था और सख्त लेखा-जोखा सिस्टम को लेकर चर्चा में है। मेवाड़ क्षेत्र में स्थित भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित इस प्रसिद्ध मंदिर को देशभर के कारोबारी अपना ‘बिजनेस पार्टनर’ मानते हैं। वे अपने कारोबार के मुनाफे का एक हिस्सा यहां अर्पित करते हैं। 13 जुलाई को जब मंदिर की दान पेटियां खोली गईं तो पहले ही दिन 10.11 करोड़ रुपये की नकदी गिनी गई। दान की गिनती की प्रक्रिया छह दिनों तक चलनी है।
हर महीने 30 से 40 करोड़ रुपये का चढ़ावा
मंदिर प्रशासन के अनुसार, श्री सांवलिया सेठ मंदिर में हर महीने औसतन 30 से 40 करोड़ रुपये का चढ़ावा आता है। इतनी बड़ी राशि के सुरक्षित प्रबंधन के लिए मंदिर में मजबूत सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था लागू है। दान पेटियां, दान कक्ष और प्रशासनिक कार्यालय 24 घंटे सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में रहते हैं। दान वाले रूम में श्रद्धालु जैसे ही दान करते हैं। फिर उन्हें तुरंत आधिकारिक रसीद जारी की जाती है, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहती है।
साल में 11 बार खुलती हैं दान पेटियां
मंदिर की सबसे खास व्यवस्था यह है कि दान पेटियां साल में 11 बार खोली जाती हैं। दान पेटियां खोलने से लेकर कैश की गिनती तक पूरी प्रक्रिया सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में होती है। गिनती के दौरान प्रतिदिन की राशि मीडिया के माध्यम से सार्वजनिक की जाती है। वहीं, कैश गिनने वाले कर्मचारियों की मंदिर में एंट्री और एग्जिट के समय सघन जांच की जाती है, ताकि किसी तरह की गड़बड़ी की संभावना न रहे।
दान की राशि से होते हैं विकास कार्य
मंदिर बोर्ड के अध्यक्ष हजारी दास वैष्णव के अनुसार, श्रद्धालुओं द्वारा दान किए गए हर रुपये का विस्तृत हिसाब रखा जाता है। उन्होंने बताया कि मंदिर में आने वाला चढ़ावा केवल मंदिर के खजाने के लिए नहीं, बल्कि सामाजिक कल्याण और विकास कार्यों में भी खर्च किया जाता है। फिलहाल मंदिर प्रशासन करीब 100 करोड़ रुपये की विभिन्न परियोजनाओं पर काम कर रहा है। इनमें मंदिर परिसर का विस्तार और सौंदर्यीकरण, श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं तथा आसपास के 16 गांवों में विकास कार्य शामिल हैं।
पांच बैंकों में हैं मंदिर के अकाउंट
मंदिर प्रशासन के अनुसार, पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए मंदिर के मंडफिया स्थित पांच बैंकों में खाते संचालित हैं। सत्संग भवन में दान की गिनती पूरी होने के बाद इन बैंकों के प्रतिनिधि मौके पर पहुंचकर राशि का सत्यापन करते हैं, मंदिर बोर्ड को रसीद सौंपते हैं और पूरी रकम संबंधित बैंक खातों में जमा कर दी जाती है।
मंदिर प्रशासन का कहना है कि यह व्यवस्था श्रद्धालुओं के विश्वास और प्रशासन की जवाबदेही का प्रतीक है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि दान की गई प्रत्येक राशि का सही रिकॉर्ड रखा जाए और उसका उचित उपयोग हो। मंदिर के अधिकारियों का कहना है कि यह व्यवस्था भक्तों की आस्था और प्रशासन की जवाबदेही के प्रति प्रतिबद्धता, दोनों को दिखाती है। इससे यह पक्का होता है कि हर दान का सही तरीके से रिकॉर्ड और मैनेजमेंट किया जाए।