सर्दियों में घर में हीटर या अंगीठी का इस्तेमाल करना आम है, लेकिन कभी-कभी यह हमारी सुरक्षा के लिए खतरे का कारण बन जाता है। हाल ही में ऐसी कई घटनाएं सामने आई हैं, जहां रात भर बंद कमरे में अंगीठी जलाने या हीटर चलाने के कारण पूरे परिवार की मौत हो गई। इसका मुख्य कारण है कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) गैस, जो बंद कमरे में ऑक्सीजन की कमी से बनती है। CO गैस रंगहीन और गंधहीन होती है, इसलिए इसे महसूस करना मुश्किल होता है। यह गैस फेफड़ों के जरिए खून में मिलकर हीमोग्लोबिन से जुड़ जाती है, जिससे शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति रुक जाती है। इंसान नींद में ही बेहोश हो जाता है और धीरे-धीरे उसकी मौत भी हो सकती है।
सिर्फ CO गैस ही नहीं, हीटर कमरे की नमी भी सोख लेता है, जिससे त्वचा ड्राई और आंखों में जलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। अस्थमा या ब्रोंकाइटिस के मरीजों के लिए यह हवा और भी हानिकारक होती है। इसलिए हीटर या अंगीठी का इस्तेमाल सुरक्षा के नियमों के साथ करना बेहद जरूरी है
‘साइलेंट किलर’ कार्बन मोनोऑक्साइड
कार्बन मोनोऑक्साइड एक रंगहीन और गंधहीन गैस है। जब कोयला, लकड़ी या गैस जलती है, तो उसे जलने के लिए ऑक्सीजन की जरूरत होती है। बंद कमरे में ऑक्सीजन धीरे-धीरे खत्म होने लगती है और CO गैस बनती है। यह गैस फेफड़ों से खून में मिलकर हीमोग्लोबिन से जुड़ जाती है, जिससे शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति रुक जाती है। इंसान नींद में ही बेहोश हो जाता है और धीरे-धीरे उसकी मौत हो सकती है।
हीटर के कारण त्वचा और आंखों की समस्याएं
हीटर कमरे की नमी को सोख लेता है। इससे त्वचा ड्राई और आंखों में जलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। अस्थमा या ब्रोंकाइटिस के मरीजों के लिए यह हवा और भी हानिकारक होती है। ऑक्सीजन की कमी से सिरदर्द, चक्कर और कमजोरी महसूस होती है, विशेषकर सुबह उठते समय।