हर घर में खाना बनने के बाद जो काम सबसे ज्यादा समय और मेहनत मांगता है, वह है बर्तन धोना। ये एक ऐसा रोजमर्रा का काम है जिसे कोई पसंद नहीं करता, लेकिन करना सबको पड़ता है। आज के समय में जहां लोग अपनी लाइफस्टाइल को आसान और तेज बनाना चाहते हैं, वहीं इस काम को लेकर एक नया विकल्प तेजी से लोकप्रिय हो रहा है डिशवॉशर। एक तरफ पारंपरिक तरीका है जिसमें हाथ से बर्तन धोकर तुरंत सफाई मिलती है, तो दूसरी तरफ आधुनिक मशीन है जो अपने आप पूरे ढेर को साफ करने का दावा करती है।
लेकिन असली सवाल यही है कि क्या डिशवॉशर सच में हाथ से बेहतर और किफायती है, या फिर यह सिर्फ एक लग्जरी और महंगा विकल्प बनकर रह जाता है। पानी की बचत, समय की कीमत और मेहनत के बीच यह तुलना हर परिवार के लिए एक अहम फैसला बन चुकी है।
डिशवॉशर को अक्सर पानी बचाने वाली मशीन कहा जाता है। एक साइकल में यह लगभग 9 से 15 लीटर पानी इस्तेमाल करता है। वहीं हाथ से बर्तन धोते समय अगर नल खुला रह जाए, तो पानी का खर्च कई गुना बढ़ सकता है। यानी बड़ी फैमिली में डिशवॉशर ज्यादा किफायती साबित हो सकता है।
डिशवॉशर का सबसे बड़ा फायदा है, समय की बचत। मशीन भले 1–3 घंटे ले, लेकिन आपका काम सिर्फ बर्तन रखना और निकालना होता है। वहीं हाथ से धोने में रोज 20–40 मिनट लगातार मेहनत करनी पड़ती है, जो साल भर में सैकड़ों घंटे बन जाते हैं।
हाथ से धोने की अपनी आज़ादी
हाथ से बर्तन धोने का फायदा यह है कि आप तुरंत काम कर सकते हैं। एक कप हो या एक पैन, बस धोया और काम खत्म। छोटे परिवार या कम बर्तन वाले घरों में यह तरीका आसान और सस्ता भी पड़ता है।
डिशवॉशर हाई-टेम्परेचर पानी और डिटर्जेंट से बर्तनों को साफ करता है, जिससे ग्रीस और बैक्टीरिया ज्यादा अच्छे से हटते हैं। लेकिन बहुत ज्यादा जले या चिपके हुए बर्तनों को कभी-कभी पहले साफ करना पड़ता है।
डिशवॉशर खरीदना महंगा जरूर है, लेकिन इसका चलाने का खर्च उतना भारी नहीं होता। डिटर्जेंट, नमक और मेंटेनेंस मिलाकर हर महीने कुछ सौ रुपये का खर्च आता है। वहीं हाथ से धोने में कोई मशीन खर्च नहीं होता, लेकिन मेहनत लगातार करनी पड़ती है।
भारत के कई इलाकों में पानी हार्ड होता है, जिससे बर्तनों पर सफेद दाग पड़ सकते हैं। ऐसे में डिशवॉशर में सॉल्ट का इस्तेमाल जरूरी हो जाता है ताकि मशीन और बर्तन दोनों सुरक्षित रहें।
आखिरी फैसला क्या कहता है?
डिशवॉशर पैसे बचाने से ज्यादा सुविधा और समय बचाने के लिए है। वहीं हाथ से बर्तन धोना अभी भी सबसे आसान और किफायती तरीका है छोटे घरों के लिए।