J&K में 'व्हाइट-कॉलर' टेरर नेटवर्क का खुलासा, डॉक्टरों ने आतंकी हमलों के लिए बनाया 'अंसार इंटेरिम' संगठन
White-Collar terror probe: जम्मू-कश्मीर पुलिस ने सफेदपोश आतंकवादी गिरोह यानी 'व्हाइट-कॉलर' टेरर नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। इस मामले में गिरफ्तार किए गए डॉक्टर 2016 से ही कट्टरपंथी बन चुके थे। उन्होंने आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए 'अंसार इंटेरिम' नामक एक नया आतंकवादी संगठन बनाया था
White-Collar terror probe: डॉक्टरों ने 'अंसार इंटेरिम' नामक एक नया आतंकवादी संगठन बनाया था
White-Collar terror probe: जम्मू-कश्मीर पुलिस ने एक व्हाइट-कॉलर टेररिस्ट गैंग का भंडाफोड़ किया है। अधिकारियों ने रविवार (15 फरवरी) को बताया कि इस मामले में गिरफ्तार डॉक्टर 2016 से ही कट्टरपंथी बन चुके थे। उन्होंने आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए 'अंसार इंटेरिम' नामक एक नया आतंकवादी संगठन बनाया था। अधिकारियों ने बताया कि नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) अब इस मामले की जांच कर रही है। शुरुआती जांच में बड़ा खुलासा हुआ है।
जांच में सामने आया है कि 10 नवंबर को लाल किले के बाहर धमाके में इस्तेमाल की गई विस्फोटकों से लदी कार चलाने वाला डॉ. उमर उन नबी साल 2016 और 2018 में आतंकी संगठनों में शामिल होने की कोशिश कर चुका था। लेकिन वह अपने प्रयासों में सफल नहीं हो पाया था। बता दें कि दिल्ली के लाल किले के पास हुए ब्लास्ट में 10 से अधिक लोग मारे गए थे।
श्रीनगर में स्थित ईदगाह में मिले थे सभी आतंकी
अधिकारियों ने अब तक जुटाए गए सबूतों को एक साथ जोड़ते हुए कहा कि आरोपी डॉक्टर मुजम्मिल गनी, मारे जा चुके उमर उन नबी और अदील राठेर फिलहाल फरार उसका भाई मुजफ्फर राथर, मौलवी इरफान, कारी आमिर और तुफैल गाजी अप्रैल 2022 में श्रीनगर में स्थित ईदगाह में मिले थे।
अधिकारियों ने बताया कि बैठक के दौरान उन्होंने 'अंसार इंटेरिम' नामक एक आतंकी संगठन बनाने का फैसला किया। इसमें अदील को आतंकी समूह का 'अमीर' (प्रमुख), मौलवी इरफान को 'उप-अमीर' और गनी को कोषाध्यक्ष घोषित किया गया। उन्होंने यह भी बताया कि आतंकवादी समूहों में 'अंसार' को आमतौर पर विश्व स्तर पर प्रतिबंधित आतंकी संगठन अल-कायदा से जोड़ा जाता है।
पूछताछ में चौंकाने वाला खुलासा
अधिकारियों ने बताया कि गिरफ्तार किए गए डॉक्टरों और धार्मिक उपदेशकों ने पूछताछ करने वालों को बताया कि सक्रिय आतंकवादियों से उनके सभी संपर्क टूट जाने के कारण एक नया ग्रुप बनाने की आवश्यकता हुई। बैठक के दौरान सदस्यों को भूमिकाएं और 'कोड' सौंपे गए। उमर ने समन्वयक की भूमिका संभाली। उसने गनी के साथ मिलकर फंडिंग एवं खरीद का काम संभाला।
साल 2023 में आतंकी समूह ने हरियाणा के सोहना और नूंह क्षेत्रों से उर्वरक खरीदने का निर्णय लिया। उमर के निर्देश पर फरीदाबाद की रसायन की एक दुकान से NPK (जिसे आमतौर पर पोटेशियम नाइट्रेट के नाम से जाना जाता है) भी खरीदा गया।
ऑनलाइन वीडियो देख तैयार किया IED
पूछताछ के दौरान, गिरफ्तार डॉक्टरों ने बताया कि उमर ने साधारण IED का निर्माण सीखने के लिए ऑनलाइन वीडियो देखने शुरू किए थे। वह ट्राइएसीटोन ट्राइपेरोक्साइड (TATP) तैयार करने में कामयाब रहा था, जो सबसे प्रमुख पेरोक्साइड विस्फोटकों में से एक है। अधिकारियों के अनुसार, अदील ने नए आतंकी समूह के लिए सदस्यों की तलाश शुरू कर दी थी। इसके बाद दक्षिण कश्मीर के दानिश उर्फ जसीर नामक एक व्यक्ति को अपने समूह में शामिल कर लिया था।
अदील दानिश को फरीदाबाद में अल फलाह यूनिवर्सिटी में किराए के एक घर में ले गया। यहां दोनों ने उमर और गनी को टीएटीपी विस्फोटक सामग्री तैयार करते हुए देखा। बाद में उमर ने दानिश को फिदायीन (आत्मघाती) हमला करने के लिए मनाने की कोशिश की। लेकिन दानिश ने अपनी खराब आर्थिक स्थिति और इस विश्वास का हवाला देते हुए आखिरी टाइम में अपना इरादा बदल दिया कि इस्लाम में आत्महत्या मना है।
डॉक्टर उमर का खतरनाथ साजिश नाकाम
पुलवामा के 28 वर्षीय डॉक्टर उमर को कश्मीर, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में फैले एक नेटवर्क का सबसे कट्टरपंथी सदस्य और प्रमुख संचालक माना जाता है। सबूतों से पता चलता है कि उसकी मूल योजना राष्ट्रीय राजधानी या किसी धार्मिक महत्व के स्थल पर भीड़भाड़ वाली जगह पर एक VBIED (घातक विस्फोट करने वाला बम 'मैसिवली लीथल एक्सप्लोसिव डिवाइस') रखने और फिर भाग जाने की थी।
हालांकि, यह साजिश उस समय विफल हो गई जब श्रीनगर पुलिस की गहन जांच के चलते गनी की गिरफ्तारी हुई। फिर विस्फोटक बरामद किए गए। इससे उमर संभवतः घबरा गया और आखिर में लाल किले के बाहर समय से पहले विस्फोट कर दिया।
कैसे हुआ साजिश का पर्दाफाश?
19 अक्टूबर को श्रीनगर के बाहरी इलाके बुनपोरा, नौगाम में दीवारों पर जैश-ए-मोहम्मद (JEM) के पोस्टर दिखाई देने की एक छोटी लेकिन महत्वपूर्ण घटना के बाद इस नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ था। श्रीनगर पुलिस ने मामला दर्ज कर सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की पड़ताल की।
इसके आधार पर तीन स्थानीय निवासियों आरिफ निसार डार उर्फ साहिल, यासिर उल अशरफ और मकसूद अहमद डार उर्फ शाहिद को गिरफ्तार किया गया। इन सभी के खिलाफ पहले पथराव के मामले दर्ज थे। उनसे पूछताछ के बाद डॉक्टर कर्मी से मौलवी बने शोपियां के निवासी मौलवी इरफान अहमद को गिरफ्तार किया गया। इस पर पोस्टर उपलब्ध कराने और युवाओं को कट्टरपंथ की ओर आकर्षित करने का आरोप है।