योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला! 18 शहरों में चलेंगी 1725 नई AC इलेक्ट्रिक बसें, 5 जिलों में बनेंगे नए जेल

Uttar Pradesh Cabinet Meeting: बुधवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में कुल 24 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। जिसमें सार्वजनिक परिवहन, शहरी विकास और औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने वाले कई अहम फैसले शामिल हैं।

अपडेटेड Jun 04, 2026 पर 2:05 PM
यूपी में सफर होगा आसान! 1725 इलेक्ट्रिक बसों को कैबिनेट की मंजूरी

UP Cabinet Meeting: बुधवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में कुल 24 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। जिसमें प्रदेश के बड़े शहरों में नई ई-बसों  के संचालन की अनुमति शामिल है। नगर विकास मंत्री एके शर्मा ने कैबिनेट बैठक के बाद बताया कि प्रदेश के 17 नगर निगमों और नोएडा सहित कुल 18 बड़े शहरों में GCC (ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट) मॉडल पर 1,725 नई इलेक्ट्रिक बसों के संचालन को मंजूरी दी गई है। उन्होने कहा कि सरकार का मानना है कि इससे नगरीय परिवहन व्यवस्था अधिक आधुनिक, सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल बनेगी।

इसके अलावा, मंत्रिमंडल ने मुरादाबाद, ललितपुर, औरैया, कानपुर नगर और भदोही जिलों में पांच नई जेलों के निर्माण के प्रस्तावों को भी मंजूरी दी, साथ ही 2025-26 के लिए मक्का खरीद नीति को भी पारित किया।

18 शहरों में चलेंगी 1725 AC इलेक्ट्रिक बसें


इस योजना के तहत आगरा, अलीगढ़, अयोध्या, बरेली, फिरोजाबाद, गाजियाबाद, गोरखपुर, झांसी, कानपुर, लखनऊ, मथुरा-वृंदावन, मेरठ, मुरादाबाद, प्रयागराज, शाहजहांपुर, सहारनपुर, वाराणसी और नोएडा-जेवर समेत 18 प्रमुख शहरों में 9 मीटर और 12 मीटर श्रेणी की कुल 1,725 वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसें सड़कों पर उतारी जाएंगी।

इन बसों का संचालन ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट (GCC) मॉडल के तहत निजी ऑपरेटरों द्वारा किया जाएगा। वाणिज्यिक संचालन शुरू होने के बाद इनका अनुबंध 12 वर्षों के लिए होगा।

सरकार का कहना है कि नई ई-बसों के शुरू होने से शहरों में सफर पहले से ज्यादा आरामदायक, सुरक्षित और समयबद्ध होगा। साथ ही, लोगों को बेहतर सार्वजनिक परिवहन सुविधा मिलेगी और पर्यावरण को भी फायदा पहुंचेगा। इससे शहरी परिवहन व्यवस्था की गुणवत्ता में बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है।

निजी ऑपरेटर संभालेंगे पूरी जिम्मेदारी

GCC मॉडल के तहत बसों की खरीद, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थापना, ड्राइवर और तकनीकी स्टाफ की व्यवस्था, संचालन तथा अनुरक्षण की जिम्मेदारी निजी ऑपरेटरों की होगी। राज्य सरकार के निर्धारित मानकों के अनुसार, चयनित ऑपरेटर को प्रत्येक 9 मीटर की बस के लिए 35 लाख रुपये और 12 मीटर की प्रत्येक बस के लिए 40 लाख रुपये की सब्सिडी दी जाएगी। इस प्रकार, राज्य सरकार पर कुल बोझ केवल 653 करोड़ रुपये का होगा।

इसके अलावा, यात्रियों से मिलने वाले किराए और बस संचालन की लागत के बीच कोई अंतर रहता है, तो उस कमी को राज्य सरकार वायबिलिटी गैप फंडिंग (Viability Gap Funding) के जरिए पूरा करेगी।

नए शहरों का होगा विस्तारीकरण

कैबिनेट ने मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण/नए शहर प्रोत्साहन योजना के तहत आगरा, बरेली और प्रयागराज में नए शहरों के विकास के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है।

सरकार का उद्देश्य तेजी से बढ़ रही शहरी आबादी के लिए बेहतर आवास, आधुनिक बुनियादी सुविधाएं और सुनियोजित शहरी विकास सुनिश्चित करना है। माना जा रहा है कि इस पहल से इन शहरों पर बढ़ते जनसंख्या दबाव को कम करने में मदद मिलेगी और लोगों को बेहतर जीवन सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।

इन शहरों में जेलों का होगा निर्माण

बैठक के बाद जेल मंत्री दारा सिंह चौहान ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल से राज्य की जेलों में भीड़भाड़ कम हुई है।

उन्होंने कहा कि राज्य की 77 जेलों में से 40 में अब भीड़भाड़ नहीं है, जबकि शेष जेलों में भी भीड़ काफी हद तक कम हो गई है।

चौहान ने बताया कि मुरादाबाद में 2,000 कैदियों की क्षमता वाली नई जेल का निर्माण 386.91 करोड़ रुपये की लागत से किया जाएगा। ललितपुर (552 कैदी, 225.06 करोड़ रुपये), औरैया (1,056 कैदी, 264.96 करोड़ रुपये), कानपुर नगर (2,020 कैदी, 384.05 करोड़ रुपये) और भदोही (574 कैदी, 209.18 करोड़ रुपये) में भी नई जेलों का निर्माण किया जाएगा।

मक्का की MSP बढ़ी 

खाद्य, रसद और नागरिक आपूर्ति मंत्री मनोज पांडे ने कहा कि मक्का की खरीद के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य 2225 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 2400 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है और चुनिंदा जिलों में 15 जून से 31 जुलाई, 2026 के बीच खरीद की जाएगी।

सेमीकंडक्टर नीति-2024 में भी बड़ा बदलाव

कैबिनेट की बैठक में सीएम योगी ने उत्तर प्रदेश की सेमीकंडक्टर नीति-2024 में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। सरकार का कहना है कि बदलते औद्योगिक माहौल और निवेशकों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए यह बदलाव जरूरी था।

बता दें कि यह नीति 19 जनवरी 2024 को लागू की गई थी और पांच साल तक प्रभावी रहेगी। वहीं, संशोधनों के बाद इसे निवेश के लिए और अनुकूल बनाने की कोशिश की गई है।

फिलहाल सरकार को उम्मीद है कि इस बदलाव से राज्य में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में बड़े पैमाने पर निवेश आएगा। खास बात यह है कि इन संशोधनों से राज्य सरकार पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा।

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