दुनिया के मशहूर शेफ गॉर्डन रामसे को भाया झारखंड की 'लाल चींटी की चटनी' का स्वाद, यहां के 5 और अनोखे ट्राइबल व्यंजन को जानिए

टेलीविजन के बड़े-बड़े फूड शोज अक्सर आलीशान होटलों, फैंसी डाइनिंग रूम और मशहूर शेफ द्वारा विदेशी स्वादों की तलाश के इर्द-गिर्द घूमते रहे हैं। लेकिन आज झारखंड के जंगलों से निकली एक साधारण सी आदिवासी चटनी पूरी दुनिया में सुर्खियां बटोर रही है।

अपडेटेड Jun 19, 2026 पर 8:01 AM
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मशहूर शेफ गॉर्डन रामसे भी हुए झारखंड की लाल चींटी चटनी के दीवाने

टेलीविजन के बड़े-बड़े फूड शोज अक्सर आलीशान होटलों, फैंसी डाइनिंग रूम और मशहूर शेफ द्वारा विदेशी स्वादों की तलाश के इर्द-गिर्द घूमते रहे हैं। लेकिन आज झारखंड के जंगलों से निकली एक साधारण सी आदिवासी चटनी पूरी दुनिया में सुर्खियां बटोर रही है। असल में ये मामला झारखंड पर्यटन विभाग के एक इंस्टाग्राम रील से वायरल हुआ। इस रील के बाद इस अनोखे आदिवासी भोजन को लेकर वैश्विक स्तर पर उत्सुकता बढ़ा दी है। इस रील में दुनिया के सबसे मशहूर सेलिब्रिटी शेफ गॉर्डन रामसे को झारखंड की इस तीखी और खास 'लाल चींटी की चटनी' का स्वाद चखते और उसकी तारीफ करते हुए देखा जा सकता है।

गॉर्डन रामसे ने बताया स्वादिष्ट और यादगार

इसी महीने की शुरुआत में झारखंड पर्यटन ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर एक रील साझा की थी। पर्यटन विभाग ने इस डिश की खासियत को बयां करते हुए लिखा कि लाल बुनकर चींटियों से बनी और पीढ़ियों से आदिवासी समुदायों द्वारा पसंद की जाने वाली यह तीखी-चटपटी चटनी कमजोर दिल वालों के लिए नहीं है। असल में गॉर्डन का ये कहना कोई अतिश्योक्ति नहीं है। झारखंड, ओडिशा और पड़ोसी वन क्षेत्रों के आदिवासी समुदायों के लिए लाल चींटी की चटनी कोई नई या हैरान करने वाली चीज नहीं है बल्कि यह उनकी दैनिक जीवनशैली, पारिवारिक परंपराओं और स्वदेशी ज्ञान का एक अहम हिस्सा है। स्थानीय स्तर पर इसे अलग-अलग नामों से जाना जाता है। यह चटनी अपने तीखे, खट्टे और हल्के साइट्रस (नींबू जैसे) स्वाद के लिए काफी मशहूर है। फूड इतिहासकारों के मुताबिक इस चटनी का तीखा और तीक्ष्ण स्वाद प्राकृतिक रूप से चींटियों में मौजूद फॉर्मिक एसिड के कारण आता है।


मशहूर शेफ गॉर्डन रामसे ने खुद इस अनूठी रेसिपी की सराहना की है और इसके स्वाद को स्वादिष्ट और यादगार बताया है। उनके इस जुड़ाव ने उस रेसिपी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में मदद की है।

झारखंड के 5 और अनोखे ट्राइबल व्यंजन

लाल चींटी की चटनी के अलावा झारखंड के जंगलों और पारंपरिक रसोइयों में कई ऐसे अनोखे आदिवासी व्यंजन मौजूद हैं, जो स्वाद के शौकीनों को जरूर आजमाने चाहिए:

1. धुस्का

यह झारखंड का सबसे प्रसिद्ध पारंपरिक स्नैक (नाश्ता) है। धुस्का को भीगे हुए चावल और दालों को पीसकर बनाए गए बैटर (घोल) से तैयार किया जाता है और फिर इसे सुनहरा होने तक डीप-फ्राई किया जाता है। बाहर से क्रिस्पी और अंदर से बेहद सॉफ्ट होने वाले इस व्यंजन को आमतौर पर तीखे आलू की सब्जी या चटनी के साथ परोसा जाता है। झारखंड के किसी भी स्थानीय बाजार से गुजरते समय इसकी खुशबू को नजरअंदाज करना नामुमकिन है। मशहूर शेफ सारांश गोइला ने भी एक बार इंस्टाग्राम पर इस डिश को साझा किया था।

2. रुगड़ा करी

इसे अक्सर झारखंड का फॉरेस्ट मशरूम खजाना कहा जाता है। रुगड़ा मुख्य रूप से मानसून के मौसम में उगने वाले जंगली खाद्य मशरूम हैं। इन्हें स्थानीय मसालों और सरसों के तेल के साथ पकाया जाता है। कई फूड लवर्स इसे राज्य के सबसे कीमती और दुर्लभ आदिवासी व्यंजनों में से एक मानते हैं।

3. हांडिया मुर्गा

हांडिया, चावल से तैयार होने वाला एक पारंपरिक फर्मेंटेड ड्रिंक है, जो लंबे समय से आदिवासी उत्सवों के केंद्र में रहा है। इसकी एक बेहद लोकप्रिय रेसिपी है'हांडिया मुर्गा'। इसमें चिकन को इस फर्मेंटेड राइस ब्रू (हांडिया) के साथ धीमी आंच पर पकाया जाता है। इससे चिकन में एक अनोखा स्मोकी और हल्का खट्टा स्वाद आ जाता है, जिसे स्थानीय लोग त्योहारों और सामुदायिक दावतों का मुख्य हिस्सा मानते हैं।

4. चिलका रोटी

बनाने में बेहद साधारण लेकिन स्वाद में लाजवाब, चिलका रोटी को चावल के आटे और चने के आटे (बेसन) का उपयोग करके तैयार किया जाता है। पारंपरिक रूप से इसे त्योहारों और पारिवारिक समारोहों के दौरान बनाया जाता है। इसे आमतौर पर मटन करी, चने की चटनी या मौसमी सब्जियों के साथ परोसा जाता है।

5. बैम्बू शूट करी

झारखंड के आदिवासी क्षेत्रों में ताजे बांस के कोपलों का बड़े पैमाने पर सेवन किया जाता है। इन बांस के कोपलों को पहले उबाला जाता है, फिर मसालेदार बनाकर करी के रूप में पकाया जाता है। कई बार इसे अन्य सब्जियों और मीट के साथ मिलाकर भी तैयार किया जाता है। जंगलों की जड़ों से जुड़े इस व्यंजन का स्वाद हल्का मीठा और सोंधा होता है।

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