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One District One Cuisine: मुगलों के जमाने से है मुरादाबादी दाल का कनेक्शन, इसकी कहानी जानिए और घर पर बनाने का तरीका भी

One District One Cuisine: उत्तर प्रदेश की एक जनपद एक व्यंजन (ODOC) योजना के तहत मुरादाबाद की 400 साल पुरानी मुरादाबादी दाल को वैश्विक पहचान दी जा रही है। शहजादे मुराद बख्श की पसंदीदा यह मखमली मूंग दाल अब 20 लाख रुपये तक के सरकारी अनुदान और आधुनिक ब्रांडिंग के जरिए स्वरोजगार का नया जरिया बनेगी।

MoneyControl Newsअपडेटेड May 08, 2026 पर 2:48 PM
One District One Cuisine: मुगलों के जमाने से है मुरादाबादी दाल का कनेक्शन, इसकी कहानी जानिए और घर पर बनाने का तरीका भी

उत्तर प्रदेश सरकार ने पिछले दिनों एक जनपद एक व्यंजन यानी वन डिस्ट्रिक्ट वन कुजीन (ODOC) योजना को स्वीकृति दी है। इसके तहत यूपी के सभी जिलों के पारंपरिक व्यंजनों को अब राज्य, देश और वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान मिलेगी। इन्हें मॉडर्न टेक्नोलॉजी, शानदार पैकेजिंग और ब्रांडिंग की मदद से देश और विदेश तक पहुंचाया जाएगा। खास बात यह है कि इस कवायद में लगे लोगों के रोजगार को सपोर्ट करने के लिए अधिकतम 20 लाख रुपये (योजना का 25 फीसदी) तक के अनुदान देने की व्यवस्था भी की गई है। यूपी की योगी सरकार ने इसके लिए 150 करोड़ रुपये का प्रावधान भी किया है। आइए इसी कड़ी में हम आपको परिचित कराते हैं उत्तर प्रदेश के रिच खानपान से। यहां आपको बताएंगे कि यूपी के किस जिले का कौन सा कुजीन ODOC की लिस्ट में शामिल है और अगर आप इसे घर पर बनाना चाहें तो कैसे बनाएं। आज की शुरुआत करते हैं मशहूर मुरादाबादी दाल से.

उत्तर प्रदेश का मुरादाबाद जिला अपनी पीतल की कारीगरी के लिए दुनिया भर में मशहूर है। स्वाद की दुनिया में इस शहर की असली पहचान यहां की मुरादाबादी दाल से है। यूपी में 'एक जिला, एक उत्पाद' (ODOP) योजना के तहत पीतल उद्योग को तो बढ़ावा मिल ही रहा है, लेकिन अब मुरादाबादी दाल को भी इस पहल के जरिए राष्ट्रीय स्तर पर एक नई और विशिष्ट पहचान मिल रही है। यह सिर्फ एक व्यंजन नहीं, बल्कि मुरादाबाद की सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत का एक अहम हिस्सा है। मुरादाबादी दाल की कहानी और इसे घर पर बनाने तरीका आज आप जान ही लीजिए-

मुरादाबादी दाल का शाही इतिहास

मुरादाबादी दाल का इतिहास लगभग 400 साल पुराना है। इसकी शुरुआत 1625 के आसपास मानी जाती है, जब मुगल बादशाह शाहजहां के बेटे शहजादे मुराद बख्श ने मुरादाबाद शहर की नींव रखी थी। इतिहासकारों और जानकारों के अनुसार शहजादे मुराद बख्श को राजस्थानी मूंग दाल का स्वाद बहुत प्रिय था, लेकिन वे इसमें कुछ नयापन और अलग स्वाद चाहते थे। उनकी इस ख्वाहिश को पूरा करने के लिए शाही रसोइयों ने मूंग की धुली दाल को धीमी आंच पर घंटों पकाकर एक नया टेस्ट बना दिया। शहजादे को दाल का यह हल्का और मखमली रूप इतना पसंद आया कि वे इसे दिन में कई बार अलग-अलग टॉपिंग्स के साथ खाना पसंद करने लगे। तभी से यह दाल मुरादाबाद की पहचान बन गई।

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