UPSC Success Story: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा में सफलता दर्ज कर सीएपीएफ में असिस्टेंट कमांडेंट के पद पर कार्यरत घनश्याम जायसवाल के लिए यह सफर तगड़ी चुनौतियों से भरा रहा है। उनकी चुनौतियों में सबसे बड़ी समस्या थी आर्थिक तंगी की। सात भाई-बहनों में तीसरे नंबर के घनश्याम ने अपनी आर्थिक स्थिति को इरादे कमजोर करने का मौका नहीं दिया। उनकी सफलता की कहानी साफ बताती है कि ‘मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है।’ घनश्याम ने यूपीएससी में 81 ऑल इंडिया रैंक हासिल की।
चाय-नाश्ते का ठेला लगाने वाले के बेटे ने छुआ आसमान
बिहार के मुजफ्फरपुर के बैरिया के रहने वाले घनश्याम जायसवाल ने अपनी लगन और हिम्मत से यह दिखाया है। उनके पिता शत्रुधन शाह बैरिया बस स्टैंड पर एक ठेले पर चाय और नाश्ते का स्टॉल लगाते हैं, जबकि उनकी मां गीता देवी होममेकर हैं। परिवार की जिम्मेदारियों और पैसे की तंगी के बावजूद, वह अपनी पढ़ाई के प्रति पक्के रहे और सिविल सर्विसेज की तैयारी करते रहे। सात भाई-बहनों में तीसरे नंबर के घनश्याम ने यूपीएससी की परीक्षा पास की और असिस्टेंट कमांडेंट बन गए।
पैसों की तंगी ने पूरा नहीं करने दिया आईआईटी का सपना
घनश्याम ने अपनी शुरुआती पढ़ाई मुजफ्फरपुर के बैरिया के नथुनी भगत विद्यालय से कक्षा 10 तक पढ़ाई पूरी की। फिर उन्होंने मुजफ्फरपुर के रामेश्वर सिंह कॉलेज से साइंस में कक्षा 12 की पढ़ाई पूरी की। बाद में, उन्होंने पॉलिटिकल साइंस में ऑनर्स बैचलर डिग्री हासिल की। ग्रेजुएशन के दौरान ही उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी थी। बचपन में, घनश्याम का सपना था कि वह आईआईटी में पढ़कर इंजीनियर बनें। हालांकि, वह सपना पूरा नहीं हो सका। बाद में उन्होंने दिशा बदली और प्रशासनिक सेवा की तैयारी करने का फैसला किया।
कोविड 19 महामारी के बाद, घनश्याम ने कक्षा 12 तक के बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना भी शुरू कर दिया। पढ़ाने से उन्हें पैसे की मदद मिली, जबकि उन्होंने अपनी पढ़ाई और प्रशासनिक सेवा की तैयारी जारी रखी। साथ ही, ट्यूशन ने उन्हें अलग-अलग विषयों की अपनी समझ को दोहराने और मजबूत करने का मौका दिया। घनश्याम जायसवाल का सफर उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो कम संसाधनों की वजह से बड़े सपने देखने से हिचकिचाते हैं।
यूपीएससी के 6 प्रयास में हाथ आई निराशा
उनका यूपीएससी का सफर आसान नहीं था। घनश्याम को आखिरकार सफलता पाने से पहले बार-बार मुश्किलों और नाकामियों का सामना करना पड़ा। उनका कहना है कि वह 10 से ज्यादा अलग-अलग परीक्षाओं में असफल हुए और छह बार यूपीएससी परीक्षा में भी निराशा हाथ लगी। हालांकि, उन्होंने हार नहीं मानी और अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहे।
5 साल के लंबे संघर्ष के बाद मिली कामयाबी
पांच साल के लगातार संघर्ष, कड़ी मेहनत और लगन के बाद आखिर कामयाबी ने घनश्याम के सिर ताज सजाया। बार-बार नाकामियों का सामना करने के बावजूद घनश्याम ने अपने इरादों को कमजोर पड़ने नहीं दिया। अपनी कोशिशों पर उन्होंने तब तक भरोसा हिलने नहीं दिया जब तक अपनी मंजिल नहीं हासिल कर ली।