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Judge Ravi Kumar Diwakar: यूपी के जज रवि कुमार दिवाकर ने 5 महीनों में 23 को सुनाई फांसी की सजा! उन सभी की पूरी लिस्ट जिन्हें अब तक वो दे चुके डेथ सेंटेंस

Judge Ravi Kumar Diwakar: जज रवि कुमार दिवाकर उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर स्थित फास्ट-ट्रैक कोर्ट में एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज (अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश) हैं। वह अपने फैसलों को लेकर कई महीनों से चर्चा में बने हुए हैं। पिछले चार महीनों में रवि की अदालत द्वारा सुनाई गई फांसी की सजाओं की संख्या बढ़कर 23 हो गई है

Akhilesh Nath Tripathiअपडेटेड Sep 08, 2026 पर 1:43 PM
Judge Ravi Kumar Diwakar: यूपी के जज रवि कुमार दिवाकर ने 5 महीनों में 23 को सुनाई फांसी की सजा! उन सभी की पूरी लिस्ट जिन्हें अब तक वो दे चुके डेथ सेंटेंस
Judge Ravi Kumar Diwakar: ताजा मामले में जज रवि कुमार दिवाकर ने दहेज हत्या के दोषी नदीम को फांसी की सजा सुनाई है

Judge Ravi Kumar Diwakar: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में सिर्फ पांच महीने में 23 लोगों को फांसी की सजा सुनाने वाले जज रवि कुमार दिवाकर एक बार फिर चर्चा में हैं। उनके कोर्ट में लंबित हत्या और गंभीर अपराधों से जुड़े करीब 100 मामलों को अब दूसरे कोर्ट में भेज दिया गया है। इनमें ऐसे मामले शामिल हैं जिनमें मौत की सजा या उम्रकैद का प्रावधान है। न्यूज एजेंसी 'पीटीआई' के मुताबिक, मुजफ्फरनगर में फास्ट-ट्रैक कोर्ट के एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज रवि कुमार दिवाकर ने पिछले पांच महीनों में 11 अलग-अलग मामलों में 23 दोषियों को मौत की सजा सुनाई है। इसके बाद उनके कोर्ट में लंबित करीब 100 गंभीर आपराधिक मामलों को प्रशासनिक आदेश के जरिए दूसरे कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया।

सरकारी वकील कुलदीप कुमार के मुताबिक, ये मामले अब डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज वीरेंद्र कुमार सिंह की अदालत में जाएंगे। हालांकि, बाद की रिपोर्टों में प्रशासनिक आदेश में 97 मामलों को 'रिकॉल्ड (recalled)' किए जाने की बात सामने आई है। यानी शुरुआती खबरों में बताए गए करीब 100 मामलों की संख्या प्रशासनिक रिकॉर्ड में 97 है।

आखिर क्यों ट्रांसफर किए गए इतने मामले?

मुजफ्फरनगर जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रमोद त्यागी के अनुसार, वकीलों और मुकदमों से जुड़े लोगों के बीच यह आशंका थी कि जज दिवाकर के सामने लंबित गंभीर मामलों में भी मौत की सजा सुनाई जा सकती है। इसके बाद जिला जज ने प्रशासनिक आदेश के जरिए मामलों को अपने कोर्ट में वापस बुला लिया। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि केस ट्रांसफर करना जिला जज के अधिकार क्षेत्र में आने वाली प्रशासनिक प्रक्रिया है। सरकारी वकील के मुताबिक, ट्रांसफर किए गए मामलों में हत्या जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं, जिनमें कानून के तहत मौत या उम्रकैद जैसी सजा हो सकती है।

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