हिमाचल प्रदेश के रहने वाले युवा डेक कैडेट आदित्य शर्मा की मौत उस समय हो गई, जब अमेरिकी सेना ने ओमान की खाड़ी में मौजूद तेल टैंकर MT Settebello पर हमला किया। इस हमले में तीन भारतीय नाविकों की जान गई, जिनमें आदित्य शर्मा, इंजन फिटर शिवानंद चौरसिया और चीफ इंजीनियर पटनाला सुरेश शामिल थे।
आदित्य जहाज पर डेक कैडेट के तौर पर काम कर रहे थे और भविष्य में जहाज के अधिकारी बनने की ट्रेनिंग ले रहे थे। जहाज पर कुल 24 भारतीय क्रू सदस्य सवार थे। अमेरिकी सेना का आरोप था कि यह जहाज अमेरिकी प्रतिबंधों की अनदेखी करते हुए ईरानी तेल ले जा रहा था। इसी वजह से अमेरिकी विमानों ने जहाज के इंजन रूम को निशाना बनाया।
हमले के बाद हुए धमाके और आग में आदित्य शर्मा समेत तीन भारतीयों की मौत हो गई।
आदित्य के पिता राजेश शर्मा ने बताया कि उनकी बेटे से आखिरी बार रविवार को बात हुई थी। उन्होंने कहा कि आदित्य नवंबर में दुबई से चीन के लिए रवाना हुआ था और बाद में उसने बताया था कि जहाज ओमान की ओर जा रहा है। जब उसने खाड़ी क्षेत्र (Gulf) में प्रवेश करने की बात कही तो उन्हें थोड़ी चिंता हुई थी, लेकिन उन्हें लगा कि कारोबारी जहाजों पर हमला नहीं किया जाता, इसलिए ज्यादा डर नहीं था।
राजेश शर्मा ने कहा कि जो हुआ वह पूरी तरह अप्रत्याशित और गलत था। उन्होंने केंद्र सरकार, विदेश मंत्री एस जयशंकर और सांसद अनुराग ठाकुर से अपील की है कि उनके बेटे का पार्थिव शरीर जल्द भारत लाया जाए ताकि अंतिम संस्कार घर पर किया जा सके।
उन्होंने यह भी बताया कि वह अक्सर जहाज की लोकेशन ट्रैक करते थे। कई बार लोकेशन सही नहीं दिखती थी। आदित्य ने उन्हें बताया था कि कभी-कभी जहाज का ट्रैकिंग सिस्टम बंद कर दिया जाता था।
पिता ने की थी बेटे को खोजने की अपील
हमले की शुरुआती और अफरा-तफरी वाली खबरों में आदित्य के लापता होने की बात कही गई थी, जिसके बाद उनके पिता ने भारत सरकार और विदेश मंत्रालय से मदद की गुहार लगाई।
स्थानीय प्रतिनिधियों से बात करते हुए और विदेश मंत्रालय से संपर्क साधने की कोशिश करते हुए, उनके पिता ने अधिकारियों से अपने बेटे को खोजने के लिए हर संभव कोशिश करने का आग्रह किया। अपनी अपील के समय, परिवार को उम्मीद थी कि आदित्य पानी में कूदकर बच गया होगा या ओमान की नौसेना द्वारा बचाए गए 21 क्रू सदस्यों में शामिल होगा।
इस बीच, Forward Seamen’s Union of India के महासचिव मनोज यादव ने आरोप लगाया कि अमेरिकी नौसेना को पहले से पता था कि जहाज पर भारतीय चालक दल मौजूद है। उनका कहना है कि अगर जहाज ने किसी निर्देश का पालन नहीं किया था, तो उसे रोका या जब्त किया जा सकता था, लेकिन हमला करना सही नहीं था।
भारत के विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि जहाज पर मौजूद 24 भारतीयों में से 21 को सुरक्षित बचा लिया गया है।