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UPSC Success Story: मजबूत इरादों को नहीं तोड़ पाई 10 परीक्षाओं और 6 यूपीएससी प्रयासों की असफलता, जानें एक चायवाले का बेटा कैसे बना असिस्टेंट कमांडेंट

UPSC Success Story: यूपीएससी की परीक्षा पास कर असिस्टेंट कमांडेंट बने घनश्याम जायसवाल ने इस उपलब्धि से पहले 10 परीक्षाओं में असफलता देखी। यूपीएससी के 6 प्रयासों में भी उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और असिस्टेंट कमांडेंट बनकर निकले

MoneyControl Newsअपडेटेड Aug 11, 2026 पर 2:07 PM
UPSC Success Story: मजबूत इरादों को नहीं तोड़ पाई 10 परीक्षाओं और 6 यूपीएससी प्रयासों की असफलता, जानें एक चायवाले का बेटा कैसे बना असिस्टेंट कमांडेंट
उन्होंने मुजफ्फरपुर के रामेश्वर सिंह कॉलेज से साइंस में कक्षा 12 की पढ़ाई पूरी की।

UPSC Success Story: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा में सफलता दर्ज कर सीएपीएफ में असिस्टेंट कमांडेंट के पद पर कार्यरत घनश्याम जायसवाल के लिए यह सफर तगड़ी चुनौतियों से भरा रहा है। उनकी चुनौतियों में सबसे बड़ी समस्या थी आर्थिक तंगी की। सात भाई-बहनों में तीसरे नंबर के घनश्याम ने अपनी आर्थिक स्थिति को इरादे कमजोर करने का मौका नहीं दिया। उनकी सफलता की कहानी साफ बताती है कि ‘मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है।’ घनश्याम ने यूपीएससी में 81 ऑल इंडिया रैंक हासिल की।

चाय-नाश्ते का ठेला लगाने वाले के बेटे ने छुआ आसमान

बिहार के मुजफ्फरपुर के बैरिया के रहने वाले घनश्याम जायसवाल ने अपनी लगन और हिम्मत से यह दिखाया है। उनके पिता शत्रुधन शाह बैरिया बस स्टैंड पर एक ठेले पर चाय और नाश्ते का स्टॉल लगाते हैं, जबकि उनकी मां गीता देवी होममेकर हैं। परिवार की जिम्मेदारियों और पैसे की तंगी के बावजूद, वह अपनी पढ़ाई के प्रति पक्के रहे और सिविल सर्विसेज की तैयारी करते रहे। सात भाई-बहनों में तीसरे नंबर के घनश्याम ने यूपीएससी की परीक्षा पास की और असिस्टेंट कमांडेंट बन गए।

पैसों की तंगी ने पूरा नहीं करने दिया आईआईटी का सपना 

घनश्याम ने अपनी शुरुआती पढ़ाई मुजफ्फरपुर के बैरिया के नथुनी भगत विद्यालय से कक्षा 10 तक पढ़ाई पूरी की। फिर उन्होंने मुजफ्फरपुर के रामेश्वर सिंह कॉलेज से साइंस में कक्षा 12 की पढ़ाई पूरी की। बाद में, उन्होंने पॉलिटिकल साइंस में ऑनर्स बैचलर डिग्री हासिल की। ग्रेजुएशन के दौरान ही उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी थी। बचपन में, घनश्याम का सपना था कि वह आईआईटी में पढ़कर इंजीनियर बनें। हालांकि, वह सपना पूरा नहीं हो सका। बाद में उन्होंने दिशा बदली और प्रशासनिक सेवा की तैयारी करने का फैसला किया।

ट्यूशन से निकाला यूपीएससी की तैयारी का खर्च

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