पीली या काली सरसों! जानें किसका असर है ज्यादा जबरदस्त

Difference between yellow and black mustard seeds: भारत की हर रसोई में सरसों का तड़का खुशबू और स्वाद की खास पहचान बन चुका है। चाहे गांव की रसोई हो या शहर का किचन, यह छोटा-सा दाना हर पकवान में अपना जादू बिखेर देता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सरसों दो प्रकार की होती है पीली और काली और दोनों का स्वाद, प्रभाव और इस्तेमाल बिल्कुल अलग होता है?

अपडेटेड Nov 09, 2025 पर 9:01 AM
Story continues below Advertisement
Difference between yellow and black mustard seeds: सरसों की खेती भी दोनों प्रकार की अलग-अलग होती है।

भारत में सरसों का नाम आते ही हर किसी के मन में देसी खाने की खुशबू ताजा हो जाती है। ये छोटा-सा बीज केवल मसाले का काम नहीं करता, बल्कि हमारी रसोई, परंपरा और औषधीय प्रयोगों का भी अहम हिस्सा है। गांव की मिट्टी में पका सरसों का साग हो या शहर की रसोई में तड़के की खुशबू हर जगह सरसों अपनी मौजूदगी दर्ज कराता है। इसके दाने और तेल दोनों ही खाने के स्वाद को बढ़ाते हैं और सेहत के लिए फायदेमंद माने जाते हैं। सरसों का रंग और स्वाद इसे और खास बनाता है। पीली सरसों हल्की और मृदु होती है, जबकि काली सरसों तीखी और झनझनाती होती है।

भारतीय रसोई में ये हर थाली में अपनी पहचान छोड़ती है। इसके तेल और दानों में ऐसे पोषक तत्व मौजूद हैं जो पाचन सुधारते हैं, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं और शरीर को ऊर्जावान बनाए रखते हैं।

दो तरह के सरसों


सरसों दो रूपों में मिलती है – पीली और काली। दोनों ही खाने में अलग स्वाद और रंग लाते हैं। पीली सरसों हल्की और मृदु होती है, इसलिए उत्तर भारत में इसे चटनी, अचार और सॉस में खूब इस्तेमाल किया जाता है। इसका तेल हल्का होता है और खाने का स्वाद बढ़ाता है। इसमें विटामिन A, C, E, मैग्नीशियम और फाइबर भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो पाचन सही रखने, रोगों से बचाव और शरीर को तंदुरुस्त रखने में मदद करते हैं। काली सरसों या राई रंग में गहरी और स्वाद में तीखी होती है। इसे दक्षिण भारत और बंगाल में ज्यादा पसंद किया जाता है। राई का तेल खाने का स्वाद बढ़ाता है और औषधीय गुणों से भी भरपूर है। ये जोड़ों के दर्द, सर्दी-जुकाम और त्वचा की समस्याओं में राहत देता है। इसकी गर्म तासीर शरीर में रक्त संचार बढ़ाती है और सर्दी में शरीर को गर्म रखती है।

खेती में अलग पहचान

सरसों की खेती भी दोनों प्रकार की अलग-अलग होती है। पीली सरसों ठंडे मौसम में अच्छी उगती है, जबकि काली सरसों किसी भी मौसम में आसानी से बढ़ जाती है। किसान पीली सरसों से तेल के साथ-साथ फूलों का इस्तेमाल मधुमक्खी पालन और शहद बनाने में भी करते हैं।

Tips and Tricks: ड्राई क्लीनिंग पर पैसे खर्च करने की जरूरत नहीं, घर पर ऐसे करें ऊनी कपड़ों की सफाई

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।