Get App

'पश्चिम से प्रभावित होकर लिव-इन-रिलेशनशिप में रह रहे युवा, ब्रेकअप के बाद रेप की दर्ज होती है FIR'; इलाहाबाद HC ने रद्द की उम्रकैद की सजा

Allahabad High Court News: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक महिला के अपहरण और यौन उत्पीड़न के आरोपी व्यक्ति को दी गई आजीवन कारावास की सजा को रद्द कर दिया है। अदालत ने कहा कि युवाओं में लिव-इन रिलेशनशिप चुनने की बढ़ती प्रवृत्ति पश्चिमी विचारों से प्रभावित है। असफल रिश्तों के बाद अक्सर बलात्कार का आरोप लगाया जाता है

Akhilesh Nath Tripathiअपडेटेड Jan 26, 2026 पर 5:27 PM
'पश्चिम से प्रभावित होकर लिव-इन-रिलेशनशिप में रह रहे युवा, ब्रेकअप के बाद रेप की दर्ज होती है FIR'; इलाहाबाद HC ने रद्द की उम्रकैद की सजा
Allahabad High Court News: हाई कोर्ट ने कहा कि पश्चिमी विचारों के प्रभाव से लिव-इन में रह रहे युवा रिश्ते टूटने पर रेप की FIR करवा देते हैं

Allahabad High Court News: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि पश्चिमी विचारों से प्रभावित होकर युवा 'लिव-इन-रिलेशनशिप' में रह रहे हैं। साथ ही अदालत ने कहा कि इस तरह के संबंध खराब होने पर दुष्कर्म के आरोप लगाते हुए FIR दर्ज करा दी जाती है। अदालत ने यह टिप्पणी करते हुए एक युवक को सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा रद्द कर दी। युवक पर कथित तौर पर एक नाबालिग लड़की का अपहरण करके यौन शोषण करने का आरोप था।

अदालत ने पाया कि घटना के समय लड़की बालिग थी। वह अपनी इच्छा से आरोपी युवक के साथ घर छोड़कर गई थी। जस्टिस सिद्धार्थ और जस्टिस प्रशांत मिश्र की खंडपीठ ने चंद्रेश नामक युवक की अपील स्वीकार करते हुए कहा कि पश्चिमी विचारों से प्रभावित होकर युवाओं के बीच बिना शादी के लिव-इन-रिलेशनशिप में रहने का चलन बढ़ गया है। पीठ ने यह भी कहा कि जब ऐसे संबंध खराब हो जाते हैं तो FIR दर्ज करा दी जाती है।

पीठ ने यह भी कहा कि चूंकि कानून महिलाओं के पक्ष में हैं। इसलिए पुरुष इन कानूनों के आधार पर दोषी ठहराए जाते हैं। जबकि ये कानून तब बनाए गए थे जब लिव-इन-रिलेशनशिप की अवधारणा अस्तित्व में नहीं थी। मुकदमे के अनुसार, एक व्यक्ति ने आरोप लगाया कि याचिकाकर्ता शादी के बहाने उसकी बेटी को घर से ले गया।

बाद में उसे बेंगलुरु ले जाकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। निचली अदालत ने अपीलकर्ता को भारतीय दंड सहिंता (IPC) की संबंधित धाराओं के तहत दोषी ठहराया था। इसके खिलाफ उसने हाई कोर्ट में अपील की थी। रिकॉर्ड पर गौर करने के बाद अदालत ने पाया कि पीड़िता बालिग थी।

सब समाचार

+ और भी पढ़ें