न्यूजीलैंड की कीवी होगी सस्ती? FTA के बाद भारत में घटेगी कीमत, जानें कितना मिलेगा फायदा

न्यूजीलैंड से भारत आने वाला कीवीफ्रूट भारत-न्यूजीलैंड फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के तहत सस्ता हो सकता है। हालांकि, शुरुआत में इसकी कीमत में ज्यादा कमी आने की संभावना नहीं है, क्योंकि कीवीफ्रूट का आयात एक तय कोटे और न्यूनतम आयात कीमत के नियम के तहत किया जाएगा।

अपडेटेड Sep 21, 2026 पर 9:35 PM
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न्यूजीलैंड की कीवी होगी सस्ती? FTA के बाद भारत में घटेगी कीमत

न्यूजीलैंड से भारत आने वाला कीवीफ्रूट भारत-न्यूजीलैंड फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के तहत सस्ता हो सकता है। हालांकि, शुरुआत में इसकी कीमत में ज्यादा कमी आने की संभावना नहीं है, क्योंकि कीवीफ्रूट का आयात एक तय कोटे और न्यूनतम आयात कीमत के नियम के तहत किया जाएगा।

बता दें कि भारत और न्यूजीलैंड ने अप्रैल 2026 में FTA पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते के तहत, भारत ने न्यूजीलैंड को कीवीफ्रूट, सेब और मानुका शहद जैसे चुनिंदा उत्पादों के लिए विशेष पहुंच दी है। इस व्यवस्था का मकसद आयात की बाधाओं को कम करना है, साथ ही कोटा, मौसमी नियंत्रण और न्यूनतम आयात मूल्य के जरिए भारतीय किसानों के हितों की रक्षा करना भी है।

वहीं, दोनों देशों की घरेलू प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद इस समझौते के लागू होने की उम्मीद है। न्यूजीलैंड की संसद ने सितंबर में इस समझौते को लागू करने के लिए जरूरी कानून को मंजूरी दे दी थी और उम्मीद है कि यह समझौता अक्टूबर के दूसरे हिस्से में लागू हो जाएगा।


न्यूजीलैंड की कीवी और कितनी सस्ती हो सकती हैं?

अभी भारत कीवी फल के इंपोर्ट पर 33% कस्टम ड्यूटी लगाता है। FTA के तहत, न्यूजीलैंड को पहले साल में 6,250 टन का ड्यूटी-फ्री कोटा मिलेगा। न्यूजीलैंड के समझौते के आधिकारिक विश्लेषण के अनुसार, यह कोटा धीरे-धीरे बढ़कर छठे साल तक 15,000 टन हो जाएगा।

इस कोटे के अंदर होने वाले इंपोर्ट पर कोई ड्यूटी नहीं लगेगी, बशर्ते इंपोर्ट की कीमत कम से कम 1.80 अमेरिकी डॉलर प्रति किलोग्राम हो। न्यूजीलैंड सरकार के दस्तावेज के अनुसार, कोटे से बाहर के शिपमेंट पर तुरंत 50% टैरिफ में कटौती होगी, जिससे प्रभावी ड्यूटी लगभग 33% से घटकर 16.5% हो जाएगी।

इसका सीधा फायदा यह होगा कि पात्र खेप के भारत पहुंचने की लागत में लगने वाली ड्यूटी काफी कम हो सकती है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि बाजार में कीवी की कीमत भी उतने ही प्रतिशत कम हो जाएगी।

कीवी की अंतिम कीमत तय होने में कई दूसरे खर्च भी शामिल होते हैं। इनमें फ्रेट, इंश्योरेंस, पोर्ट हैंडलिंग, कोल्ड स्टोरेज, खराब होने से होने वाला नुकसान, रुपये और डॉलर की कीमत में बदलाव, इंपोर्टर का मार्जिन, थोक विक्रेताओं का कमीशन, रिटेलर का मार्जिन और घरेलू टैक्स शामिल हैं। इसलिए कस्टम ड्यूटी घटने के बावजूद ग्राहकों को मिलने वाली कीमत में कमी इससे कम हो सकती है।

कम से कम आयात कीमत यह भी तय करती है कि घोषित आयात मूल्य कितना कम हो सकता है। इसका मकसद बहुत कम कीमत वाले आयात को घरेलू उत्पादकों पर ज्यादा दबाव डालने से रोकना है।

शुरुआती कोटा, न्यूजीलैंड से भारत के हालिया आयात से ज्यादा है। ट्रिज (Tridge) के ट्रेड डेटा से पता चलता है कि भारत ने 2024 में न्यूजीलैंड से लगभग 5.84 मिलियन किलोग्राम कीवी फल का आयात किया, जिसकी कीमत लगभग 16.74 मिलियन अमेरिकी डॉलर थी।

न्यूजीलैंड के कीवी फल उद्योग ने इस समझौते का स्वागत किया है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, न्यूजीलैंड सरकार का अनुमान है कि यह सेक्टर 5 वर्षों में टैरिफ के तौर पर लगभग 125 मिलियन न्यूजीलैंड डॉलर बचा सकता है।

भारत को कीवी कहां से मिलती है?

भारत का कीवी फल मार्केट काफी हद तक आयात पर निर्भर है। Tridge के ट्रेड डेटाबेस के अनुसार, 2024 में भारत ने लगभग 60.51 मिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य के करीब 49.14 मिलियन किलोग्राम ताजे कीवी फल का आयात किया।

प्रमुख सप्लायर ये थे:

देश 2024 में आयात की मात्रा 2024 में आयात की कीमत
चिली 1.307 करोड़ किलोग्राम 2.406 करोड़ अमेरिकी डॉलर
न्यूजीलैंड 58.4 लाख किलोग्राम 1.674 करोड़ अमेरिकी डॉलर
ईरान 2.385 करोड़ किलोग्राम 1.291 करोड़ अमेरिकी डॉलर
ग्रीस 51 लाख किलोग्राम 51.9 लाख अमेरिकी डॉलर
इटली 11.3 लाख किलोग्राम 14.7 लाख अमेरिकी डॉलर

आंकड़े बताते हैं कि ईरान ने सबसे ज्यादा मात्रा में सप्लाई की, जबकि प्रमुख सप्लायरों में न्यूजीलैंड ने प्रति किलोग्राम सबसे ज्यादा कीमत दर्ज की। भारतीय सुपरमार्केट और ऑनलाइन ग्रॉसरी मार्केट में प्रीमियम इम्पोर्टेड कीवीफ्रूट के लिए चिली और न्यूजीलैंड भी महत्वपूर्ण स्रोत हैं।

भारत में इम्पोर्ट की मांग काफी बनी हुई है। ट्रिज (Tridge) के आंकड़ों के अनुसार, 2023 में लगभग 49.17 मिलियन किलोग्राम और 2022 में 45.94 मिलियन किलोग्राम का इम्पोर्ट हुआ।

क्या भारत में कीवी फल उगाया जाता है?

हां, भारत में कीवी फल की खेती होती है, हालांकि इसकी घरेलू पैदावार मांग के मुकाबले बहुत कम है।

नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड के अनुसार, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, सिक्किम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और केरल के कुछ हिस्सों के पहाड़ी इलाकों में कीवी फल की खेती की जाती है।

अरुणाचल प्रदेश को भारत का सबसे बड़ा कीवी फल उत्पादक राज्य माना जाता है। ICAR की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस राज्य में लगभग 3,558 हेक्टेयर जमीन पर इसकी खेती होती है और सालाना पैदावार करीब 7,111 टन है। इस रिपोर्ट में मणिपुर, सिक्किम, नागालैंड, मिजोरम और हिमाचल प्रदेश को भी अन्य उत्पादक क्षेत्रों के तौर पर बताया गया है।

उत्तराखंड और हिमालय के अन्य इलाकों में भी कीवी फल की खेती बढ़ी है। इस फसल के लिए ठंडी जलवायु की जरूरत होती है, और इसका कमर्शियल उत्पादन देश के मैदानी इलाकों के बजाय पहाड़ी और पूर्वोत्तर क्षेत्रों में ज्यादा होता है।

हालांकि, घरेलू उत्पादन अभी भी जरूरत के हिसाब से कम है। हिमालयी बागवानी पर हुई एक रिसर्च में बताया गया है कि भारत अपनी ताजी कीवी की जरूरत का सिर्फ एक-चौथाई हिस्सा ही पैदा करता है, यानी लगभग 75% मांग आयात से पूरी करनी पड़ती है।

इसी अंतर की वजह से कम कीमत वाले आयात का शहरी बाजारों पर साफ असर दिख सकता है, साथ ही इससे घरेलू उत्पादकों में चिंता भी पैदा होती है। FTA इसी चिंता को दूर करने की कोशिश करता है। इसके लिए आयात की सुविधा को कृषि उत्पादकता कार्यक्रमों, तकनीकी सहयोग, बाग के प्रबंधन में मदद और फसल कटाई के बाद बेहतर तरीकों से जोड़ा गया है।

FTA का ग्राहकों पर क्या होगा असर?

न्यूजीलैंड से आने वाला कीवीफ्रूट रातोंरात बहुत सस्ता होने की उम्मीद नहीं है। इसकी बड़ी वजह यह है कि शुरुआत में सिर्फ 6,250 टन कीवीफ्रूट को ड्यूटी-फ्री कोटा मिलेगा। भारत के कुल सालाना आयात के मुकाबले यह मात्रा काफी कम है। 2024 में भारत ने करीब 49,000 टन कीवीफ्रूट आयात किया था।

फिर भी, इसका असर तीन तरह से महत्वपूर्ण हो सकता है:

हालांकि, इस FTA का असर तीन तरह से देखने को मिल सकता है।

पहला, कोटे के तहत बिना इंपोर्ट ड्यूटी के आने वाला न्यूजीलैंड का कीवीफ्रूट उन देशों से आने वाले फलों के मुकाबले ज्यादा प्रतिस्पर्धी हो सकता है, जिन्हें ऐसी टैरिफ छूट नहीं मिलती।

दूसरा, इंपोर्टर्स को ड्यूटी में होने वाली बचत का कुछ हिस्सा रिटेलर्स और ग्राहकों तक पहुंचाने का मौका मिलेगा। खासकर ऐसे समय में जब बाजार में कीवीफ्रूट की सप्लाई अच्छी होगी, तब ग्राहकों को इसका फायदा कीमतों में देखने को मिल सकता है।

छठे साल तक कोटा बढ़कर 15,000 टन हो जाएगा, जिससे जीरो-ड्यूटी पर आने वाले सामान की मात्रा बढ़ जाएगी।

रिटेल में असल कमी इस बात पर निर्भर करेगी कि टैरिफ से हुई बचत का कितना हिस्सा सप्लाई चेन में आगे बढ़ाया जाता है। जीरो कस्टम ड्यूटी का मतलब जीरो इंपोर्ट कॉस्ट नहीं है, और ट्रांसपोर्टेशन, रेफ्रिजरेशन और खराब होने से जुड़े खर्चों की वजह से छोटे शहरों में कीमतें ज्यादा बनी रह सकती हैं।

कीवी फल को सेहत के लिए अच्छा क्यों माना जाता है?

कीवी फल में खास तौर पर विटामिन C भरपूर मात्रा में होता है। हार्वर्ड हेल्थ के अनुसार, एक कीवी फल से किसी वयस्क की रोजाना की विटामिन C की जरूरत का लगभग 80% हिस्सा मिल जाता है। साथ ही, यह फाइबर, पोटैशियम और विटामिन K का भी अच्छा स्रोत है।

US नेशनल इंस्टिट्यूट्स ऑफ हेल्थ की एक साइंटिफिक समीक्षा में कीवी फल को पोषक तत्वों से भरपूर बताया गया है, जिसमें विटामिन C, डाइटरी फाइबर, पोटैशियम, विटामिन E और फोलेट होते हैं। इसमें नियमित रूप से कीवी खाने से पाचन, इम्यून सिस्टम और मेटाबॉलिक हेल्थ को संभावित फायदे होने की बात कही गई है, साथ ही यह भी कहा गया है कि इन फायदों को एक संतुलित आहार के हिस्से के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

इस वजह से कीवी फल भारतीय ग्राहकों को न सिर्फ एक प्रीमियम इंपोर्टेड फल के तौर पर, बल्कि विटामिन C और फाइबर के आसान स्रोत के तौर पर भी पसंद आ सकता है। इसके हेल्थ बेनिफिट्स, सुपरमार्केट में बढ़ती उपलब्धता और शहरों में बढ़ती मांग ने कीवीफ्रूट को भारत में इंपोर्ट किए जाने वाले फलों में शामिल कर दिया है।

ग्राहकों के लिए FTA का सबसे बड़ा और तुरंत दिखने वाला फायदा यह नहीं है कि हर कीवी सस्ता हो जाएगा। असली फायदा यह हो सकता है कि न्यूजीलैंड से ज्यादा मात्रा में कीवीफ्रूट कम टैरिफ रेट पर भारत आ सके।

हालांकि, बाजार में इसकी कीमत वास्तव में कितनी कम होगी, यह कई चीजों पर निर्भर करेगा। इनमें ड्यूटी-फ्री कोटे का कितना इस्तेमाल होता है, बाजार में कीवीफ्रूट की सप्लाई कैसी रहती है और इंपोर्टर्स व रिटेलर्स ड्यूटी में हुई बचत का कितना हिस्सा अपने पास रखते हैं, ये सभी बातें शामिल हैं।

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