Who is Bushra Bano: इंशाअल्लाह-जजाकअल्लाह कहने को लेकर क्यों घेरा जा रहा है? IPS बुशरा बानो कौन हैं, जानिए इनकी पूरी कहानी

Who is Bushra Bano: रिपोर्ट के मुताबिक, एक 'हिंदू अधिकार समूह' ने कॉम्पिटिटिव एग्जाम के लिए कोचिंग प्लेटफॉर्म को प्रमोट करने वाले एक वीडियो में उनके इस्लामिक अभिवादन के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई। खड़गपुर में एडिशनल सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (ASP) और 2021 बैच की IPS अधिकारी बुशरा बानो को 14 सितंबर को राज्य सशस्त्र पुलिस की चौथी बटालियन में डिप्टी कमांडेंट के पद पर ट्रांसफर कर दिया गया

अपडेटेड Sep 17, 2026 पर 1:56 PM
  • Follow Us On Google
  • Add as a Preferred Source on Google
Who is Bushra Bano: पश्चिम बंगाल में इस्लामिक नारेबाजी विवाद के बीच IPS अधिकारी का तबादला हो गया है

Who is Bushra Bano: भारतीय जनता पार्टी (BJP) शासित पश्चिम बंगाल में एक IPS अधिकारी के ट्रांसफर को लेकर राज्य में राजनीतिक और सोशल मीडिया पर विवाद खड़ा हो गया है। 'इंडिया टुडे' की रिपोर्ट के मुताबिक, यह विवाद तब शुरू हुआ जब एक 'हिंदू अधिकार समूह' ने कॉम्पिटिटिव एग्जाम के लिए कोचिंग प्लेटफॉर्म को प्रमोट करने वाले एक वीडियो में उनके इस्लामिक अभिवादन के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई। खड़गपुर में एडिशनल सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (ASP) और 2021 बैच की IPS अधिकारी बुशरा बानो को 14 सितंबर को राज्य सशस्त्र पुलिस की चौथी बटालियन में डिप्टी कमांडेंट के पद पर ट्रांसफर कर दिया गया। उनकी जगह पार्थ घोष को खड़गपुर का नया ASP बनाया गया है।

दबाव में हुआ ट्रांसफर या रूटीन प्रक्रिया है?

विवाद के बीच बंगाल सरकार ने इस ट्रांसफर को रूटीन प्रक्रिया बताया है। हलांकि, यह फेरबदल बुशरा बानो द्वारा एक दिन पहले यानी 13 सितंबर को X पर पोस्ट किए गए एक वीडियो पर हुई आलोचना के समय ही हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक, वीडियो में वह पुलिस की वर्दी में थीं। इस दौरान वह अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) की रेजिडेंशियल कोचिंग एकेडमी में बिताए अपने समय के बारे में बात कर रही थीं। यहां उन्होंने UPSC परीक्षाओं की तैयारी की थी।


वीडियो में क्या है?

वीडियो में बुशरा बानो ने बताया कि UPSC की तैयारी के लिए सऊदी अरब में असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर काम करने के बाद वह भारत लौटी थीं। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय कोचिंग एकेडमी की किताबों, लाइब्रेरी और मॉक टेस्ट को दिया। साथ ही छात्रों को वहां एडमिशन लेने के लिए प्रोत्साहित किया। रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, "मुझे उम्मीद है कि और छात्र एकेडमी में दाखिला लेंगे और इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करेंगे ताकि मेरे जैसे और लोग आगे आ सकें।"

विवाद उनके संदेश से नहीं। बल्कि उसे देते समय उनके द्वारा इस्तेमाल किए गए धार्मिक शब्दों से पैदा हुआ। रिपोर्ट में बताया गया है कि उन्होंने वीडियो की शुरुआत 'अस्सलाम-अलैकुम' से की। फिर अपनी बातचीत के दौरान 'इंशाल्लाह' का इस्तेमाल किया। साथ ही इसका अंत 'जजाकल्लाह खैर' से किया।

हिंदू संगठनों ने जताया विरोध

'हिंदू नेटवर्क फाउंडेशन' की एक यूनिट के तौर पर अपनी पहचान रखने वाले 'हिंदू लीगल फंड' ने उनके शब्दों के चयन को लेकर पश्चिम बंगाल के गृह सचिव के पास शिकायत दर्ज कराई। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में संगठन ने तर्क दिया कि भारतीय राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले एक कार्यरत अधिकारी को इसके बजाय 'वंदे मातरम' या 'जय हिंद' जैसे राष्ट्रीय अभिवादनों का इस्तेमाल करना चाहिए था।

उन्होंने मामले की समीक्षा करने और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रुप की शिकायत में यह सवाल उठाया गया कि एक सरकारी अधिकारी, जो अपनी रैंक बता रही थी और यूनिफॉर्म में थी, वह आधिकारिक दिखने वाले सार्वजनिक संदेश में ऐसी भाषा का इस्तेमाल कैसे कर सकती है।

सोशल मीडिया पर बढ़ा विवाद

वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर यह विवाद बढ़ गया। रिपोर्ट में बताया गया कि यूज़र्स के बीच इसे लेकर मतभेद था। कछ लोग धार्मिक बातों का जिक्र करने के लिए बुशरा बानो की आलोचना कर रहे थे। जबकि दूसरे यह सवाल उठा रहे थे कि क्या सभी सरकारी अधिकारियों के लिए निष्पक्षता का नियम एक जैसा लागू किया जा रहा है।

किसने क्या कहा?

पूर्व सिविल सर्वेंट आशीष जोशी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सार्वजनिक रूप से उनका समर्थन किया है। उन्होंने लिखा, "भारत की असली ताकत विविधता में एकता है। बुशरा बानो IPS की तारीफ़ होनी चाहिए। उन्होंने दो बार UPSC पास किया,।सऊदी अरब में एक आरामदायक नौकरी छोड़ी और अब पूरी लगन से देश की सेवा कर रही हैं।"

उन्होंने आगे कहा, "उनके शब्दों का चुनाव उनके निजी विश्वास को दिखाता है, न कि उस देश के प्रति अनादर को जिसकी वह रक्षा करती हैं। भारत जैसे विशाल और विविधता वाले देश में यह सह-अस्तित्व कोई कमजोरी नहीं, बल्कि हमारा गर्व है। आपकी सेवा के लिए धन्यवाद, बुशरा! जजाकल्लाह खैर!"

अन्य यूजर्स ने सार्वजनिक जीवन में वरिष्ठ राजनीतिक नेताओं द्वारा हिंदू धार्मिक नारों के इस्तेमाल से इसकी तुलना की। वहीं, मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, एक सोशल मीडिया ग्रुप ने आरोप लगाया कि दक्षिणपंथी संगठन बुशरा बानो को इसलिए निशाना बना रहे हैं, क्योंकि वह अल्पसंख्यक समुदाय से हैं।

बुशरा बानो!

इस विवाद ने उनके अनोखे करियर सफर पर भी असर डाला है। उत्तर प्रदेश के कन्नौज की रहने वाली बुशरा बानो ने सऊदी अरब में काम करने से पहले अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से अपनी PhD पूरी की थी। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत लौटने पर उन्होंने UPSC की तैयारी जारी रखते हुए कोल इंडिया में नौकरी की।

उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा पास की और शुरू में इंडियन रेलवे ट्रैफिक सर्विस के लिए चुनी गईं। बाद में उन्होंने सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट बनने के लिए उत्तर प्रदेश प्रशासनिक सेवा परीक्षा पास की। फिर दूसरी बार UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास करके IPS में जगह बनाई। उनकी उपलब्धि ने पहले भी लोगों का ध्यान खींचा था क्योंकि उन्होंने दो बच्चों की परवरिश करते हुए दो बार UPSC पास किया था।

रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत की प्रतिस्पर्धी सिविल सेवा प्रणाली में दृढ़ता के उदाहरण के तौर पर अक्सर इस बात का ज़िक्र किया जाता है। ट्रांसफर और वीडियो विवाद ने अब एक खास सवाल को सामने ला दिया है। क्या आधिकारिक संदेश में किसी अधिकारी का निजी धार्मिक इजहार सरकारी सेवकों से अपेक्षित निष्पक्षता के सिद्धांत का उल्लंघन करता है? सुवेंदु अधिकारी सरकार अपने इस रुख पर कायम है कि तबादला एक सामान्य प्रक्रिया थी, जबकि धर्म, सार्वजनिक पद और व्यक्तिगत अभिव्यक्ति को लेकर बहस जारी है।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।