ED Raids Vedanta Group: अधिकारियों ने मंगलवार (2 जून) को बताया कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (FEMA) से जुड़ी जांच के तहत वेदांता ग्रुप के खिलाफ छापेमारी की है। सूत्रों ने बताया कि खनन क्षेत्र से जुड़े वेदांता ग्रुप के खिलाफ यह कार्रवाई सोमवार (1 जून) को शुरू की गई थी।
अधिकारियों ने बताया कि अरबपति कारोबारी अनिल अग्रवाल से जुड़ी कंपनी के खिलाफ केंद्रीय एजेंसी द्वारा फेमा के तहत जांच शुरू किए जाने के बाद यह छापेमारी की गई। खबर लिखे जाने तक कंपनी ने इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।
CNBC-TV18 के मुताबिक, प्रवर्तन निदेशालय (ED) मुंबई और दिल्ली में वेदांता के दफ्तरों पर छापेमारी कर रहा है। हमारे सहयोगी न्यूज चैनल को सूत्रों ने बताया कि ये तलाशी वेदांता द्वारा अपनी पेरेंट कंपनी को किए गए रॉयल्टी पेमेंट्स से जुड़ी है। न्यूज एजेंसी ANI के अनुसार, अधिकारियों का कहना है कि ED, फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट के तहत वेदांता ग्रुप पर छापेमारी कर रही है।
अनिल अग्रुवाल ने अपनी 4 कंपनियों के बारे में दी थी डिटेल्स जानकारी
पिछले महीने वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने कहा था कि Vedanta Group की अलग हुई चारों कंपनियां एक महीने के अंदर अलग-अलग लिस्टेड हो जाएंगी। CNBC-TV18 के साथ एक खास इंटरव्यू में अग्रवाल ने कहा था, "अगले महीने तक सभी अलग-अलग कंपनियां लिस्टेड हो जाएंगी।" इस डीमर्जर से चार अलग-अलग लिस्टेड कंपनियां बनेंगी।
पहली कंपनी वेदांता एल्युमीनियम है, जो अभी सालाना 3 मिलियन टन उत्पादन करती है। साथ ही तीन साल के अंदर 6 मिलियन टन का लक्ष्य रखा है। अग्रवाल ने कहा था कि यह कंपनी दुनिया की सबसे बड़ी प्राइवेट-सेक्टर एल्युमीनियम उत्पादक बनने की राह पर है। वेदांता ग्रुप एक इंडस्ट्रियल पार्क मॉडल के जरिए लगभग 1,000 डाउनस्ट्रीम इंडस्ट्रीज डेवलप करने की भी योजना बना रहा है।
दूसरी कंपनी तेल और गैस का कारोबार है। इसके बारे में अग्रवाल ने कहा था कि वेदांता अगले तीन से पांच सालों में उत्पादन बढ़ाकर रोजाना 5,00,000 बैरल तक पहुंचाने के लिए $5 बिलियन का निवेश करने की योजना बना रही है। इस कारोबार में टाइट ऑयल, शेल गैस, शैलो-वॉटर और डीप-वॉटर एसेट्स के साथ-साथ उत्तर-पूर्वी भारत में एक ब्लॉक भी शामिल है।
उन्होंने आगे कहा कि ग्रुप बड़े पैमाने पर निवेश को बढ़ावा देने के लिए सरकार से लंबी अवधि की लीज लेने की कोशिश कर रहा है। तीसरी कंपनी में ग्रुप का पावर कारोबार शामिल होगा, जो अभी 4,000 MW बिजली पैदा करता है। यह ब्राउनफील्ड प्रोजेक्ट्स के जरिए अपनी क्षमता बढ़ाकर 20,000 MW तक पहुंचाने का लक्ष्य रखता है।
अनिल अग्रवाल ने कंपनी के कोयला लिंकेज पर जोर दिया। उन्होंने अपनी इस बात को दोहराया कि कोयला ऊर्जा का एक अहम स्रोत बना रहेगा। चौथी कंपनी आयरन और स्टील का कारोबार होगी। अग्रवाल ने कहा कि कंपनी अभी 4 मिलियन टन स्टील का उत्पादन करती है।
उन्होंने कहा कि यह कंपनी ग्रीन, इलेक्ट्रिकल और स्पेशल स्टील पर खास ध्यान देते हुए अपनी क्षमता बढ़ाकर 15 मिलियन टन तक पहुंचाने का लक्ष्य रखती है। इस कारोबार को कैप्टिव आयरन ओर और कोक संसाधनों का भी सहारा मिला हुआ है। फिलहाल, ED जांच से जुड़ी और डिटेल्स जानकारी का इंतजार है।