Ram Mandir Donation Scam: अयोध्या स्थित राम मंदिर में दान के पैसों के कथित हेराफेरी की जांच अब और आगे बढ़ गई है। सोमवार को अयोध्या पुलिस की एक टीम नयाघाट स्थित भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की शाखा पहुंची और वहां मंदिर के दान का हिसाब-किताब संभालने वाले बैंक अधिकारियों से पूछताछ की। बता दें कि SBI की इसी शाखा में 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' का मुख्य बैंक खाता है। मंदिर परिसर में भक्तों से मिले दान की गिनती के बाद नकद राशि इसी खाते में जमा की जाती है।
बैंक अधिकारियों से पुलिस ने की पूछताछ
चल रही जांच के दौरान, पुलिस ने बैंक के शाखा प्रबंधक से भी पूछताछ की और उनका बयान दर्ज किया। फिलहाल, पुलिस अब यह जांच कर रही है कि बैंक के अधिकारियों ने दान के पैसे लेने और जमा करने की तय प्रक्रिया (नियमों) का सही से पालन किया या नहीं। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि कहीं किसी तरह की लापरवाही या गड़बड़ी की वजह से पैसे गलत तरीके से इस्तेमाल तो नहीं हुए। वहीं, जांच में SBI के दो कर्मचारियों – रत्नेश और गगनदीप – की भूमिका पर भी खास तौर पर नजर रखी जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, दोनों अधिकारी बैंक के रेगुलर कर्मचारी थे और वे कैश संभालने के काम में लगे छह आउटसोर्स कर्मचारियों की देखरेख करते थे। कथित गबन के मामले में उन छह लोगों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें से सुभाष श्रीवास्तव और राम शंकर यादव (उर्फ टिन्नू) को छोड़कर, गिरफ्तार किए गए बाकी सभी आरोपी आउटसोर्स कर्मचारी थे। उनकी जिम्मेदारी थी कि वे भक्तों से मिले दान को गिनें और कैश को सुरक्षित रूप से SBI ब्रांच में जमा करने के लिए ले जाएं।
बता दें कि बैंक में यह पूछताछ ऐसे समय में हो रही है जब स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) राम मंदिर के उद्घाटन के बाद से अब तक की सबसे संवेदनशील वित्तीय जांचों में से एक की जांच का दायरा बढ़ा रही है। जांचकर्ता न केवल कथित चोरी की जांच कर रहे हैं, बल्कि यह भी देख रहे हैं कि क्या कैश संभालने की प्रक्रिया के कई चरणों में संस्थागत सुरक्षा उपाय विफल रहे।
वहीं, SIT की शुरुआती रिपोर्ट आने के बाद इस मामले ने जोर पकड़ा और आठ आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई। इसके बाद पुलिस ने चोरी, विश्वासघात (धोखाधड़ी), आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत उन सभी आठों को गिरफ्तार कर लिया। बताया जाता है कि आरोपी उस सिस्टम में काम करते थे, जो भक्तों द्वारा दान किए गए कैश और कीमती सामान को संभालने और सुरक्षित रखने का काम करता था।
आरोपियों ने मिटाएं व्हाट्सएप चैट
जांच में अब यह भी सामने आया है कि कुछ आरोपियों ने सबूत मिटाने की कोशिश की थी। जांचकर्ताओं के अनुसार, कुछ लोगों ने अपने मोबाइल फोन से व्हाट्सएप चैट और अन्य डेटा डिलीट कर दिए, जबकि कुछ ने गिरफ्तारी से पहले अपने फोन पूरी तरह फॉर्मेट कर दिए। हालांकि, पुलिस ने जब्त किए गए मोबाइल फोन को फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है, ताकि डिलीट की गई जानकारी को वापस निकाला जा सके। इससे आरोपियों के बीच हुई बातचीत और कथित साजिश का पता चल सकता है।
इसके अलावा, पुलिस ने आरोपियों से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी भी की है, ताकि पैसे के लेन-देन का पता लगाया जा सके और जरूरी दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस व अन्य सबूत बरामद किए जा सकें।
अब जब बैंक अधिकारियों से भी पूछताछ हो रही है और जांच का दायरा बढ़ रहा है, तो जांच का फोकस इस बात पर है कि क्या निगरानी में चूक या मिलीभगत के कारण दान के पैसे ट्रस्ट के खाते तक पहुंचने से पहले ही गलत तरीके से निकाले गए।