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IMD Heatwave Warning: लू के बीच समझिए शरीर का कूलिंग सिस्टम कब हो जाता है फेल

IMD Heatwave Warning: भारत मौसम विभाग ने कई राज्यों में लू को लेकर चेतावनी दी है। तेज़ होती गर्मी के बीच यह समझना जरूरी है कि इंसान का शरीर आखिर कितनी तापमान तक सुरक्षित रह सकता है। आइए जानते हैं कि शरीर की सहनशक्ति की सीमा क्या है और कब यह स्थिति खतरनाक रूप ले लेती है

MoneyControl Newsअपडेटेड Apr 25, 2026 पर 10:04 AM
IMD Heatwave Warning: लू के बीच समझिए शरीर का कूलिंग सिस्टम कब हो जाता है फेल
IMD Heatwave Warning: तेज गर्मी और लू को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।

देशभर में गर्मी का असर दिन-ब-दिन तेज होता जा रहा है और कई राज्यों में लू की स्थिति लोगों के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्य प्रदेश, बिहार और झारखंड जैसे इलाकों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंचने से जनजीवन प्रभावित हो रहा है। दोपहर के समय बाहर निकलना मुश्किल हो गया है और शरीर पर गर्मी का असर साफ महसूस होने लगा है। ऐसे हालात में यह सवाल और भी अहम हो जाता है कि इंसान का शरीर आखिर कितनी गर्मी तक सुरक्षित रह सकता है।

क्या सिर्फ तापमान ही खतरा तय करता है या इसके पीछे और भी कारक काम करते हैं? बढ़ती गर्मी के बीच शरीर की सहनशक्ति की सीमा को समझना जरूरी हो जाता है, ताकि समय रहते सावधानी बरतकर गंभीर स्थिति से बचा जा सके।

 ‘वेट बल्ब तापमानक्या है और क्यों है अहम?

हम अक्सर सिर्फ तापमान देखकर गर्मी का अंदाजा लगाते हैं, लेकिन असली तस्वीर ‘वेट बल्ब तापमान’ से सामने आती है। यह गर्मी और नमी का संयुक्त असर होता है। पहले माना जाता था कि 35°C तक का वेट बल्ब तापमान सहनीय है, लेकिन नए शोध बताते हैं कि 30-31°C के आसपास ही शरीर की कूलिंग क्षमता कमजोर पड़ने लगती है। इसके बाद शरीर खुद को ठंडा रखने में असफल हो सकता है।

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