आजकल K-ड्रामा का असर सिर्फ एंटरटेनमेंट तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ब्यूटी ट्रेंड्स पर भी साफ दिखाई दे रहा है। भारत में “कोरियन ग्लास स्किन” का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है, जहां खासकर Gen Z इस परफेक्ट, चमकदार और बेदाग स्किन को पाने के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रही है। सोशल मीडिया पर हर दूसरा वीडियो इसी ग्लोइंग लुक को हासिल करने के टिप्स से भरा हुआ है, जिससे युवाओं में इसे पाने की चाह और बढ़ती जा रही है। महंगे ट्रीटमेंट, लंबी स्किन केयर रूटीन और नए-नए प्रोडक्ट्स के इस्तेमाल का ट्रेंड तेजी से बढ़ा है।
हालांकि, इस ट्रेंड के पीछे भागते हुए कई लोग ये भूल जाते हैं कि हर स्किन अलग होती है और हर किसी के लिए एक जैसा रिजल्ट पाना संभव नहीं होता। यही वजह है कि अब इस ट्रेंड पर सवाल भी उठने लगे हैं।
क्या सच में मिल सकती है कोरियन ग्लास स्किन?
डर्मेटोलॉजिस्ट का कहना है कि भारतीयों के लिए बिल्कुल वैसी ग्लास स्किन पाना संभव नहीं है। चाहे आप कितनी भी महंगी क्रीम या ट्रीटमेंट क्यों न ले लें, रिजल्ट पूरी तरह वैसा नहीं मिलेगा।
स्किन का स्ट्रक्चर और जेनेटिक्स
डॉक्टर के अनुसार, भारतीय स्किन में ऑयल प्रोडक्शन ज्यादा होता है, जिससे पोर्स बड़े नजर आते हैं। इसके अलावा, हमारी स्किन में मेलानिन ज्यादा होता है, जिससे टैनिंग, पिगमेंटेशन और असमान रंग की समस्या ज्यादा रहती है।
भारत का तेज धूप (UV) और बढ़ता प्रदूषण भी स्किन को प्रभावित करता है। ये दोनों चीजें स्किन को डैमेज करती हैं और ग्लास जैसी पारदर्शी चमक आने नहीं देतीं।
डॉक्टर का कहना है कि “कोरियन ग्लास स्किन” के पीछे भागने के बजाय भारतीयों को अपनी “गोल्डन ग्लो” स्किन पर ध्यान देना चाहिए। इसके लिए रोजाना सनस्क्रीन लगाएं, हफ्ते में 2-3 बार हल्का एक्सफोलिएशन करें और सही स्किन प्रोडक्ट्स के लिए एक्सपर्ट से सलाह लें।