ओमान के तट और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास भारतीय चालक दल वाले जहाज पर हमले का मामला गरमाया हुआ है। आपको बता दें कि पिछले दिनों एक जहाज पर हमले में भारतीय चालक दल के तीन सदस्यों की मौत हुई थी और इसे लेकर काफी आक्रोश है। इस बीच एक और जहाज पर हमले का दावा सामने आया है और कहा जा रहा है कि इसपर भी भारतीय चालक दल है। इस हमले की खबरों को लेकर भारत सरकार ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। विदेश मंत्रालय ने शनिवार को उन तमाम रिपोर्टों को खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया जा रहा था कि ओमान तट के पास भारतीय क्रू वाले एक चौथे जहाज पर नया हमला हुआ है। विदेश मंत्रालय ने इन खबरों को पूरी तरह से 'झूठा' करार दिया है। खाड़ी क्षेत्र में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास हाल के दिनों में कमर्शियल जहाजों पर हुए सिलसिलेवार हमलों के बाद भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंताओं के बीच यह अहम स्पष्टीकरण सामने आया है।
विदेश मंत्रालय ने जहाज के कैप्टन से सीधे किया संपर्क
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सीएनएन-न्यूज18 से बताया कि सरकार ने स्थिति की वास्तविकता जानने के लिए सीधे उस जहाज के मास्टर (कैप्टन) से संपर्क किया, जिसे लेकर यह अफवाह उड़ी थी। रणधीर जायसवाल ने बताया, 'हमने लियाकी फ्रीडम (Liaki Freedom) नामक जहाज के मास्टर से बात की है, जिन्होंने इस बात की पुष्टि की है कि चालक दल के सभी सदस्य पूरी तरह सुरक्षित हैं और जो जानकारियां रिपोर्ट की जा रही हैं, वे बिल्कुल झूठी हैं।' इससे पहले आई कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया था कि भारतीय चालक दल के सदस्यों को ले जा रहे जहाज 'लियाकी फ्रीडम' पर ओमान के तट के पास संयुक्त राज्य अमेरिका (US) द्वारा हमला किया गया है।
यूनियन का बयान और जहाज के कोऑर्डिनेट्स
विदेश मंत्रालय के इस आधिकारिक स्पष्टीकरण से ठीक पहले'फॉरवर्ड सीमैन्स यूनियन ऑफ इंडिया' ने कहा था कि वे इस जहाज के साथ संपर्क स्थापित करने में असमर्थ हैं क्योंकि इसका वेरी हाई फ्रीक्वेंसी (VHF) रेडियो कोई जवाब नहीं दे रहा था। हालांकि, यूनियन ने यह भी बताया था कि वे जहाज की लोकेशन को ट्रैक करने में सफल रहे थे। यूनियन द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक उस समय जहाज के कोऑर्डिनेट्स टीट्यूड (अक्षांश) 24°43.85N और लोंगिट्यूड (देशांतर) 56°37.52E पर थे।
जून 2026 में भारतीय जहाजों पर हुए पिछले हमले
यह ताजा स्पष्टीकरण इसलिए भी बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि जून 2026 के दौरान ओमान की खाड़ी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्षेत्र में भारतीय चालक दल वाले टैंकरों पर कई हमले हो चुके हैं:
10 जून को हुआ हमला: टैंकर 'एमटी सेटेबेलो' पर अमेरिकी मिसाइलों से हमला किया गया था, जो उसके इंजन कंपार्टमेंट पर लगी थीं। इस दुखद हादसे में तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई थी, जबकि चालक दल के 21 सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया गया था।
11 जून को हुआ हमला: इसके ठीक एक दिन बाद एमटी जलवीर पर हमला हुआ। एक अमेरिकी जेट ने जहाज के इंजन रूम पर दो मिसाइलें दागी थीं। इस हमले में चालक दल के सभी 20 सदस्य सुरक्षित रहे।
8 जून को हुआ हमला: इससे पहले 8 जून को मैरीवेक्स नामक टैंकर पर एक अमेरिकी लड़ाकू विमान ने हमला किया था, जिससे जहाज पर आग लग गई थी और पूरे चालक दल को वहां से सुरक्षित बाहर निकालना पड़ा था।
इन हमलों को लेकर 'यूएस सेंट्रल कमांड' का कहना था कि ये जहाज ईरानी बंदरगाहों की अमेरिकी नाकेबंदी का उल्लंघन कर रहे थे और उन्होंने दिए गए निर्देशों का पालन नहीं किया था।
अप्रैल 2026 में भी हुई थी ऐसी घटना
इससे पहले अप्रैल 2026 में भी ओमान के उत्तर में ईरानी नौसेना द्वारा दो भारतीय कच्चे तेल के टैंकरों पर गोलीबारी की गई थी। हालांकि उस समय किसी के हताहत होने की खबर नहीं थी, लेकिन एक केबिन का शीशा टूट गया था और दोनों जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से वापस लौटने के लिए मजबूर होना पड़ा था। इनमें से एक जहाज भारतीय ध्वज वाला वीएलसीसी सुपरटैंकर सनमार हेराल्ड था, जो इराक का दो मिलियन (20 लाख) बैरल तेल ले जा रहा था। इन घटनाओं के बाद भारत ने वाशिंगटन (अमेरिका) के समक्ष कड़ा विरोध दर्ज कराया था और ईरान को भी इन हमलों के परिणामों को लेकर चेतावनी दी थी।