Decoding India's Energy Shift: भारत की ऊर्जा रणनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 के पहले 10 महीनों अप्रैल से जनवरी के बीच भारत के कोयला आयात में 4.2% की गिरावट दर्ज की गई है। हैरान करने वाली बात यह है कि यह गिरावट तब आई है जब देश में बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर है। यह कोई इत्तेफाक नहीं, बल्कि भारत की अपनी घरेलू उत्पादन क्षमता को बढ़ाने की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। आइए आपको बताते हैं कोयले का गणित।
कोयले के आयात में भारी कटौती
ताजा आंकड़ों के अनुसार, कोयला आयात में कमी का रुझान लगातार बना हुआ है। अप्रैल से जनवरी के दौरान कुल आयात गिरकर 213.10 मिलियन टन रह गया, जो पिछले साल इसी अवधि में ज्यादा था। सिर्फ जनवरी महीने की बात करें तो आयात में 22.1% की भारी गिरावट आई है। यह पिछले साल के 21.37 MT से घटकर महज 16.64 MT रह गया है। बता दें कि बिजली बनाने में इस्तेमाल होने वाले नॉन-कोकिंग (थर्मल) कोयले के आयात में सबसे ज्यादा कमी आई है।
बिजली की मांग बढ़ने के बावजूद विदेशों से कम कोयला मंगाने के पीछे तीन मुख्य कारण हैं:
घरेलू उत्पादन में रिकॉर्ड बढ़त: भारत ने लगातार दूसरे साल 1 बिलियन टन कोयला उत्पादन का आंकड़ा पार किया है। कोयला मंत्री जी. किशन रेड्डी के अनुसार, सरकार का लक्ष्य 2029-30 तक इसे 1.5 बिलियन टन तक ले जाना है।
बिजली घरों में भारी स्टॉक: घरेलू उत्पादन बढ़ने से देश के पावर प्लांट्स के पास कोयले का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। इस वजह से थर्मल कोयले के आयात की जरूरत कम हो गई है।
महंगा विदेशी कोयला: वैश्विक तनाव और सप्लाई की दिक्कतों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कोयले की कीमतें बढ़ गई हैं, जिससे विदेशों से कोयला मंगाना अब महंगा और घाटे का सौदा साबित हो रहा है।
कोकिंग कोल पर स्टील सेक्टर की बढ़ती निर्भरता
जहां बिजली के लिए कोयला आयात घटा है, वहीं स्टील बनाने में इस्तेमाल होने वाले कोकिंग कोल का आयात बढ़ा है। इसका इंपोर्ट पिछले साल के 45.83 MT से बढ़कर 50.39 MT हो गया है। दरअसल भारत में उच्च गुणवत्ता वाले कोकिंग कोल के भंडार सीमित हैं, इसलिए स्टील इंडस्ट्री को आज भी विदेशों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में कोयले की मांग 2040 तक अपने चरम पर होगी। इसे देखते हुए सरकार की रणनीति स्पष्ट है:
सप्लाई चैन में सुधार: खदानों से पावर प्लांट तक कोयला पहुंचाने की प्रक्रिया को तेज और कुशल बनाया गया है।
अनावश्यक आयात पर रोक: 'विकसित भारत 2047' के विजन के तहत, बिजली क्षेत्र के लिए 'गैर-जरूरी' आयात को पूरी तरह खत्म करने की कोशिश की जा रही है।
ऊर्जा सुरक्षा: वैश्विक बाजारों की अस्थिरता से बचने के लिए भारत अब अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए 'इनवर्ड' यानी देशी उपायों की ओर देख रहा है।