पश्चिम बंगाल में होने वाला है महाराष्ट्र जैसा 'असली-नकली' का खेला? TMC के 50 विधायक और 20 सांसद छोड़ सकते हैं ममता का साथ
Split In TMC: भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता सौमित्र खान ने हाल ही में दावा किया था कि बंगाल विधानसभा चुनावों में करारी हार के बाद से पूर्व सीएम ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लगभग 50 विधायक और 20 सांसद BJP के संपर्क में हैं। दावा किया जा रहा है कि ये विधायक जल्द ही TMC छोड़ देंहे
Split In TMC: ममता के करीब 50 विधायकों में 'असली तृणमूल' बनाने की कोशिश में लगे हुए हैं
Split In TMC: तृणमूल कांग्रेस (TMC) की करारी हार के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीतिक में नई उथल-पुथल देखने को मिल रही है। बंगाल की पूर्व सीएम ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) सबसे गंभीर आंतरिक चुनौती का सामना कर रही है। कोलकाता में हाल ही में TMC के कई बागी विधायकों की एक अहम बैठक हुई है। ममता के करीब 50 विधायक 'असली तृणमूल' बनाने की कोशिश में लगे हुए हैं।
विधायकों एवं सांसदों द्वारा वैकल्पिक राजनीतिक विकल्पों की तलाश को लेकर बढ़ती अटकलों ने इस स्थिति की तुलना उन नाटकीय विभाजनों से शुरू कर दी है। उन्होंने पिछले चार वर्षों में महाराष्ट्र की राजनीति को पूरी तरह बदल दिया था। ये घटनाक्रम इतने महत्वपूर्ण हो गए हैं कि TMC सुप्रीमो ममता बनर्जी ने खुद सार्वजनिक रूप से इसे स्वीकार किया है।
उन्होंने इसे पार्टी को कमजोर करने और खत्म करने का एक सुनियोजित प्रयास बताया। उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब ये अफवाहें जोर पकड़ रही हैं कि टीएमसी के नाराज नेताओं का एक धड़ा महाराष्ट्र में शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) में हुए विभाजन की तर्ज पर एक अलग गुट बनाने की सोच रहा है। सूत्रों का कहना है कि तृणमूल के बागी विधायक पश्चिम बंगाल विधानसभा में एक पत्र सौंप सकते हैं, जिसमें वे विपक्ष के नेता को बदलने की मांग करेंगे।
'TMC के 50 विधायक, 20 सांसद पाला बदलने को तैयार'
BJP के वरिष्ठ नेता सौमित्र खान ने हाल ही में दावा किया था कि TMC के लगभग 50 विधायक और 20 सांसद भारतीय जनता पार्टी के संपर्क में हैं। उन्होंने आगे कहा था कि अगर पार्टी नेतृत्व मंजूरी दे, तो वे पाला बदलने को तैयार हैं। सौमित्र खान ने दावा किया कि टीएमसी के करीब 50 विधायक अपनी पार्टी से नाराज हैं। उन्होंने कहा कि 20 सांसद भी बीजेपी में आने के लिए तैयार हैं। खान ने दावा किया कि ये विधायक-सांसद बीजेपी के संपर्क में हैं। वे नेतृत्व से मंजूरी मिलते ही पाला बदलने को तैयार हैं। खान ने तो यहां तक कह दिया है कि बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व अगर एक बार कह दे, तो टीएमसी नाम की कोई पार्टी नहीं बचेगी।
TMC के अंदर क्या चल रहा है?
इन अटकलों की तत्काल वजह बागी गतिविधियों का सामने आना है। इसमें निलंबित और असंतुष्ट नेता शामिल हैं। साथ ही ऐसी खबरें भी हैं कि TMC के दो MLA अन्य विधायकों के संपर्क में हैं। कोलकाता के राजनीतिक गलियारों में इस बात की जोरदार चर्चा है कि MLA हॉस्टल में बैठकें हुई हैं, जहां कथित तौर पर पार्टी के भविष्य और संभावित संगठनात्मक फेरबदल पर चर्चा की गई।
TMC द्वारा विधायकों संदीपान साहा और ऋतब्रत बनर्जी को पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप लगाकर निष्कासित किए जाने के बाद तनाव और बढ़ गया। सूत्रों ने News18 को बताया है कि लगभग 15 से 20 विधायक उस दबाव बागी ग्रुप के संपर्क में हैं, जो TMC में संभावित विभाजन की मुहिम चला रहा है।
TMC के घमासान को महाराष्ट्र से तुलना क्यों की जा रही है?
यह तुलना महाराष्ट्र में अपनाई गई रणनीति या 'प्लेबुक' से प्रेरित है। साल 2022 में शिवसेना तब टूट गई जब बागी एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे के खिलाफ बगावत कर दी। शिंदे ने शिवसेना के ज्यादातर विधायकों का समर्थन हासिल कर लिया। बाद में इस गुट को ही असली शिवसेना के तौर पर मान्यता मिली। इसी तरह एक साल बाद पूर्व डिप्टी सीएम दिवंगत अजित पवार ने NCP में भी ठीक वैसी ही फूट डाल दी। वे बड़ी संख्या में विधायकों को अपने साथ ले गए और NCP पर अपने चाचा शरद पवार की पकड़ को कमजोर कर दिया।
दोनों ही मामलों में बगावत की शुरुआत किसी औपचारिक ऐलान से नहीं हुई थी। इसकी शुरुआत बंद दरवाजों के पीछे हुई बैठकों, विधायकों के चुपचाप अपनी वफादारी बदलने और नेतृत्व के प्रति बढ़ती नाराजगी से हुई थी। पार्टी में हुई यह फूट तो काफा बाद में जाकर साफ तौर पर दिखाई दी।
बंगाल में आजकल इसी बात की चर्चा जोरों पर है कि क्या तृणमूल कांग्रेस के भीतर भी ठीक इसी तरह का कोई दांव आजमाया जा सकता है। खास तौर पर तब जब पार्टी को बंगाल चुनावों में झटका लगा हो और संगठन के भीतर ही सत्ता के कई अलग-अलग केंद्र उभर आए हों।
ममता बनर्जी की चेतावनी
TMC प्रमुख ममता बनर्जी ने इस खतरे को महज राजनीतिक गपशप कहकर खारिज नहीं किया है। TMC कार्यकर्ताओं और समर्थकों को संबोधित करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि दबाव की रणनीति और राजनीतिक जोड़-तोड़ के जरिए तृणमूल कांग्रेस को खत्म करने की एक सुनियोजित कोशिश की जा रही है। उन्होंने पार्टी को अस्थिर करने की इन कोशिशों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने का अपील किया।
बागी नेताओं के लिए एक और संदेश में बनर्जी ने संकेत दिया कि पार्टी अनुशासन के मामले में कोई समझौता नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि संगठन उनके बिना ही बेहतर है। पूर्व सीएम ने इस बात पर जोर दिया कि TMC की ताकत उसके जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं से आती है, न कि किसी एक नेता से..। अगर बागी नेता और भी विधायकों को अपने खेमे में लाने में कामयाब हो जाते हैं, तो बंगाल में TMC की स्थापना के बाद से अब तक का सबसे बड़ा विपक्षी राजनीतिक फेरबदल देखने को मिल सकता है।