Ajit Pawar Death: महाराष्ट्र के कद्दावर नेता और उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के विमान हादसे में आकस्मिक निधन ने राज्य को शोक में डुबो दिया है। इसके साथ ही उनकी राजनीतिक विरासत और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के भविष्य पर भी बड़े सवाल खड़े हो गए है। 66 वर्षीय 'दादा' के जाने से पैदा हुए इस शून्य को भरने के लिए अब उनके परिवार, विशेषकर उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार और बड़े बेटे पार्थ पवार के नाम चर्चा के केंद्र में हैं।
स्थिरता और निरंतरता का चेहरा हैं सुनेत्रा पवार
राज्यसभा सांसद सुनेत्रा पवार को अब पार्टी और परिवार को एकजुट रखने वाली एक केंद्रीय धुरी के रूप में देखा जा रहा है। वह 'एनवायर्नमेंटल फोरम ऑफ इंडिया' की CEO और बारामती टेक्सटाइल कंपनी की अध्यक्ष के रूप में सक्रिय रही हैं। हालांकि वह बारामती से लोकसभा चुनाव हार गई थीं, लेकिन वर्तमान में राज्यसभा सदस्य होने के नाते उनके पास विधायी अनुभव है। पार्टी कार्यकर्ता उन्हें एक 'स्थिर संरक्षक' के रूप में देख रहे हैं, जो अजीत दादा के समर्थकों और पवार वंश के बीच एक कड़ी का काम कर सकती हैं।
क्या पार्थ पवार बनेंगे पार्टी के कर्ताधर्ता?
अजीत पवार के बड़े बेटे पार्थ पवार का नाम उत्तराधिकार की दौड़ में सबसे ऊपर है, हालांकि उनका अब तक का राजनीतिक सफर उतार-चढ़ाव भरा रहा है। 2019 के लोकसभा चुनावों में हार के बाद से पार्थ ने खुद को लो-प्रोफाइल रखा है। 2025 में पुणे के मुंधवा जमीन सौदे को लेकर भी उनका नाम चर्चा में आया था। इस त्रासदी के बाद, समर्थकों का एक बड़ा वर्ग चाहता है कि पार्थ सक्रिय राजनीति में सामने आएं ताकि 'पवार' नाम की राजनीतिक चमक और दादा की विरासत को बरकरार रखा जा सके।
अजीत पवार के जाने से महाराष्ट्र की राजनीति पर प्रभाव
अजीत पवार ने 2023 में अपने चाचा शरद पवार से अलग होकर भाजपा-शिवसेना गठबंधन के साथ हाथ मिलाया था। अब उनके जाने से महायुति (BJP-Sena-NCP) के भीतर शक्ति संतुलन बिगड़ सकता है। शरद पवार गुट के साथ भविष्य के रिश्तों और पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को संभालने में सुनेत्रा और पार्थ की भूमिका निर्णायक होगी।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, 'अजीत दादा केवल एक नेता नहीं, एक संस्था थे। उनके जाने के बाद परिवार की एकजुटता ही पार्टी का भविष्य तय करेगी। आने वाले दिनों में बारामती का सहकारी आंदोलन और राजनीतिक ढांचा किसके हाथ में होगा, यह देखना दिलचस्प होगा।'