General Upendra Dwivedi: नई दिल्ली में आयोजित 'रायसीना डायलॉग 2026' के दौरान भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने 'ऑपरेशन सिंदूर' की सफलता और उससे मिली सीख पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि आधुनिक युद्ध केवल हथियारों से नहीं, बल्कि सही तकनीक और 'युद्ध लड़ने की इच्छाशक्ति' से जीते जाते हैं।
ऑपरेशन सिंदूर से मिले 3 बड़े मंत्र
जनरल द्विवेदी ने कहा कि किसी भी देश को डराने के लिए तीन चीजें जरूरी हैं, जिन्हें भारत ने इस ऑपरेशन में पहली बार एक साथ लागू किया:
विश्वसनीयता: दुनिया को यह जताना कि हम जो कहते हैं, वो करते हैं।
क्षमता: दुश्मन को धूल चटाने की सैन्य ताकत।
इच्छाशक्ति: युद्ध लड़ने और कड़े फैसले लेने का साहस।
उन्होंने साफ लहजे में कहा, 'यह अब एक 'न्यू नॉर्मल' है। अगर कोई आतंकी कार्रवाई होती है, तो हमारी नीति साफ है हम अपनी शर्तों पर और अपने समय के हिसाब से जवाबी कार्रवाई करेंगे।'
भविष्य की जंग के लिए सेना का नया अवतार
सेना प्रमुख ने बताया कि भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए भारतीय सेना में बड़े संगठनात्मक बदलाव किए जा रहे हैं। अब हर कमांडर को तकनीक का विशेषज्ञ बनना होगा। तकनीक अब जीवन का हिस्सा है, इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पुरानी व्यवस्था तेजी से नहीं बदल सकती, इसलिए नई यूनिट्स बनाई गई हैं:
'शक्तिमान': एक समर्पित ड्रोन रेजिमेंट।
'रुद्र': एक कंबाइंड आर्म्स ब्रिगेड।
'भैरव': लाइट कमांडो बटालियन।
सिस्टम ऑफ सिस्टम्स: केवल एक हथियार या प्लेटफॉर्म काफी नहीं है, बल्कि सभी सिस्टम्स (AI, साइबर, ड्रोन) को एक साथ मिलकर काम करना होगा।
तालमेल और सुधार की है जरूरत
जनरल द्विवेदी ने एक महत्वपूर्ण सबक साझा किया कि अगली बार जब ऐसी कोई स्थिति आए, तो सेना को न केवल जल-थल-नभ के साथ, बल्कि खुफिया एजेंसियों और लॉजिस्टिक विभागों के साथ भी और बेहतर तालमेल बिठाना होगा। उन्होंने कहा कि सैन्य उपकरणों का बदलाव लंबा समय लेता है, इसलिए फिलहाल संगठनों के ढांचे को बदलने पर जोर दिया जा रहा है।
रायसीना डायलॉग 2026: दुनिया की नजरें भारत पर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने 5 मार्च को रायसीना डायलॉग 2026 का उद्घाटन किया था। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इसे सफल बताते हुए कहा कि आज की अशांत दुनिया में भारत तर्क और उम्मीद की एक मजबूत आवाज बनकर उभरा है। ऑस्ट्रेलिया के उच्चायुक्त फिलिप ग्रीन ने भी इस कार्यक्रम की सराहना की और इसे भू-राजनीति पर चर्चा का एक बेहतरीन मंच बताया।