One District One Cuisine: झांसी का 'दाल-बाफला' है बुंदेलखंडी विरासत का वो स्वाद जिसके आगे शाही दावतें भी फीकी पड़ जाएं! जानिए इसका इतिहास
One District One Cuisine: झांसी का दाल-बाफला बुंदेलखंडी खान-पान की एक शाही विरासत है, जिसे उबालने के बाद कंडों की आंच पर सेंक कर और शुद्ध देसी घी में डुबोकर तैयार किया जाता है।
झांसी, जो अपनी वीरता और इतिहास के लिए विश्व प्रसिद्ध है, स्वाद के मामले में भी किसी से पीछे नहीं है। यहां के खान-पान में मिट्टी की सौंधी खुशबू और शुद्धता की झलक मिलती है। झांसी और उसके आसपास के इलाकों में 'दाल-बाफला' केवल एक भोजन नहीं, बल्कि मेहमाननवाजी का प्रतीक है। हालांकि बाफला का मूल नाता मालवा क्षेत्र से भी जोड़ा जाता है, लेकिन झांसी ने इसे अपने मसालों और देसी घी के तड़के के साथ एक अनूठा 'बुंदेलखंडी ट्विस्ट' दिया है।
क्या है दाल-बाफला की खासियत?
बाफला, राजस्थान की 'बाटी' से थोड़ा अलग होता है। जहां बाटी को सीधे आग पर सेका जाता है, वहीं बाफले को पहले हल्दी और नमक वाले पानी में उबाला जाता है और फिर कंडों (उपलों) की आंच पर सेंका जाता है। उबालने की इस प्रक्रिया के कारण बाफला अंदर से रुई जैसा नरम और बाहर से बेहद कुरकुरा होता है। जब इसे फोड़कर शुद्ध देसी घी के कटोरे में डुबोया जाता है, तो इसका स्वाद दोगुना हो जाता है।
इसके साथ परोसी जाने वाली 'पंचमेल दाल' इसे मुकम्मल बनाती है। मूंग, चना, अरहर, मसूर और उड़द की दालों का मिश्रण, जिसमें हींग और सूखी लाल मिर्च का कड़क तड़का लगा हो, बाफले के साथ मिलकर एक जबरदस्त जुगलबंदी बनाता है।
रेसिपी
* तैयारी का समय: 25 मिनट
* पकाने का समय: 50-60 मिनट
* सर्विंग्स: 4-5 लोग
मुख्य सामग्री:
* बाफला के लिए: गेहूं का मोटा आटा (3 कप), मक्के का आटा (1/2 कप), दही (2 चम्मच), देसी घी (मोयन के लिए), अजवाइन, हल्दी और नमक।
* दाल के लिए: मिक्स दाल (अरहर, चना, मूंग - 1.5 कप), अदरक-लहसुन पेस्ट, हींग, जीरा, राई, सूखी लाल मिर्च और बारीक कटा हरा धनिया।
बनाने की विधि:
1. बाफला का डो तैयार करना:
एक बड़े बर्तन में आटा, मक्के का आटा, घी, दही, अजवाइन और नमक मिलाएं। गुनगुने पानी की मदद से थोड़ा सख्त आटा गूंथ लें। अब इसकी मध्यम आकार की लोइयां बना लें।
2. उबालने की प्रक्रिया
एक बड़े भगोने में पानी उबालें और उसमें थोड़ी हल्दी और एक चम्मच तेल डालें। जब पानी खौलने लगे, तो बाफलों को उसमें डाल दें। जब बाफले तैरकर ऊपर आ जाएं, तो समझ लें कि वे पक गए हैं। इन्हें निकालकर सुखा लें।
3. बेकिंग और घी स्नान:
इन उबले हुए बाफलों को पारंपरिक ओवन या कंडे की धीमी आंच पर सुनहरा भूरा होने तक सेकें। अच्छी तरह सिकने के बाद इन्हें हल्के हाथ से दबाकर फोड़ें और गरमा-गरम शुद्ध देसी घी में पूरी तरह डुबो दें।
4. तड़केदार दाल:
दाल को कुकर में हल्दी-नमक के साथ पका लें। एक कड़ाही में घी गर्म करें, उसमें राई, जीरा, हींग और सूखी लाल मिर्च का तड़का लगाएं। इसमें अदरक-लहसुन और प्याज डालकर भूनें और तैयार दाल में मिला दें।
सर्विंग टिप: 'बुंदेली थाली' का पूर्ण आनंद
झांसी में दाल-बाफला को अकेले नहीं परोसा जाता। इसके साथ लहसुन की तीखी चटनी, कटा हुआ प्याज, तली हुई हरी मिर्च और मीठे में चूरमा या मूंग की दाल का हलवा परोसा जाता है।
प्रो टिप: बाफले का असली स्वाद तब आता है जब इसे हाथों से मसलकर दाल में मिलाया जाए और ऊपर से थोड़ा और कच्चा घी डाला जाए। झांसी के स्थानीय मेलों और पारिवारिक समारोहों में आज भी इसे लकड़ी की आग पर ही बनाया जाता है, जिससे इसमें एक अनोखा 'स्मोकी फ्लेवर' आता है।